अबतक इंडिया न्यूज 12 अगस्त बीकानेर। प्रदेश में गौचर, ओरण, चारागाह और पारंपरिक जल स्रोतों (तालाब, बावड़ी, पायतन) के अस्तित्व को बचाने के लिए पूर्व सिंचाई मंत्री व वरिष्ठ नेता देवी सिंह भाटी ने मोर्चा खोल दिया है। भाटी ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, राजस्व एवं उपनिवेशन मंत्री तथा मुख्य सचिव समेत शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों को पत्र भेजकर पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में जारी तीन प्रमुख आदेशों को विलोपित (रद्द) करने की पुरजोर मांग की है।
देवी सिंह भाटी ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार द्वारा राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 की धाराओं की गलत व्याख्या कर 23 सितंबर 2021 को आदेश जारी किया गया था। इसके बाद स्वायत्त शासन विभाग (DLB) द्वारा 17 अप्रैल 2025 और 1 सितंबर 2025 को स्पष्टीकरण आदेश जारी कर गौचर भूमि के उपयोग व अवाप्ति का रास्ता आसान कर दिया गया। इन आदेशों से प्रदेश भर की चारागाह भूमि के बड़े हिस्से पर खतरा मंडरा रहा है।

पत्र में उठाए गए मुख्य बिंदु व मांगें:
- कानूनी व अदालती आदेशों का हवाला: भाटी ने ‘गुलाब कोठारी बनाम राज्य सरकार’ और हालिया ‘वन्य जीव सेवार्थ फाउंडेशन बनाम राजस्थान सरकार’ मामलों में उच्च न्यायालय व सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अदालतों ने स्पष्ट किया है कि विकास कार्यों के लिए गौचर के बजाय उपलब्ध सरकारी (अराजीराज) या निजी भूमि का उपयोग किया जाना चाहिए।
- पशुधन व ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर संकट: राजस्थान में गौचर और ओरण केवल जमीन नहीं, बल्कि ऊंट, भेड़, बकरी और गोवंश के लिए प्राकृतिक आधार हैं। चारागाह कम होने से पशुपालकों की आजीविका, वन्यजीवों और पर्यावरणीय संतुलन पर सीधा असर पड़ रहा है।
- तीन विवादित आदेशों को तुरंत रद्द करने की मांग: 23 सितंबर 2021 के मूल आदेश, 17 अप्रैल 2025 तथा 1 सितंबर 2025 के DLB आदेशों की समीक्षा कर उन्हें अविलंब विलोपित किया जाए।
- पर्यावरण अभियान की मूल भावना से जोड़ :प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसे अभियानों का जिक्र करते हुए भाटी ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों व जीव-जगत का संरक्षण सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।











