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हार के बाद ममता बनर्जी के बदले तेवर, बोली -“मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देंगी”,अब क्या होगा, गवर्नर क्या करेंगे

अबतक इंडिया न्यूज 5 मई कोलकाता । टीएमसी प्रमुख और पश्चिम बंगाल की निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को विधानसभा चुनाव में अपनी पार्टी की हार के बाद पद छोड़ने से इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि वह लोकभवन जाकर मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देंगी। उन्होंने आरोप लगाया कि यह परिणाम जनता के जनादेश का नहीं बल्कि एक “षड्यंत्र” का नतीजा है।


उन्होंने दावा करते हुए कहा कि चुनाव निष्पक्ष रूप से नहीं कराए गए, उन्होंने भाजपा पर अनुचित हस्तक्षेप करने और केंद्रीय बलों का इस्तेमाल करके चुनावों पर ‘जबरदस्ती’ कब्जा करने का आरोप लगाया, साथ ही उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी पार्टी परिणामों को चुनौती देगी और अपनी राजनीतिक लड़ाई जारी रखेगी।

ममता बनर्जी या किसी भी मुख्यमंत्री के लिए चुनाव हारने के बाद भी इस्तीफा न देना एक गंभीर संवैधानिक संकट पैदा कर सकता है. भारतीय संविधान के अनुसार ऐसी स्थिति में कुछ कदम उठाए जा सकते हैं. गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा का कार्यकाल 7 मई 2026 को समाप्त हो रहा है. संविधान कहता है कि टर्म समाप्ति पर मुख्यमंत्री का पद समाप्त नहीं होता. भारत के संविधान में मुख्यमंत्री के कार्यकाल और इस्तीफे को लेकर स्पष्ट नियम हैं.
अनुच्छेद 164 के तहत मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं. बाकी मंत्रियों की नियुक्ति राज्यपाल, मुख्यमंत्री की सलाह पर करते हैं. यह अनुच्छेद स्पष्ट करता है कि मुख्यमंत्री और उनके मंत्री राज्यपाल के चाहने तक ही अपने पद पर बने रहते हैं.
ममता बनर्जी ने मंगलवार को कहा कि वह पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देंगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि वह चुनाव परिणाम को वैध हार के रूप में स्वीकार नहीं करतीं और इस झटके के बावजूद अपना राजनीतिक संघर्ष जारी रखेंगी। उन्होंने इस दौरान इंडी गठबंधन को फिर से एकजुट करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अब मेरे पास कुर्सी नहीं है अब मैं स्वतंत्र होकर काम करूंगी।

हमारी पार्टी जोरदार वापसी करेगी: ममता बनर्जी

ममता बनर्जी ने कहा कि विधानसभा चुनाव में हार के बाद उनकी पार्टी जोरदार वापसी करेगी। विधानसभा चुनाव में हार के बाद ममता बनर्जी ने कहा कि हमने शेरों की तरह लड़ाई लड़ी और वापसी करेंगे, लेकिन इस सरकार का सीधा हस्तक्षेप बेहद चिंताजनक है। ममता ने आगे कहा कि उनकी पार्टी की लड़ाई सिर्फ भाजपा से नहीं बल्कि भारतीय चुनाव आयोग से भी है। उन्होंने कहा कि टीएमसी चुनाव आयोग के खिलाफ कार्रवाई करेगी, लेकिन वह अभी इसका खुलासा नहीं करेंगी।

इस्तीफा न देने पर क्या कार्रवाई हो सकती है?

यदि कोई मुख्यमंत्री हार के बावजूद पद छोड़ने से इनकार करता है, तो राज्यपाल के पास ये कार्रवाई कर सकता है
पद से बर्खास्तगी – राज्यपाल मुख्यमंत्री को बर्खास्त कर सकते हैं. चूंकि मुख्यमंत्री राज्यपाल के ‘प्रसादपर्यंत’ पद पर होते हैं, इसलिए बहुमत खोने या चुनाव हारने के बाद इस्तीफा न देना ‘संवैधानिक मशीनरी’ की विफलता माना जाता है और राज्यपाल उन्हें पद से हटा सकते हैं.
विश्वास मत –राज्यपाल मुख्यमंत्री को सदन में बहुमत साबित करने के लिए कह सकते हैं. यदि वे हार चुकी हैं, तो वे बहुमत साबित नहीं कर पाएंगी और सदन में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए उन्हें हटाया जा सकेगा.
ये तो बिल्कुल साफ है कि अगर तृणमूल के पास बहुमत नहीं है, तो सरकार जारी नहीं रह सकती. ममता बस नई विधानसभा के गठन तक केयरटेकर मुख्यमंत्री के रूप में बनी रह सकती हैं. जैसे ही नतीजों की आधिकारिक अधिसूचना होती है, राज्यपाल बहुमत दल को सरकार बनाने का न्योता दे सकते हैं. उस स्थिति में उन्हें पद छोड़ना होगा.

अगर इस्तीफा नहीं देंगी तो भी नई सरकार बनेगी

ममता का इस्तीफा नहीं देने का कदम आमतौर पर प्रतीकात्मक ही रहेगा, क्योंकि उनकी पार्टी चुनावों में हार चुकी है. विधानसभा का टर्म खत्म हो चुका है. राज्यपाल बीजेपी को सबसे बड़ी पार्टी और बहुमत हासिल करने के बाद सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करेंगे. लिहाजा उनके इस्तीफा नहीं देने से सत्ता हस्तांतरण नहीं रुक सकता.

सीएम का कार्यकाल भी तय

अनुच्छेद 172 कहता है कि राज्य विधानसभा का कार्यकाल अधिकतम 5 वर्ष होता है, इसी के आधार पर मुख्यमंत्री का कार्यकाल भी निर्धारित होता है. अनुच्छेद 164 कहता है कि मुख्यमंत्री “राज्यपाल के प्रसादपर्यंत” यानि उनके चाहने तक पद पर बने रहते हैं, लेकिन ये संविधान के अनुसार होता है यानी बहुमत खोने पर पद पर बने रहने का अधिकार खुद ही खत्म हो जाता है.

संवैधानिक रूप से, बहुमत नहीं होने पर सरकार नहीं चल सकती. ऐसे में ममता इस्तीफा दें या नहीं दें उससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा. सत्ता परिवर्तन संवैधानिक तौर पर तय प्रक्रिया के अनुसार ही होगा.

तो सुरक्षा बलों की मदद ली जाएगी

यदि बर्खास्तगी के बाद भी कोई मुख्यमंत्री कार्यालय खाली नहीं करता, तो कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा बलों की मदद ली जा सकती है. आफिस खाली कराया जा सकता है.

क्या पहले भी ऐसा हुआ है?

नहीं. भारतीय राजनीति में कभी ऐसा नहीं हुआ है. भारतीय राजनीति में विधानसभा चुनावों में हारने के बाद सीधे तौर पर इस्तीफा देने से मना करने के मामले नहीं हैं. ये लोकतंत्र की परंपराओं के खिलाफ है.

 

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