अबतक इंडिया न्यूज 16 अप्रैल । जोधपुर राजस्थान हाईकोर्ट ने अतिक्रमण हटाने से जुड़े अवमानना प्रकरण में राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए अंतिम मौका दिया है. कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि अगली सुनवाई तक आदेशों की पूर्ण पालना नहीं हुई तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी.
जस्टिस रेखा बोराणा की एकलपीठ के समक्ष सूरज प्रकाश दवे के उत्तराधिकारियों की ओर से अधिवक्ता विनीत आर दवे ने अवमानना याचिका पेश की. याचिका में पूर्व में दिए गए न्यायालय के आदेशों की पालना नहीं होने का मुद्दा उठाया गया था. न्यायालय ने 18 मार्च 2026 को सुनवाई के दौरान स्थानीय स्वशासन विभाग और नगरीय विकास एवं आवासन विभाग के प्रमुख सचिवों को अनुपालना रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे. साथ ही यह भी कहा गया था कि यदि आदेशों की पालना नहीं होती है तो संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना होगा. सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से समय बढ़ाने का अनुरोध किया गया.
सरकार ने अदालत को बताया कि इस मामले में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है, जिसकी बैठक 10 अप्रैल 2026 को आयोजित की गई. समिति के निर्णय के अनुसार कुल 194 अतिक्रमणकारियों को सार्वजनिक नोटिस जारी किए गए हैं और प्रत्येक को व्यक्तिगत नोटिस भी दिया गया है. इन नोटिसों के माध्यम से अतिक्रमण हटाने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है. सरकार ने यह भी दलील दी कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से पहले प्रभावित पक्षों को पर्याप्त अवसर देना जरूरी था, इसलिए यह प्रक्रिया अपनाई गई है.
आश्वासन दिया गया कि निर्धारित समयावधि के बाद अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी और उसकी अनुपालना रिपोर्ट अदालत में पेश की जाएगी. अदालत ने सरकार की इस दलील को स्वीकार करते हुए 12 सप्ताह का अतिरिक्त समय प्रदान किया, लेकिन इसके साथ ही सख्त रुख भी अपनाया. न्यायालय ने साफ कहा कि यदि अगली तारीख तक आदेशों की वास्तविक और पूर्ण पालना नहीं होती है तो किसी भी प्रकार की ढील नहीं दी जाएगी.
उस स्थिति में स्थानीय स्वशासन विभाग के प्रमुख सचिव, नगरीय विकास विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, जोधपुर नगर निगम के आयुक्त और जोधपुर विकास प्राधिकरण के सचिव को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा. मामले की अगली सुनवाई 10 जुलाई 2026 को होगी, जहां अनुपालना रिपोर्ट पेश की जाएगी.










