अबतक इंडिया न्यूज देशनोक 21 जून । भारतीय संस्कृति, इतिहास और पारिवारिक परंपराओं को सहेजने के उद्देश्य से कार्यरत ‘अखिल भारतीय वंशावली संरक्षण एवं संवर्धन संस्थान’ की दो दिवसीय राष्ट्रीय बैठक देशनोक में सफलतापूर्वक संपन्न हुई। बैठक में देशभर के 10 प्रांतों से आए 46 प्रांतीय पदाधिकारियों ने शिरकत की और देश की प्राचीन वंशावली लेखन परंपरा को बचाने व उसके आधुनिकीकरण पर मंथन किया।
नई पीढ़ी तक पहुँचाना है प्राचीन धरोहर: राष्ट्रीय अध्यक्ष
बैठक को संबोधित करते हुए संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष परमेश्वर ब्रह्मभट्ट ने कहा कि संस्थान का मुख्य उद्देश्य विभिन्न समाजों, जातियों और परिवारों की ऐतिहासिक वंशावलियों का संकलन, संरक्षण तथा नई पीढ़ी तक उनका हस्तांतरण सुनिश्चित करना है। उन्होंने आधुनिक तकनीक और डिजिटलीकरण के माध्यम से इस पारंपरिक ज्ञान को सुरक्षित रखने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया।
वंशावली लेखन सामाजिक इतिहास का मुख्य स्रोत: अरुणकांत
इस अवसर पर संस्थान के राष्ट्रीय संरक्षक एवं धर्म जागरण समन्वय के राष्ट्रीय सह प्रमुख अरुणकांत ने कहा कि भारतीय सभ्यता में वंशावली का विशेष महत्व रहा है। प्राचीन काल से ही भाट, राव, जागा, बड़वा व अन्य वंशावली लेखक परिवारों के इतिहास, सामाजिक परंपराओं और पीढ़ियों का लेखा-जोखा सुरक्षित रखते आए हैं। यह धरोहर न केवल पारिवारिक पहचान का आधार है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक इतिहास का भी एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्रोत है।
समय की मांग है सांस्कृतिक विरासत को सहेजना
बैठक में धर्म जागरण समन्वय के अखिल भारतीय परियोजना प्रमुख ने बदलते सामाजिक परिवेश पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज के दौर में पारिवारिक इतिहास को सहेजना समय की सबसे बड़ी मांग है। वंशावली अभिलेखों के माध्यम से ही हम अपनी सामाजिक संरचना और रीति-रिवाजों को गहराई से समझ सकते हैं।
संस्थान की अपील:
संस्थान ने समाज के सभी वर्गों से आह्वान किया है कि वे अपने पारिवारिक अभिलेखों, पुरानी वंशावलियों और ऐतिहासिक दस्तावेजों को सुरक्षित रखें तथा इस राष्ट्रव्यापी संरक्षण अभियान से जुड़ें।
संस्थान के राष्ट्रीय महामंत्री बाबूलाल भाट ने बताया कि दो दिवसीय बैठक में संगठनात्मक चर्चा के साथ-साथ भविष्य में राष्ट्रीय व प्रांतीय स्तर पर सम्मेलनों, संगोष्ठियों और जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए युवा पीढ़ी को इस मुहिम से जोड़ने की रूपरेखा तैयार की गई है।











