अबतक इंडिया न्यूज देशनोक 14 जुलाई । देशनोक नगरपालिका क्षेत्र में चल रहे इंदिरा गांधी शहरी रोजगार गारंटी योजना (शहरी मनरेगा) के तहत कार्यरत मजदूरों के सब्र का बांध आखिरकार मंगलवार को टूट गया। एक साल से अधिक समय से बकाया मजदूरी का भुगतान नहीं होने से नाराज श्रमिकों ने पालिका कार्यालय के बाहर जमकर प्रदर्शन किया और अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की।
“चूल्हा जलना मुश्किल हुआ” – महिला श्रमिकों ने बयां किया दर्द
प्रदर्शन कर रहीं महिला मजदूरों ने अपनी बदहाली का जिक्र करते हुए पालिका अधिशाषी अधिकारी (EO) से गुहार लगाई। श्रमिकों ने कहा:
“पिछले एक साल से ज्यादा समय से हमें हमारी मेहनत की कमाई नहीं मिली है। लंबे समय से भुगतान अटकने के कारण हमारे सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। घर चलाना मुश्किल हो रहा है और हमारी माली हालत दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है।”
उच्च स्तर पर पेंडिंग है भुगतान, फंड आते ही मिलेगी मजदूरी: EO
मजदूरों के विरोध और आक्रोश को देखते हुए नगरपालिका के अधिशाषी अधिकारी (EO) रविन्द्र सिंह ने मामले पर अपना पक्ष रखते हुए कहा:
- “बकाया भुगतान को लेकर राज्य सरकार को डिमांड (मांग पत्र) भेजी जा चुकी है।
- वर्तमान में भुगतान की प्रक्रिया उच्च स्तर (सरकार) पर लंबित (पेंडिंग) है।
- जैसे ही सरकार द्वारा मनरेगा मद में बजट/फंड जारी किया जाएगा, तुरंत सभी मजदूरों का बकाया भुगतान उनके खातों में ट्रांसफर कर दिया जायेगा।”
शहरी क्षेत्र के गरीब परिवारों को संबल देने के लिए शुरू की गई इस योजना में सालभर की देरी सीधे तौर पर प्रशासनिक ढिलाई को उजागर करती है। अब देखना यह है कि प्रदर्शन के बाद सोई हुई सरकार जागती है या मजदूरों का यह इंतजार और लंबा होता है।












