अबतक इंडिया न्यूज 10 मई । निर्जला एकादशी को सभी एकादशियों में सबसे श्रेष्ठ और पवित्र माना जाता है। ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली इस एकादशी के दिन पानी पीना वर्जित होता है, इसलिए इसे निर्जला एकादशी कहा जाता है। इस व्रत को अन्य एकादशियों में सबसे कठिन माना जाता है। साल भर पड़ने वाली 24 एकादशियों के बराबर पुण्य इस अकेले व्रत को करने से प्राप्त होता है। इसे भीमसेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन शुद्ध मन और पूरे विधिवत भगवान विष्णु की पूजा और निर्जला व्रत रखने से सुख-समृद्धि प्राप्त और मोक्ष की प्राप्त होती है। आइए जानते हैं इस बार निर्जला एकादशी का व्रत कब रखा जाएगा और पारण का समय क्या रहेगा।
निर्जला एकादशी कब है?
हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली इस एकादशी को निर्जला एकादशी का व्रत रखा जाता है। इस बार एकादशी तिथि का आरंभ 24 जून, बुधवार को शाम 6 बजकर 13 मिनट पर होगा और इसका समापन अगले दिन 25 जून, गुरुवार को शाम 8 बजकर 10 मिनट पर हो जाएगा। ऐसे में उदयातिथि के अनुसार, 25 जून 2026 को निर्जला एकादशी का व्रत रखा जाएगा।
निर्जला एकादशी 2026 व्रत पारण समय
एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि पर करना उत्तम माना जाता है। ऐसे में निर्जला एकादशी व्रत का पारण 26 जून, शुक्रवार को किया जाएगा। व्रत पारण का शुभ मुहूर्त सुबह 5 बजकर 41 मिनट से लेकर सुबह 8 बजकर 25 मिनट तक रहेगा।
निर्जला एकादशी को क्यों कहते हैं भीमसेनी एकादशी?
मान्यता है कि पांचों पांडवों में से भीमसेन को सबसे अधिक भूख लगती थी। उनके लिए भूखा रहना संभव नहीं था। ऐसे में वह चाह कर भी व्रत नहीं रख पाते थे। ऐसे में उन्होंने महर्षि वेद व्यास को अपनी पीड़ा बताई। महर्षि ने तब भीमसेन को ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली निर्जला एकादशी का व्रत करने की सलाह दी क्योंकि इससे 24 एकादशियों के व्रत का पुण्य मिलता है। इसी कारण इसे भीमसेनी एकादशी कहा जाता है।










