अबतक इंडिया न्यूज 9 अक्टूबर नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय कानून, मानव अधिकारों के संरक्षण और विश्व शांति के क्षेत्र में दशकों तक अभूतपूर्व योगदान देने वाली भारतीय मूल की प्रमुख मानवाधिकार न्यायविद नावी पिल्लई (Navi Pillay) को वर्ष 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार प्रदान किए जाने का ऐलान किया गया है। इस वर्ष पुरस्कार की दौड़ में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम भी चर्चा में था, लेकिन नोबेल समिति ने न्याय और मानवाधिकारों की रक्षा के प्रति पिल्लई के आजीवन समर्पण को प्राथमिकता देते हुए यह सर्वोच्च सम्मान उन्हें देने का फैसला किया।
Newly awarded peace laureate Navi Pillay has held states and national leaders accountable and brought hope to victims of violence and conflict.
Navi Pillay is one of the great defenders of international legal principles in our time. Her distinguished career reminds us of the need to support, fortify and expand the global rule of law. Navi Pillay’s commitment to justice and human dignity is a source of hope and inspiration to all who seek to bring about a more peaceful world.
Read more about the 2026 #NobelPeacePrize: https://t.co/JMjpp1jPKc
#NobelPrize
— The Nobel Prize (@NobelPrize) October 9, 2026
खबर के मुख्य बिंदु:
- मानवाधिकार और न्याय के लिए जीवन भर संघर्ष: नावी पिल्लई संयुक्त राष्ट्र (UN) की मानवाधिकार उच्चायुक्त (High Commissioner for Human Rights) के रूप में कार्य कर चुकी हैं। उन्होंने रंगभेद के खिलाफ लड़ाई से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर युद्ध अपराधों के खिलाफ आवाज उठाने तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
- गाजा संघर्ष और इजरायली कार्रवाइयों पर बेबाक रुख: पिल्लई हाल के वर्षों में गाजा में इजरायली सैन्य कार्रवाइयों और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के उल्लंघन पर सवाल उठाने को लेकर लगातार चर्चा में रही हैं। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र जांच आयोग की अध्यक्ष के रूप में मध्य पूर्व संकट पर निष्पक्ष और सख्त रुख अपनाया।
- दक्षिण अफ्रीका में ऐतिहासिक भूमिका: दक्षिण अफ्रीका में जन्मी पिल्लई देश के उच्च न्यायालय की पहली गैर-श्वेत महिला न्यायाधीश थीं। उन्होंने वहां नस्लभेद के खिलाफ लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) व रवांडा अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायाधिकरण में भी अपनी महत्वपूर्ण सेवाएं दी हैं।
- डोनाल्ड ट्रंप दौड़ से बाहर: अंतरराष्ट्रीय मीडिया में डोनाल्ड ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार मिलने की अटकलें लगाई जा रही थीं, लेकिन नोबेल समिति ने मानवाधिकारों और अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रति दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को मान्यता देते हुए पिल्लई के नाम पर मुहर लगाई।

क्यों मिला यह सर्वोच्च सम्मान?
नोबेल समिति के अनुसार, यह पुरस्कार अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून, युद्ध अपराधों की जवाबदेही तय करने और कमजोर वर्गों के अधिकारों की रक्षा में उनके ऐतिहासिक योगदान के सम्मान स्वरूप दिया गया है।
नावी पिल्लई का यह सम्मान वैश्विक स्तर पर मानवाधिकारों और न्याय की निष्पक्ष लड़ाई की एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है।








