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केंद्रीय मंत्रिमंडल और भाजपा संगठन में बड़े फेरबदल की तैयारी: शिंदे गुट के श्रीकांत बन सकते हैं कैबिनेट मंत्री, नए सहयोगियों को मिलेगी जगह

अबतक इंडिया न्यूज 26 जून ​नई दिल्ली: केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के संगठनात्मक ढांचे में अगले कुछ दिनों में बड़े पैमाने पर फेरबदल देखने को मिल सकता है। सूत्रों के हवाले से खबर है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार (Cabinet Reshuffle) और संगठन में बदलाव को लेकर मैराथन मंथन चल रहा है। इस कवायद के तहत जहां कई नए चेहरों को सरकार में शामिल किया जा सकता है, वहीं कुछ मौजूदा मंत्रियों की भूमिकाओं में बड़ा बदलाव होने की उम्मीद है।

​NDA के कुनबे को मजबूत करने की कवायद, सहयोगियों को तरजीह

​हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों के बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का दायरा बढ़ा है। सूत्रों के मुताबिक, नए सहयोगियों और हाल ही में पाला बदलकर आए नेताओं को सरकार में उचित प्रतिनिधित्व देने की पूरी तैयारी है। इसी कड़ी में महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के कुछ दिग्गज नेताओं के नाम रेस में सबसे आगे चल रहे हैं।

श्रीकांत शिंदे को मिल सकती है कैबिनेट रैंक: सूत्रों का दावा है कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बेटे और शिवसेना (शिंदे गुट) के सांसद श्रीकांत शिंदे को केंद्रीय मंत्रिमंडल में सीधे कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया जा सकता है।
बंगाल से TMC के बागियों पर नजर: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) से दूरी बनाने वाले सांसदों—काकोली घोष, सुदीप बंदोपाध्याय और शताब्दी राय के नामों पर भी गंभीरता से विचार हो रहा है। माना जा रहा है कि इनमें से किसी एक चेहरे को मोदी कैबिनेट में जगह मिल सकती है।
संजय दीना पाटिल भी रेस में: उद्धव ठाकरे गुट से अलग होकर आए सांसद संजय दीना पाटिल का नाम भी संभावित मंत्रियों की सूची में शामिल बताया जा रहा है।

​कुछ मंत्रियों की छुट्टी संभव, संगठन में मिलेगी बड़ी जिम्मेदारी

​इस फेरबदल में केवल नए चेहरों की एंट्री ही नहीं होगी, बल्कि कुछ मौजूदा मंत्रियों की विदाई भी तय मानी जा रही है।

सूत्रों के अनुसार: उत्तर प्रदेश और दिल्ली बीजेपी में मजबूत पकड़ रखने वाले पंकज चौधरी और हर्ष मल्होत्रा को केंद्रीय मंत्रिपरिषद से मुक्त किया जा सकता है। पार्टी इन्हें आगामी चुनावों और सांगठनिक मजबूती के लिए संगठन में कोई बड़ी और सक्रिय जिम्मेदारी सौंप सकती है।

​इस रणनीति के पीछे भाजपा का मकसद सरकार में युवा और ऊर्जावान नेताओं को आगे लाना है, ताकि नेतृत्व की एक नई पीढ़ी तैयार की जा सके।

बीजेपी संगठन में भी होगा ‘मेगा चेंज’, महिलाओं को मिलेगा बड़ा प्रतिनिधित्व

​मंत्रिमंडल विस्तार के साथ-साथ बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन को भी नया रूप देने की तैयारी है।
दो नई महिला उपाध्यक्ष: महिलाओं को राजनीति में आगे बढ़ाने की नीति के तहत पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर कम से कम दो महिला उपाध्यक्षों की नियुक्ति कर सकती है।
क्षेत्रीय संतुलन पर जोर: इसके अतिरिक्त, त्रिपुरा और हिमाचल प्रदेश के कुछ वरिष्ठ व अनुभवी नेताओं को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जैसे अहम पदों से नवाजा जा सकता है, ताकि इन राज्यों में पार्टी के आधार को और मजबूत किया जा सके।

आगे क्या?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फेरबदल आगामी विधानसभा चुनावों और भविष्य की राजनीतिक बिसात को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। सहयोगियों को साधने और संगठन को धार देने की यह दोहरी रणनीति बीजेपी को आने वाले समय में और मजबूती दे सकती है। अब देखना यह है कि इस संभावित लिस्ट पर अंतिम मुहर कब लगती है।

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