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त्यौहार की आड़ में मौत का खेल ! केवल निजी लाभ के लिए जानलेवा व्यापार ..? विराट की मौत का जिम्मेदार कौन .. ?

अबतक इंडिया न्यूज 18 अप्रैल देशनोक ।लक्ष्मीनारायण शर्मा ।  क्या निजी व्यापारिक लाभ इतना महत्वपूर्ण हो गया है कि पवित्र अक्षय तृतीया जैसे त्यौहार पर जानलेवा प्रतिबंधित मांझा बेचा जाए..? निजी फायदे के लिए किसी की जान की कोई कीमत नहीं हैं । क्या बेचने वालों का कोई पारिवारिक सदस्य या परिजन इस जानलेवा प्रतिबंधित  मांझे का शिकार नहीं होगा ..? जिंदगी से खिलवाड़ का यह कैसा व्यापार .??
        ऐसे सैकड़ो सवाल हैं ..लेकिन जवाब ? कौन देगा यह यक्ष प्रश्न हैं। केवल मात्र प्रशासनिक सख्ती और कानून के सहारे यह सिलसिला थम नहीं सकता।लेकिन यह मतलब कतई नहीं हैं कि आदेश,निर्देश और कानून केवल मीटिंगों व कागजों तक सीमित रहे।इन सबकी धरातल पर क्रियान्विति बेहद जरूरी हैं।क्रियान्विति की गति व स्थिति की मॉनिटरिंग उससे भी ज्यादा जरूरी हैं। जो बेहद कमजोर साबित हो रही हैं।ये हालात प्रशासन की नीयत और कार्यशैली दोनों पर सवाल खड़ा करता हैं। दुर्भाग्यवश इसी की भेंट गया मासूम विराट।
       सामाजिक सहभागिता के बगैर केवल कानून के सहारे पूर्ण समाधान सम्भव नहीं हो सकता।लेकिन सामाजिक जागरूकता के नाम पर केवल पोस्टर विमोचन व छपास ढोंग से ही इतिश्री कर लेना कहां तक न्यायोचित हैं ? सेवा ढोंग से नहीं मानवीय सेवाभाव के  समर्पण से होती हैं। जिसका अभाव निरंतर बढ़ रहा हैं।
      कहने को तो हर थाने में  सीएलजी होती हैं।हर त्यौहार से पहले मीटिंगे भी होती है…लेकिन केवल और केवल कागजी खानापूर्ति।सदस्य चयन की प्रक्रिया में भी “अपने-पराए” का मानक अपनाया जाता हैं।सीएलजी गठन का जो उद्देश्य सार्थक होना चाहिए वो “प्रेसर पॉलिटिक्स” के नीचे दब कर रह जाता हैं। जबकि सीएलजी पुलिस प्रशासन व जनता के बीच समन्वय एवं सामाजिक -कानूनी जागरूकता की मजबूत कड़ी होती हैं। जो सीएलजी गैर राजनीतिक होनी चाहिए वो राजनीति व दलाली का अखाड़ा बन गई हैं।
   मौत का मांझा (प्लास्टिक चाइनीज मांझा)  बेचने वालों से खरीदने वाले भी कम गुनहगार नहीं है।अपने आनंद के लिए किसी की मौत की वजह बनना भी हत्या के अपराध से कम नहीं हैं।बेचने वाले गुनहगार हैं तो खरीदने वाले क्यों नहीं..? डिमांड के नाम सप्लाई का यह मौत का गौरखधंधा आखिर कब तक ? मासूम विराट की मौत के कारणों की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की आवश्यकता हैं।जांच में जो भी अधिकारी(किसी भी स्तर का ) दोषी साबित हो उन सबके खिलाफ हत्या कारित करने का अपराध मानकर कार्यवाही कर सरकार व प्रशासन को एक नजीर पेश करनी चाहिए।ताकि निकट भविष्य ऐसी दुःखद दुर्घटना की पुनरावृत्ति पर मजबूत रोक लग सके।

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