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विधायक निधि कमीशनखोरी मामला : एथिक्स कमेटी के सामने पेश होंगे आरोपी विधायक, जानिए क्या हो सकती है कार्रवाई

अबतक इंडिया न्यूज 18 दिसंबर जयपुर । राजस्थान की राजनीति में भ्रष्टाचार का नया तूफान थमने का नाम नहीं ले रहा है. विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास निधि (एमएलए लैड फंड) के दुरुपयोग और कमीशनखोरी के गंभीर आरोपों ने सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को हिला दिया है. तीन विधायकों पर विकास कार्यों की अनुशंसा के बदले कमीशन मांगने का आरोप लगा है. इनमें भाजपा, कांग्रेस और निर्दलीय विधायक शामिल हैं.

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जीरो टॉलरेंस की नीति दिखाते हुए तीनों विधायकों के एमएलए लैड खाते फ्रीज कर दिए और उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की. विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने मामला सदाचार समिति को सौंप दिया है. कल, यानी 19 दिसंबर को तीनों विधायकों को समिति के सामने व्यक्तिगत रूप से पेश होना है, अब सभी की निगाहें इस पर टिकी हैं कि जांच में क्या निकलता है और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है.

मुख्यमंत्री का सख्त रुख

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने मामले को गंभीर बताते हुए तुरंत एक्शन लिया. उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस है और कोई बख्शा नहीं जाएगा. सरकार ने तीनों विधानसभा क्षेत्रों के एमएलए लैड खाते फ्रीज कर दिए. मुख्य सतर्कता आयुक्त (गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव) भास्कर सावंत की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समिति बनाई गई, जिसमें मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक समेत अन्य अधिकारी शामिल हैं. इस समिति को 15 दिनों में रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं. सीएम का कहना है कि विधायक निधि जनता के विकास के लिए है, कमीशनखोरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

सदाचार समिति की भूमिका

 विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने मामले की गंभीरता समझते हुए इसे सदाचार समिति को सौंप दिया. समिति के अध्यक्ष कैलाश वर्मा हैं और इसमें 12 सदस्य हैं. समिति ने तीनों विधायकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. 19 दिसंबर को तीनों को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के निर्देश हैं. समिति तथ्यात्मक जांच कर रिपोर्ट अध्यक्ष को सौंपेगी. अध्यक्ष ने कहा कि जनप्रतिनिधियों से जुड़े ऐसे आरोप लोकतंत्र और सदन की गरिमा पर सवाल उठाते हैं, इसलिए निष्पक्ष जांच जरूरी है, अगर आरोप साबित होते हैं तो फटकार, निलंबन या सदस्यता समाप्ति जैसी कार्रवाई हो सकती है.

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