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राजस्थान परिवहन विभाग में फर्जी बैंक NOC के जरिए बेची गईं लोन वाली लग्जरी कारें

अबतक इंडिया न्यूज 30 जुलाई राजस्थान । राजस्थान परिवहन विभाग में फर्जीवाड़े और घोटाले कोई नई बात नहीं है. 7 डिजिट पंजीयन सीरीज के फर्जीवाड़े में पुलिस मुकदमे दर्ज हो चुके हैं. अब वाहनों के लोन लेकर बैंकों की फर्जी एनओसी से लोन चुकता करने का मामला सामने आया है. इस मामले में अब बैंकों ने परिवहन विभाग से गुहार लगाई है.

राजस्थान परिवहन विभाग में एक नए फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है. बैंकों से लोन लेकर राज्य में नई लग्जरी गाड़ियां खरीदी जा रही हैं. इसके बाद महज 2 से 6 माह के अंदर ही लोन चुकता करने की बैंक की एनओसी परिवहन विभाग के कार्यालय में प्रस्तुत कर दी जाती है. रोचक यह है कि यह एनओसी बैंक द्वारा कभी जारी ही नहीं की गई. इस फर्जी एनओसी के आधार पर आरटीओ यानी परिवहन विभाग के रिकॉर्ड से वाहन से लोन हट जाता है. इसके बाद वाहन को किसी अन्य मालिक को बेच दिया जाता है. बैंक को किस्तें नहीं चुकाई जाती.

ऐसे वाहन को महज 1 से 2 साल की अवधि में 3 से 5 लोगों को बेच दिया जाता है. बैंक को जब किस्तें नहीं मिली, तो उन्होंने अब परिवहन विभाग से गुहार लगाई है. यह केवल एकाध वाहन का मामला नहीं, बल्कि दर्जनों की संख्या में ऐसे वाहनों पर लोन लेकर फर्जीवाड़ा हो रहा है. आईसीआईसीआई बैंक ने इस मामले में वाहन खरीददारों द्वारा उनके लोन नहीं चुकाने को लेकर परिवहन विभाग से जांच कर कार्रवाई करने के लिए गुहार लगाई है. ये गड़बड़ियां परिवहन विभाग के राजसमंद, झालावाड़ और जोधपुर परिवहन कार्यालयों में की जा रही है.

ऐसे समझिए पूरा फर्जीवाड़ा

16 फरवरी 2024 को नई ग्रैंड विटारा कार RJ45CZ7295 खरीदी गई. पहले योगेन्द्र नामक व्यक्ति ने खरीदी कार, फिर 17 मई को विमल को बेची. विमल ने 30 मई 2024 को ICICI बैंक से 9 लाख रुपए का लोन लिया. 7 अप्रैल 2025 को विमल ने कार को सोनू सिंघल को बेच दिया. सोनू सिंघल ने इस कार पर IDFC बैंक से फिर से लोन ले लिया. न पहले का ICICI बैंक का लोन चुकाया गया न ही दूसरा IDFC बैंक का लोन चुकाया गया. विमल ने जो NOC पेश की, वह फर्जी थी, बैंक का मेल भी GMAIL से फर्जी भेजा गया. बैंक अपने अधिकृत डोमेन से मेल भेजती है, RTO कार्मिक ने इसे देखा ही नहीं… कार के राजसमंद, जोधपुर और झालावाड़ DTO में कई बार रिकॉर्ड में बदले गए.

 

दरअसल, नियम यह है कि जब भी कोई कार लोन पर खरीदी जाती है, तो परिवहन विभाग के रिकॉर्ड में उसका हाईपोथिकेशन रहता है. यह हाईपोथिकेशन यानी लोन हटाने का कार्य बैंक द्वारा एनओसी दिए जाने के बाद ही किया जाता है. इन मामलों में बैंक से कोई एनओसी जारी नहीं की गई, लेकिन वाहन खरीददारों ने आरटीओ कार्यालयों में फर्जी एनओसी पेश कर लोन को हटवा लिया.  परिवहन विभाग के पोर्टल पर बैंक की जो मेल अपलोड की गई है, वह जीमेल खाते से परिवहन विभाग को भेजी गई है, जबकि बैंकों द्वारा मेल हमेशा उनके आधिकारिक मेल डोमेन आईडी से भेजी जाती है.

 

फर्जीवाड़े का एक और उदाहरण

 

कार RJ60CC0335 हुंडई वेन्यू जयपुर के सुगन चंद इंदौरिया ने खरीदी. 17 अक्टूबर 2024 को कार पर ICICI बैंक से 10.50 लाख का लोन लिया गया. मात्र 2 महीने में फर्जी एनओसी पेश कर लोन कागजों में हटवा दिया गया. 27 दिसंबर 2024 को कार सोनू सिंघल नामक व्यक्ति को बेच दी गई. यह सब फर्जीवाड़ा कार्रवाई भी राजसमंद डीटीओ ऑफिस में हुई.

 

ऐसे हुआ फर्जीवाड़ा साबित

 

ज्यादातर प्रकरणों में लोन 2 से 4 महीने में चुकता कर दिया गया. जबकि कोई भी सही खरीददार इतनी जल्दी लोन चुकाने में सक्षम नहीं होता. तुरंत बाद ही कार को अन्य व्यक्तियों के नाम बेचान कर दिया गया. इन फर्जीवाड़ा प्रकरणों में योगेन्द्र, विमल, सोनू सिंघल, इमरान खान शामिल हैं. सोनू सिंघल और योगेन्द्र का एड्रेस भी फर्जी, द्वारकापुरी अपार्टमेंट प्रताप नगर का है. विमल का एड्रेस भी व्यास अपार्टमेंट सांगानेर का संभवतया यह भी फर्जी है.

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