अबतक इंडिया न्यूज 27 अक्टूबर देशनोक । राजस्थान ग्रामीण बैंक की देशनोक शाखा के लिए परिसर किराये पर लेने की निविदा प्रक्रिया को लेकर गंभीर आशंकाएं जताई गई हैं। इस संबंध में देशनोक निवासी गोपाल मोहता ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB), बीकानेर के महानिरीक्षक/पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत देकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
शिकायत में देशनोक के आर.सी.सी. रोड स्थित जगदीश दान पुत्र लूणदान के भवन को राजस्थान ग्रामीण बैंक की शाखा के लिए किराये पर लेने की प्रक्रिया में संभावित अनियमितताओं की आशंका जताई गई है। शिकायतकर्ता ने निविदा प्रक्रिया की निष्पक्षता, भवन की वैधानिक स्थिति, निर्माण स्वीकृतियों, भू-उपयोग परिवर्तन, पार्किंग व्यवस्था तथा संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच कराने का आग्रह किया है।

2150 वर्गफीट परिसर के लिए जारी हुई थी निविदा
शिकायत के अनुसार, राजस्थान ग्रामीण बैंक ने देशनोक शाखा के लिए लगभग 2150 वर्गफीट क्षेत्रफल वाले कारपेट एरिया के परिसर हेतु निविदा आमंत्रित की थी। विज्ञापन में पर्याप्त पार्किंग सुविधा और अधिमानतः भूतल पर स्थित अथवा नवनिर्मित भवन को प्राथमिकता देने का उल्लेख था।
शिकायत में बताया गया है कि निविदा के अंतर्गत तकनीकी एवं वित्तीय दो बोली प्रणाली के तहत प्रस्ताव आमंत्रित किए गए थे। आवेदन प्राप्त करने की अंतिम तिथि 21 अप्रैल 2026 को दोपहर 3 बजे निर्धारित थी। शिकायतकर्ता ने पूर्व में जारी निविदा को तकनीकी कारणों से निरस्त किए जाने का उल्लेख करते हुए पूरी प्रक्रिया की जांच की मांग की है।
भवन निर्माण स्वीकृति और भू-उपयोग पर सवाल
शिकायत में नगर पालिका मंडल देशनोक की ओर से जारी नोटिस का हवाला देते हुए कहा गया है कि संबंधित परिसर के निर्माण और उपयोग को लेकर आवश्यक दस्तावेजों एवं स्वीकृतियों की जांच की जानी चाहिए।
शिकायतकर्ता के अनुसार, नोटिस में आवासीय भूखंड पर आवश्यक निर्माण स्वीकृति तथा भू-उपयोग परिवर्तन की अनुमति के बिना भवन निर्माण एवं उपयोग से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए कहा गया था। इसमें भूखंड के पट्टा/स्वामित्व दस्तावेज, स्वीकृत भवन मानचित्र, निर्माण अनुमति तथा भू-उपयोग परिवर्तन सहित अन्य स्वीकृतियों का उल्लेख है।
इस आधार पर शिकायतकर्ता ने संबंधित सक्षम अधिकारियों से यह सत्यापित कराने की मांग की है कि भवन का निर्माण और प्रस्तावित बैंकिंग उपयोग नियमानुसार है या नहीं।
सेटबैक, सीढ़ियों और रैंप की भी जांच की मांग
शिकायत में भवन निर्माण उपविधियों के पालन को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता ने आशंका जताई है कि भवन के रैंप और सीढ़ियों के निर्माण से निर्धारित भवन सीमा, सेटबैक अथवा सार्वजनिक आवागमन के स्थान पर अतिक्रमण की स्थिति बन सकती है।
उन्होंने मौके का निरीक्षण कर स्वीकृत भवन मानचित्र और वास्तविक निर्माण का मिलान कराने तथा यह सुनिश्चित करने की मांग की है कि सार्वजनिक रास्ते, फुटपाथ या अन्य निर्धारित खुले स्थान पर कोई अनधिकृत कब्जा तो नहीं है।
पार्किंग और व्यावसायिक उपयोग की अनुमति का मुद्दा
शिकायत में कहा गया है कि बैंक की निविदा में पर्याप्त पार्किंग सुविधा की आवश्यकता स्पष्ट रूप से बताई गई थी। ऐसे में प्रस्तावित परिसर में वास्तविक पार्किंग उपलब्धता, उसकी वैधानिक स्थिति और निविदा की शर्तों के अनुपालन की जांच आवश्यक है।
इसके अलावा, शिकायतकर्ता ने यह भी जांचने का आग्रह किया है कि संबंधित भवन में बैंक जैसी व्यावसायिक गतिविधि संचालित करने के लिए आवश्यक अनुमति अथवा भू-उपयोग परिवर्तन स्वीकृति उपलब्ध है या नहीं।
शिकायत में आशंका जताई गई है कि यदि जरूरी स्वीकृतियां उपलब्ध नहीं हैं, तो यह भी जांचा जाए कि संबंधित परिसर को निविदा की पात्रता शर्तों के अंतर्गत तकनीकी रूप से योग्य माना जा सकता था या नहीं।
ACB से किन बिंदुओं पर जांच की मांग?
गोपाल मोहता ने अपनी शिकायत में मुख्य रूप से निम्न बिंदुओं पर निष्पक्ष जांच कराने का आग्रह किया है—
1.राजस्थान ग्रामीण बैंक की देशनोक शाखा के लिए जारी मूल एवं पुनः जारी निविदाओं तथा पूर्व निविदा निरस्तीकरण के कारणों की जांच।
2.निविदा की तकनीकी एवं वित्तीय मूल्यांकन प्रक्रिया और पात्रता शर्तों के अनुपालन की जांच।
3.प्रस्तावित भवन के स्वामित्व, पट्टे, निर्माण स्वीकृति और स्वीकृत भवन मानचित्र का सत्यापन।
4.भवन के व्यावसायिक उपयोग एवं भू-उपयोग परिवर्तन से संबंधित अनुमतियों की जांच।
5.रैंप, सीढ़ियों, सेटबैक, पार्किंग और संभावित अतिक्रमण की स्थिति का स्थलीय निरीक्षण।
6.संबंधित बैंक अधिकारियों एवं अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच।
7.निविदा प्रक्रिया में किसी व्यक्ति को अनुचित लाभ पहुंचाए जाने की आशंका की दस्तावेजों के आधार पर जांच।
दस्तावेजों के आधार पर निष्पक्ष जांच की मांग
शिकायतकर्ता ने स्पष्ट किया है कि वह किसी निष्कर्ष को पहले से तय नहीं मानते। उनके अनुसार, निविदा अभिलेखों, निरीक्षण रिपोर्टों, भवन संबंधी स्वीकृतियों, मूल्यांकन दस्तावेजों और संबंधित अधिकारियों के बयानों की निष्पक्ष जांच से ही वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
*शिकायत में लगाए गए आरोप और आशंकाएं जांच का विषय हैं
अब देखना होगा कि शिकायत के आधार पर संबंधित एजेंसियां क्या कदम उठाती हैं और जांच में भवन की वैधानिक स्थिति तथा निविदा प्रक्रिया को लेकर में क्या तथ्य सामने आते हैं।













