अबतक इंडिया न्यूज देशनोक 29 मई । जहां एक ओर आमजन भीषण गर्मी से त्रस्त व बेहाल हैं वहीं बिगड़ती बिजली -पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं सरेआम प्रशासन व सरकार के दावों की पोल खोल रही हैं। या फिर यूं कहिए मुंह चिढ़ा रही हैं। केवल जनता ही नहीं बिजली-पानी विभाग भी पुरानी व्यवस्थाओं के सहारे आधुनिक सुविधाएं देने की कोशिशें तो कर रहे हैं लेकिन सीमित स्त्रोतों के कारण आमजन के आक्रोश का प्रकोप भी झेल रहे हैं।दावों, कागजों ,खबरों व पोस्टरों में सिमटा विकास धरातल पर बेहोशी में सिसक रहा हैं।
देशनोक जैसी बीकानेर की प्रमुख धार्मिक नगरी पीएम मोदी के दौरे के बावजूद प्राथमिक मूलभूत बिजली-पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही हैं। रखरखाव के नाम पर प्रति वर्ष जलबन्दी व बिजली कटौती की जाती हैं लेकिन परिणाम चिरंतन शून्य हैं।फिर ये औपचारिकताएं क्यों ..?
स्थानीय बिजली विभाग का कहना हैं कि जिस गति से बिजली की खपत बढ़ी हैं उस स्तर की क्षमतापूर्ण मशीनरी के अभाव में व्यवस्थाएं कईबार बे-काबू हो जाती हैं। पुराने बिजली तारों की आज की खपत के अनुसार क्षमता नहीं होने के कारण बार-बार बिजली आपूर्ति बाधित हो रही हैं। प्रस्ताव बनाकर भेजे गए है,स्वीकृति मिलने पर जल्द व्यवस्थाएं सुधरेगी। हालांकि नए ट्रांसफार्मर लगाने के लिए RDSS स्कीम में निजी ठेका तो हो रखा हैं लेकिन काम केवल कागजों तक ही सीमित हैं।
यही हाल पेयजल आपूर्ति का हैं।क्योंकि पेयजल आपूर्ति भी बिजली की उपलब्धता पर निर्भर हैं।बिगड़ती बिजली व्यवस्था व अघोषित कटौती एवं अप-डाउन वोल्टेज के कारण जलापूर्ति बाधित हो रही हैं। अनियंत्रित वोल्टेज के कारण लोगों के बिजली उपकरण नष्ट हो रहे हैं। कुल मिलाकर व्यवस्थाएं राम भरोसे हैं।










