अबतक इंडिया न्यूज जयपुर 26 जून । राजस्थान में आगामी पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों को देखते हुए भजनलाल सरकार बड़ा सियासी दांव खेलने की तैयारी में है। राज्य में संगठनात्मक और सामाजिक समीकरणों को साधने के लिए जल्द ही राजनीतिक नियुक्तियों का नया दौर शुरू होने जा रहा है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि चुनावों से ठीक पहले पार्टी के जमीनी और सक्रिय नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देकर संगठन को और अधिक मजबूत और ऊर्जावान बनाने की कोशिश की जा रही है।
वर्तमान में प्रदेश के 110 से अधिक बोर्ड, आयोग, निगम और शहरी विकास संस्थाओं (UITs) में अध्यक्षों, उपाध्यक्षों और सदस्यों के पद खाली पड़े हैं, जिन्हें अब जल्द ही भरा जाएगा।
इन प्रमुख बोर्ड और आयोगों में टिकी हैं नेताओं की निगाहें
सूत्रों के मुताबिक, जिन महत्वपूर्ण संस्थाओं में नियुक्तियां होनी हैं, उनमें मुख्य रूप से ये शामिल हैं:
आर्थिक एवं विकास बोर्ड: राजस्थान खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड, राजस्थान स्टेट एग्रो इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट बोर्ड, पर्यटन विकास निगम (RTDC), आवासन मंडल (Housing Board)।
सामाजिक एवं वर्ग कल्याण आयोग: राज्य महिला आयोग, बाल अधिकार संरक्षण आयोग, पिछड़ा वर्ग आयोग, अल्पसंख्यक आयोग, अनुसूचित जनजाति (ST) आयोग, समाज कल्याण बोर्ड और केश कला बोर्ड।
संवैधानिक एवं नियामक निकाय: राज्य मानवाधिकार आयोग, राज्य उपभोक्ता आयोग।
युवा एवं संस्कृति: राज्य खेल परिषद, युवा बोर्ड और प्रदेश की कई प्रमुख अकादमियां।
महत्वपूर्ण क्यों हैं ये संस्थाएं?
जानकारों का कहना है कि इन संस्थाओं की भूमिका केवल औपचारिक नहीं होती। ये सरकार को नीतिगत सुझाव देने, जनकल्याणकारी योजनाओं की निगरानी करने, विभिन्न समाजों और वर्गों के हितों की रक्षा करने के साथ-साथ सरकार और आम जनता के बीच एक मजबूत सेतु (समन्वय) का काम करती हैं।
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष बोले— ‘सूचियां तैयार, जल्द होगी घोषणा’
राजनीतिक नियुक्तियों में हो रही देरी को लेकर लग रहे कयासों पर विराम लगाते हुए भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि संगठन के स्तर पर सभी सूचियां पूरी तरह से तैयार कर ली गई हैं।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री और संगठन के शीर्ष नेतृत्व के बीच इस संबंध में विस्तृत चर्चा हो चुकी है। अब अंतिम सूची जारी करने का अधिकार मुख्यमंत्री के पास है और बहुत जल्द ही इन राजनीतिक नियुक्तियों की आधिकारिक घोषणा कर दी जाएगी। माना जा रहा है कि यह फैसला न केवल प्रशासनिक कसावट लाएगा, बल्कि भाजपा के लिए कार्यकर्ताओं को रिचार्ज करने का बड़ा जरिया बनेगा।
विपक्ष का हमला: “ढाई साल होने को आए, सरकार गंभीर नहीं”
दूसरी तरफ, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर सरकार की घेराबंदी शुरू कर दी है। कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता स्वर्णिम चतुर्वेदी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा:
“मौजूदा सरकार आम जनता की समस्याओं को लेकर बिल्कुल भी गंभीर नहीं है। सरकार का करीब आधा कार्यकाल (ढाई साल) पूरा होने को है, लेकिन अब तक आम जनता से सीधे जुड़े कई महत्वपूर्ण बोर्ड और आयोग बिना मुखिया के ठप पड़े हैं। हाल ही में जो इक्का-दुक्का नियुक्तियां हुई भी हैं, उनकी चयन प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं रही है। चयन पूरी तरह से संस्थागत और पारदर्शी होना चाहिए।”
सियासी गलियारों में बढ़ी हलचल
निकाय और पंचायत चुनावों से ठीक पहले होने वाली इन नियुक्तियों पर लंबे समय से इंतजार कर रहे भाजपा के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं की निगाहें टिक गई हैं। अब हर किसी को मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) से निकलने वाली संभावित सूची का बेसब्री से इंतजार है, क्योंकि ये नियुक्तियां आगामी चुनावों में टिकट वितरण और क्षेत्रीय समीकरणों को भी काफी हद तक प्रभावित करेंगी।











