अबतक इंडिया न्यूज 9 अक्टूबर नई दिल्ली। वैश्विक मौसम चक्र में बदलाव, पश्चिम एशिया व रूस-यूक्रेन संघर्ष के कारण गहराते भू-राजनीतिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के चलते आने वाले दिनों में खाद्य तेल (Edible Oil) की आपूर्ति और कीमतों पर गहरा संकट मंडरा रहा है। अल नीनो के कारण दक्षिण-पूर्व एशिया से लेकर भारत तक तिलहन उत्पादन प्रभावित होने की आशंका जताई गई है, जिससे भारत को घरेलू मांग पूरी करने के लिए रिकॉर्ड मात्रा में खाद्य तेल का आयात करना पड़ सकता है।

अल नीनो की दोहरी मार: इंडोनेशिया से लेकर भारत तक उत्पादन में गिरावट का अनुमान
मौसम वैज्ञानिकों और कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, अल नीनो का असर दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों पर चरम पर पहुंच रहा है, जो अगले साल मार्च-अप्रैल तक जारी रह सकता है। पाम के पेड़ों पर इसका वास्तविक प्रभाव सूखे और कम बारिश के कारण 8 से 12 महीने बाद दिखाई देता है।
- इंडोनेशिया में उत्पादन गिरावट: दुनिया के सबसे बड़े पाम तेल उत्पादक देश इंडोनेशिया में उत्पादन 2026 के 5.85 करोड़ टन से घटकर 2027 में 5.66 करोड़ टन रहने का अनुमान है।
- भारत में तिलहन पैदावार पर असर: कम बारिश की आशंका के चलते भारत का खाद्य तेल उत्पादन 2025-26 के 97 लाख टन से गिरकर 2026-27 में 92 लाख टन रह सकता है।
भारत पर सीधा असर: 1.72 करोड़ टन के रिकॉर्ड आयात की मजबूरी
घरेलू स्तर पर उत्पादन घटने का सीधा मतलब है कि भारत को विदेशी बाजारों पर अपनी निर्भरता बढ़ानी होगी।
| समयावधि | घरेलू खाद्य तेल उत्पादन | कुल खाद्य तेल आयात |
|---|---|---|
| 2025-26 | 97 लाख टन | 1.68 करोड़ टन |
| 2026-27 (अनुमानित) | 92 लाख टन | 1.72 करोड़ टन (रिकॉर्ड स्तर) |
अनुमानित आयात का तेल-वार विवरण (2026-27):
- पाम ऑयल: ~82 लाख टन
- सोयाबीन ऑयल: ~50 लाख टन
- सूरजमुखी तेल: ~35 लाख टन
रूस-यूक्रेन युद्ध और लॉजिस्टिक्स की चुनौती
रूस और यूक्रेन में इस बार सूरजमुखी की अच्छी फसल होने के बावजूद वैश्विक बाजार तक इसकी निर्बाध आपूर्ति में भारी बाधाएं आ रही हैं।
- इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले: बंदरगाहों, भंडारण केंद्रों और परिवहन मार्गों पर हमलों के कारण निर्यात बाधित हुआ है।
- महंगे वैकल्पिक मार्ग: रेल और वैकल्पिक समुद्री रास्ते महंगे हैं तथा उन पर क्षमता से अधिक दबाव है।
- सूचकांक में उछाल: संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के अनुसार:
- सितंबर 2026 में वनस्पति तेल मूल्य सूचकांक: 198.6 अंक (सितंबर 2025 की तुलना में 18.3% अधिक)।
- कुल खाद्य मूल्य सूचकांक: 136 अंक (नवंबर 2022 के बाद का सर्वोच्च स्तर)।
कच्चे तेल से बायो-फ्यूल का दबाव
वरिष्ठ पत्रकार हरीश दामोदरन की रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतें खाद्य तेल बाजार को सीधे प्रभावित करती हैं। पेट्रोलियम आयात करने वाले देश (जैसे इंडोनेशिया) अपनी विदेशी मुद्रा बचाने के लिए खाद्य तेलों का इस्तेमाल ‘बायो-फ्यूल’ (Bio-fuel) बनाने में बढ़ा देते हैं।
- वैश्विक उत्पादन का बायो-फ्यूल में इस्तेमाल:
- सोयाबीन तेल: ~25%
- पाम ऑयल: ~28%
- रेपसीड तेल: ~29%
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और रूस से ऊर्जा आपूर्ति पर कड़े प्रतिबंधों के कारण यदि कच्चा तेल महंगा बना रहता है, तो खाद्य तेलों की डायवर्जन दर (ईंधन बनाने में उपयोग) बढ़ेगी, जिससे खाने के तेल की बाजार में किल्लत होगी और कीमतें और ऊपर जा सकती हैं।








