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एसीबी के मुख्यालय पहुंचे डॉ किरोड़ी लाल मीणा, दिया अल्टीमेटम, घूस खाई है तो करो गिरफ्तार

अबतक इंडिया न्यूज जयपुर 19 जून ।  राजस्थान की सियासत में एक अभूतपूर्व भूचाल आ गया है । प्रदेश के कद्दावर कैबिनेट मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के महानिदेशक को सीधे तौर पर ललकारते हुए एक अत्यंत आक्रामक और विस्फोटक पत्र लिख डाला। इस पत्र ने न केवल प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है, बल्कि विपक्षी खेमे में भी खलबली पैदा कर दी है। मंत्री ने बिना किसी लाग-लपेट के बेहद तीखे और धारदार लहजे में जांच एजेंसी को खुली चुनौती दी है । उन्होंने पत्र में कहा है कि तथाकथित ‘नकली बीज घूस कांड’ में उनके खिलाफ जनता के बीच फैलाई जा रही भ्रांतियों और आरोपों पर एसीबी तुरंत वास्तविक स्थिति स्पष्ट करे।

डॉ. मीणा यहीं नहीं रुके । उन्होंने अपने चिरपरिचित और बेबाक अंदाज में साफ कह दिया कि अगर इन आरोपों में रत्ती भर भी सच्चाई है तो एजेंसी में इतनी हिम्मत होनी चाहिए कि वह उन्हें तुरंत इन ‘मनगढ़ंत’ आरोपों के आधार पर गिरफ्तार करके दिखाए। इस एक कदम से मंत्री ने साफ कर दिया है कि वे बैकफुट पर रहकर रक्षात्मक राजनीति करने के बजाय फ्रंट फुट पर आकर पूरी ताकत से हमला करने में विश्वास रखते हैं। ​इस पूरे सियासी बवंडर की शुरुआत 10 जून 2026 को एक अखबार में छपी एक सनसनीखेज खबर से हुई थी ।
इस खबर से विपक्षी दलों को बैठे-बिठाए एक बड़ा मुद्दा थमा दिया था। समाचार में दावा किया गया था कि दर्ज एफआईआर में सतीश कुमार के नाम के साथ-साथ एक ‘डॉक्टर’ और ‘मंत्री’ का भी गुप्त उल्लेख है । जुगल नामक व्यक्ति ने बयान दिया है कि “अफसर ने 20 लाख रुपये रखे”। इस रिपोर्ट को ढाल बनाकर प्रतिपक्ष के दिग्गजों ने मंत्री पर गंभीर आरोप लगाए । पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने सीकर में खड़े होकर सीधे आरोप जड़ दिए कि कृषि विभाग का ही कोई व्यक्ति मंत्री के नाम पर 20-20 लाख रुपये की अवैध वसूली कर रहा है और छापेमारी की आड़ में धन उगाही कर ‘सेटिंग’ का खेल खेला जा रहा है।
इसके तुरंत बाद राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस कथित घूस कांड में सीधे मंत्री की भूमिका की उच्च स्तरीय जांच की मांग कर डाली । जबकि नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और हरीश चौधरी जैसे वरिष्ठ नेताओं ने पूरी ताकत से सीधा निशाना साधते हुए इस मामले में मंत्री की ‘मिलीभगत’ होने के गंभीर और संगीन आरोप मढ़ दिए। ​विपक्ष के इस सुनियोजित चक्रव्यूह को भेदने के लिए डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने न केवल राजनीतिक विरोधियों को आड़े हाथों लिया है, बल्कि खुद एसीबी की कार्यप्रणाली की निष्पक्षता और उसकी गोपनीयता पर भी एक बहुत बड़ा और गंभीर सवालिया निशान लगा दिया है।
मंत्री ने तथ्यात्मक रूप से यह उजागर किया है कि एसीबी की आधिकारिक वेबसाइट पर इस एफआईआर को 9 जून 2026 को दोपहर 1:30 बजे अपलोड किया गया था, लेकिन अचंभित करने वाली बात यह है कि एफआईआर के गोपनीय तथ्य आधिकारिक रूप से सार्वजनिक होने से पहले ही मीडिया और बाहर कैसे तैरने लगे थे। मंत्री ने इस पूरी लीक प्रक्रिया को एक गहरी प्रशासनिक और राजनीतिक साजिश करार देते हुए इसकी उच्च स्तरीय जांच की मांग की है ताकि पर्दे के पीछे बैठकर उनकी राजनीतिक हत्या का प्रयास करने वाले असली किरदारों को बेनकाब किया जा सके।
कुल मिलाकर, इस पत्र के जरिए डॉ. मीणा ने यह साबित कर दिया है कि उनकी बेदाग और जुझारू छवि पर कीचड़ उछालने की हर कोशिश का अंजाम बेहद आक्रामक होगा । अब गेंद पूरी तरह से जांच एजेंसी और सरकार के पाले में है कि वे इस राजनीतिक गतिरोध को शांत करने के लिए क्या कदम उठाते हैं। उधर एसीबी के अधिकारियों ने इस बारे में चुप्पी साध ली है । उधर इस पत्र के बाद एसीबी अधिकारियों के हाथ पांव फूल गए है । समझ नहीं आ रहा है कि इस पत्र पर क्या कार्रवाई करे ।

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