अबतक इंडिया न्यूज देशनोक 13 अगस्त । लम्बे समय से देशनोक नगरपालिका अध्यक्ष सीट के आरक्षण वर्ग को लेकर चल रही सियासी अटकालों पर लॉटरी निकलने के बाद विराम लगा गया। लॉटरी पूर्व आरक्षण वर्ग के बुते पालिका प्रमुख बनने के सियासी सपने देखने वाले कई दावेदारों के खेमे में मायूसी हैं, वहीं दूसरे खेमे में खुशी की लहर हैं।हालांकि अभी खुशी और गम का एक दौर बाकी हैं. 17अगस्त को होनेवाली वार्डों की आरक्षण लॉटरी के बाद कई वार्डों के ठेकेदारों के सपने धारासयी हो सकते हैं।पालिका प्रमुख का पद सामान्य वर्ग का होने से भाजपा व कांग्रेस में मुकाबला रोचक होने की पूरी संभावना हैं।

भ्रष्टाचार बनेगा बड़ा चुनावी मुद्दा…?
वर्षों बाद 2021 में निर्दलियों के बुते बने कांग्रेस बोर्ड के कार्यकाल के विकास के दावे अब जनता की कसौटी पर होंगे । दूसरी और भ्रष्टाचार के आरोपों व गुटबाजी में उलझी भाजपा के लिए भी सियासी डगर आसान नहीं होगी। दोनों ही राष्ट्रीय पार्टियों की अंतरकलह भी जग जाहिर हैं। ऐसे नेतृत्व के सामने पार्टी की एकता व टिकट वितरण बड़ी चुनौती रहने वाली हैं। चुनावी मुद्दा भी बड़ा सरदर्द होगा। क्यूंकि विकास कार्यों के दावे व उनकी गुणवत्ता इसबार जनता की कसौटी पर होंगे।
सामान्य सीट से कांग्रेस मे उत्साह
देशनोक पालिका प्रमुख की सामन्य वर्ग ओपन की सीट आने से कांग्रेस में खासा उत्साह हैं।कांग्रेस में सामन्य वर्ग की दावेदारी में पूर्व चेयरमैन ओमप्रकाश मुंधड़ा के सामने पार्टी के अंदर कोई मजबूत दावेदार नहीं हैं। वहीं दूसरी और भाजपा में स्थिति जटिल हो सकती हैं। भाजपा में सामन्य वर्ग के कई एक -दूसरे के समकक्ष दावेदार हैं। हालांकि यह निर्भर करेगा चुनाव परिणामों के बाद कितने और कौन-कौन से दावेदार जीत हासिल करेंगे। तुलनात्मक दृष्टिकोण से पार्टी के भीतरखाने की बात करें तो पालिका प्रमुख दावेदार को लेकर कांग्रेस में प्रथम दृष्टिया स्थिति लगभग स्पष्ट हैं।
पिछली बार के मुकाबले इसबार चुनाव बेहद रोचक होने की प्रबलता
पिछली बार 2021 में हुए पालिका चुनाव के समय प्रदेश में सरकार कांग्रेस की थी। क्षेत्रीय विधायक भी सरकार में मंत्री पद पर थे। लेकिन इसबार सियासी स्थिति उलट हैं। क्षेत्रीय विधायक व सरकार दोनों ही भाजपा की हैं। पिछली बार कांग्रेस फ्रंट फुट पर होने के बावजूद बहुमत हासिल करने में नाकाम रही। इसबार कांग्रेस के लिए सियासी हालात पिछली बार की तरह इतने अनुकूल नहीं हैं।अपनी ही पार्टी की सरकार व क्षेत्रीय विधायक के मंत्री होने के बावजूद भी पालिका स्तर के कार्यों के लिए पालिका की जमीन बेचनी पड़ी।
पूर्व पालिका प्रमुख पर भ्रष्टाचार, ओरण भूमि मे अवैध निर्माण, अनियमितता सहित दो मुकदमे भी दर्ज हुए। हालांकि उस समय विपक्ष मे भाजपा संख्याबल के लिहाज से मजबूत स्थिति मे होने के बावजूद कांग्रेस को काउंटर करने मे नाकाम रही। भाजपा के कई पार्षदों पर तो ” कांग्रेस शरणम गच्छामि ” तक का हेशटैग लगा। हेशटैग के वाले पूर्व भाजपाई पार्षदों के लिए इसबार पार्टी मे टिकट के लिए दावेदारी बेहद मुश्किल रहने वाली हैं।












