अबतक इंडिया न्यूज 3 अगस्त बीकानेर। श्रावण मास के प्रथम सोमवार को महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के नवप्रवेशित विद्यार्थियों द्वारा विभाग परिसर स्थित उद्यान में पौधारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
प्राचीन काल से रहे हैं मनुष्य और प्रकृति के बीच गहरे संबंध : कुलगुरु प्रो. मनोज दीक्षित
कार्यक्रम में कुलगुरु प्रो. मनोज दीक्षित ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि प्राचीन भारतीय समाज ने सदैव प्रकृति और मनुष्य के मध्य गहरे संबंध को स्वीकार किया है। हमारे ग्रंथों में वृक्षों को केवल उपयोगिता की वस्तु नहीं, बल्कि जीवन दाता, देवतुल्य और लोक कल्याणकारी माना गया है। पुराणों में पीपल, वट, अशोक, बेल, आंवला और नीम जैसे वृक्षों के रोपण को विशेष पुण्यदायी बताया गया है।

मौर्यकालीन शिलालेख वृक्षों के महत्व के जीवंत दस्तावेज : डॉ. मेघना शर्मा
विभागाध्यक्ष डॉ. मेघना शर्मा ने इतिहास के संदर्भों का उल्लेख करते हुए बताया कि मौर्यकालीन शिलालेखों और स्तंभ लेखों में सड़कों के किनारे छायादार वृक्ष लगाने, राहगीरों के लिए कुएं खुदवाने तथा औषधीय पौधों के रोपण के स्पष्ट प्रमाण मिलते हैं। कौटिल्य के अर्थशास्त्र में भी वनों की रक्षा और अवैध कटाई पर दंड के प्रावधान दर्ज हैं। उन्होंने कहा कि पीपल को विष्णु, वट को ब्रह्मा तथा तुलसी को लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है। डॉ. शर्मा ने स्पष्ट किया कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य नवप्रवेशित विद्यार्थियों को संस्थान से भावनात्मक रूप से जोड़ना है।
कार्यक्रम में इनकी रही उपस्थिति
इस अवसर पर विभाग के अतिथि शिक्षक डॉ. मुकेश हर्ष, डॉ. गोपाल व्यास, रिंकू जोशी, भगवान दास सुथार, डॉ. संजना चौधरी और सुशीला बिश्नोई उपस्थित रहे। कार्यक्रम के सफल आयोजन में बजरंग कलवानी व उमेश पुरोहित का विशेष सहयोग रहा। वहीं विद्यार्थी वर्ग से कार्तिक शर्मा, सोहनलाल कुम्हार, ट्विंकल बीका, भीखाराम सुथार, गरिमा व्यास, अजीत सियाग, मूमल कँवर, अरविन्द सिंह भाटी, नेहा सलमान और तुषार गहलोत आदि ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर विभाग का प्रतिनिधित्व किया।











