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देशनोक :15 वर्षों में 50 से अधिक जानलेवा हादसे, 25 से ज्यादा लोगों ने गंवाई जान, ​पीडब्ल्यूडी, पुलिस और जिला प्रशासन बेखबर; बीकानेर दौरे पर आ रहे सीएम भजनलाल शर्मा से ग्रामीणों की अंतिम आस

राजस्थान के बीकानेर जिले में देशनोक-जेगला मार्ग पर स्थित ‘महेश दान जी ढाणी’ का प्रवेश मार्ग आज स्थानीय निवासियों के लिए खौफ का पर्याय बन चुका है। लगभग 55 परिवारों और 350 की आबादी वाली इस ढाणी के मुहाने पर बना एक तीखा मोड़ प्रशासनिक अनदेखी के कारण “मौत का मोड़” बन चुका है। पिछले 15 वर्षों में इस एक मोड़ ने 50 से अधिक दुर्घटनाओं में 25 से ज्यादा निर्दोष लोगों की बलि ले ली है, लेकिन लोक निर्माण विभाग (PWD) और स्थानीय प्रशासन की नींद अब तक नहीं खुली है।
​कागजी पत्राचार में उलझा जन-अधिकार
​ढाणी के जागरूक नागरिकों—गुमान दान, कुशाल दान और विजय दान—के नेतृत्व में ग्रामीण लंबे समय से इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए संघर्ष कर रहे हैं। पंचायत, नगरपालिका, पुलिस थाना से लेकर जिला कलेक्टर कार्यालय तक दर्जनों बार लिखित और मौखिक गुहार लगाई जा चुकी है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क पर स्पीड ब्रेकर, स्पष्ट संकेतक (साइन बोर्ड) और डिवाइडर जैसी बुनियादी मांगें भी 15 साल से फाइलों में धूल फांक रही हैं।
मुख्य बिंदु विवरण

‘अगला नंबर किसका?’ — खौफ के साए में जीने को मजबूर ग्रामीण

​राजनीतिक दृष्टिकोण से गीगासर पंचायत का हिस्सा होने के कारण यह क्षेत्र प्रशासनिक खींचतान और उपेक्षा का शिकार भी बनता रहा है। हादसे होने पर पुलिस और प्रशासन मौका मुआयना करके लौट जाते हैं, लेकिन धरातल पर सुधार का काम शून्य रहता है। ढाणी वासियों की पीड़ा स्पष्ट है— “हर हादसे के बाद सिर्फ लाशें उठती हैं। हम हर दिन इसी डर में जीते हैं कि इस ‘मौत के मोड़’ पर अगला नंबर किसका होगा?”
​14-15 अगस्त को बीकानेर दौरे पर सीएम: मुख्यमंत्री से ही बची है अंतिम उम्मीद

​प्रदेश के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा 14 और 15 अगस्त को बीकानेर दौरे पर आ रहे हैं। प्रशासनिक सीढ़ियां चढ़-चढ़कर थक चुके ग्रामीणों ने अब मीडिया के माध्यम से सीधे मुख्यमंत्री से इस खूनी मोड़ से निजात दिलाने की गुहार लगाई है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि संवेदनशील मुख्यमंत्री इस मामले का कड़ा संज्ञान लेंगे और जिम्मेदार विभाग की कुंभकर्णी नींद तोड़कर इस मार्ग पर तुरंत सुरक्षा इंतजाम दुरुस्त करने के कड़े निर्देश जारी करेंगे।

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