UGC ROLL BACK: अबतक इंडिया न्यूज 3 अगस्त जयपुर । यूजीसी के प्रस्तावित नियमों को वापस लेने की मांग को लेकर जयपुर में राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना की ओर से निकाली जा रही ‘सवर्ण न्याय पैदल यात्रा’ सोमवार को जयपुर पहुंच गई. यात्रा में भर-भरकर युवाओं की पूरी फौज है. सभी दिशाओं में लहरते झंडे और यूथ का भरपूर जोश देखकर प्रशासन के भी हलक सूख गए. यात्रा को प्रस्तावित कार्यक्रम के मुताबिक जिला कलेक्ट्रेट तक जाने की अनुमति नहीं मिली. कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए प्रशासन ने यात्रा को शहर के अंदर प्रवेश की मंजूरी नहीं दी. इस बात पर राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल मकराना ने घोर नाजाजगी जताई है. इसके बाद कालवाड़ इलाके में यात्रा को रोक दिया गया, जहां बड़ी संख्या में समाज के लोग भी मौजूद रहे.
यह पैदल यात्रा देशनोक से शुरू हुई थी. करणी सेना का कहना है कि यात्रा का उद्देश्य यूजीसी के प्रस्तावित नियमों को वापस लेने की मांग उठाना और युवाओं की आवाज सरकार तक पहुंचाना है. करीब 24 दिन का सफर तय करने के बाद यात्रा जयपुर पहुंची. पहले से तय कार्यक्रम के मुताबिक जिला कलेक्टर के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा जाना था. लेकिन नजारा देखकर प्रशासन हैरान रह गया. जयपुर शहर में यात्रा को आगे बढ़ाने की अनुमति नहीं मिलने के कारण कार्यक्रम में बदलाव करना पड़ा. प्रशासन ने सुरक्षा और कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए यात्रा को शहर के भीतर जाने से रोक दिया.
यात्रा रोके जाने पर प्रशासन पर बरसे महिपाल मकराना
यात्रा रोके जाने के बाद राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल मकराना ने प्रशासन के फैसले पर नाराजगी जताई. उन्होंने कहा कि यह किसी राजनीतिक टकराव की यात्रा नहीं है, बल्कि युवाओं के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है. मकराना ने कहा कि देशनोक से निकाली गई यह पदयात्रा 24 दिन का सफर तय करके जयपुर पहुंची है. उनका कहना था कि वे शांतिपूर्ण तरीके से जिला कलेक्ट्रेट तक जाना चाहते हैं और वहां जिला कलेक्टर के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपना चाहते हैं. लेकिन प्रशासन यात्रा को आगे बढ़ाने की अनुमति नहीं दे रहा. उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन को ऐसे हालात नहीं बनाने चाहिए जिससे टकराव की स्थिति पैदा हो. उनके मुताबिक यह यात्रा युवाओं के भविष्य की आवाज है और इसे शांतिपूर्ण तरीके से पूरा होने दिया जाना चाहिए.
सोशल मीडिया पर छाया है मामला
प्रशासन की रोक के बाद यह मामला सोशल मीडिया पर तूल पकड़ता नजर आया. लोग फेसबुक, इस्टाग्राम और एक्स (पूर्व ट्विटर) पर घटनास्थल की वीडियो साझा कर रहे हैं. वीडियो में दिख रही भीड़ से अंदाजा लगाया जा सकतै है कि लोगों में कितना रोष है. भीड़ में युवाओं की पूरी फौज है जो केसरिया झंडा लेकर यूजीसी कानून को काला कानून बताते हुए युवाओं और छात्रों के हक की मांग कर रहे हैं.
प्रशासन की रोक के बाद यह मामला सोशल मीडिया पर तूल पकड़ता नजर आया. लोग फेसबुक, इस्टाग्राम और एक्स (पूर्व ट्विटर) पर घटनास्थल की वीडियो साझा कर रहे हैं. वीडियो में दिख रही भीड़ से अंदाजा लगाया जा सकतै है कि लोगों में कितना रोष है. भीड़ में युवाओं की पूरी फौज है जो केसरिया झंडा लेकर यूजीसी कानून को काला कानून बताते हुए युवाओं और छात्रों के हक की मांग कर रहे हैं.

युवाओं के भविष्य का मुद्दा बताया
महिपाल मकराना ने कहा कि उनकी मांग केवल इतनी है कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से विचार किया जाए. उन्होंने कहा कि स्कूली शिक्षा के समय से ही युवाओं को ऐसी परिस्थितियों में नहीं धकेला जाना चाहिए, जिससे उनका भविष्य प्रभावित हो. इसी उद्देश्य से यह पदयात्रा निकाली गई है. उनके संबोधन के दौरान कालवाड़ में मौजूद सवर्ण समाज के लोगों ने भी यात्रा के समर्थन में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई. यात्रा को लेकर पूरे समय पुलिस और प्रशासन भी मौके पर तैनात रहा.
प्रशासन ने कानून व्यवस्था का दिया हवाला
प्रशासन की ओर से यात्रा को शहर में प्रवेश की अनुमति नहीं देने के पीछे कानून व्यवस्था को कारण बताया गया. सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए पुलिस बल भी तैनात किया गया था. फिलहाल यात्रा को लेकर आगे क्या निर्णय होगा और ज्ञापन किस तरह सौंपा जाएगा, इस पर सभी की नजर बनी हुई है. करणी सेना का कहना है कि उनकी मांग शांतिपूर्ण तरीके से रखी जा रही है और वे चाहते हैं कि युवाओं से जुड़े इस मुद्दे पर सरकार और संबंधित संस्थाएं गंभीरता से विचार करें.

UGC के नए नियमों का विरोध क्यों हो रहा है?
भेदभाव की परिभाषा पर सवाल
आलोचकों का कहना है कि नियमों में भेदभाव की परिभाषा एकतरफा दिखाई देती है. इसमें SC/ST, OBC, महिलाएं और दिव्यांग वर्गों को शामिल किया गया है, जबकि सामान्य वर्ग (General Category) के लोगों को पीड़ित के रूप में स्पष्ट रूप से शामिल नहीं किया गया. विरोध करने वालों का मानना है कि इससे उन्हें केवल आरोपी के रूप में देखा जा सकता है.
झूठी शिकायतों पर कार्रवाई का प्रावधान नहीं
विरोध का एक बड़ा कारण यह है कि फर्जी या गलत शिकायत दर्ज करने वालों के खिलाफ किसी दंड, जुर्माने या अनुशासनात्मक कार्रवाई का स्पष्ट प्रावधान नहीं रखा गया है. साथ ही, 24 घंटे के भीतर कार्रवाई शुरू करने की बाध्यता के कारण नियमों के दुरुपयोग की आशंका जताई जा रही है.
इक्विटी कमेटी में सामान्य वर्ग का प्रतिनिधित्व नहीं
आलोचकों के अनुसार, EOC और इक्विटी कमेटी में सामान्य वर्ग के प्रतिनिधि को शामिल करना अनिवार्य नहीं किया गया है. इससे यह आशंका व्यक्त की जा रही है कि समिति के निर्णय पूरी तरह संतुलित न रहकर एकतरफा हो सकते हैं.
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