अबतक इंडिया न्यूज 29 जुलाई । भगवान शिव के प्रिय माह सावन का शुभारंभ 30 जुलाई गुरुवार को आयुष्मान योग और श्रवण नक्षत्र में हो रहा है. इस दिन चंद्रमा मकर राशि और सूर्य कर्क राशि में रहेंगे. श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि रात को 09:30 बजे तक है. इस बार सावन का महीना 31 दिनों का है. इसका समापन 28 अगस्त को होगा. सावन में भगवान शिव की कृपा पाने के लिए लोग सोमवार व्रत रखते हैं, इसके अलावा प्रदोष, शिवरात्रि पर व्रत के साथ विशेष पूजा अर्चना करते हैं. जो लोग लंबे समय से सावन के व्रत और पूजा करते आ रहे हैं, उनको नियम पता हैं, लेकिन जो लोग पहली बार सावन में व्रत रख रहे हैं, उनको शिव पूजा के नियम के बारे में जानना जरूरी है. सावन व्रत की संपूर्ण गाइड आपको मदद कर सकती है.
सावन व्रत कैसे शुरू करें?
सबसे पहली बात कि सावन में सोमवार व्रत रखते हैं, ये स्त्री और पुरुष दोनों रह सकते हैं, इसके अलावा मंगला गौरी व्रत महिलाएं रखती हैं, फिर चतुर्थी, प्रदोष और शिवरात्रि के व्रत किए जाते हैं. सावन का प्रारंभ 30 जुलाई से हो रहा है, लेकिन पहला सावन सोमवार 3 अगस्त को है, इसलिए सावन व्रत की शुरूआत पहले श्रावण सोमवार से होगी. इस बार 4 सावन सोमवार व्रत और 4 ही मंगला गौरी व्रत हैं. सावन शिवरात्रि 11 अगस्त को है, जबकि प्रदोष व्रत 10 अगस्त और 25 अगस्त को हैं.
3 अगस्त: पहला सावन सोमवार
10 अगस्त: दूसरा सावन सोमवार
17 अगस्त: तीसरा सावन सोमवार
24 अगस्त: चौथा सावन सोमवार
10 अगस्त: दूसरा सावन सोमवार
17 अगस्त: तीसरा सावन सोमवार
24 अगस्त: चौथा सावन सोमवार
4 अगस्त: पहला मंगला गौरी व्रत
11 अगस्त: दूसरा मंगला गौरी व्रत
18 अगस्त: तीसरा मंगला गौरी व्रत
25 अगस्त: चौथा मंगला गौरी व्रत
11 अगस्त: दूसरा मंगला गौरी व्रत
18 अगस्त: तीसरा मंगला गौरी व्रत
25 अगस्त: चौथा मंगला गौरी व्रत
सावन सोमवार व्रत का प्रारंभ
- यदि आपको सावन सोमवार व्रत रखना है तो आप 3 अगस्त से इसका प्रारंभ करें. पहला, दूसरा, तीसरा और चौथा सावन सोमवार व्रत करें. इसका समापन यानि सावन सोमवार व्रत का उद्यापन 24 अगस्त को विधि विधान से करें.
- कुछ लोगों के यहां कम से कम 5 सोमवार व्रत का प्रचलन है तो वे सावन के 4 सोमवार के अलावा भाद्रपद के एक सोमवार का व्रत रखकर उस दिन उद्यापन करते हैं.
- कुछ लोग किसी विशेष मनोकामना की पूर्ति के लिए पूरे वर्षभर सोमवार व्रत करना चाहते हैं तो उसका प्रारंभ पहले सावन सोमवार से करते हैं. जैसे 16 सोमवार का व्रत होता है. इसका समापन 16वें सोमवार को होगा.
- व्रत प्रारंभ किया है तो उसका उद्यापन करना जरूरी है. इसके अलावा कुछ लोगों को देखा होगा कि वे जीवनपर्यंत व्रत रखते हैं, लेकिन एक समय के बाद उनको भी व्रत का उद्यापन करना होता है.
मंगला गौरी व्रत का प्रारंभ
से ही मंगला गौरी व्रत भी करते हैं. यह 4 अगस्त को पहले मंगला गौरी व्रत से प्रारंभ होकर 25 अगस्त को अंतिम मंगला गौरी व्रत पर खत्म होगी. यदि आपके यहां मंगला गौरी व्रत नहीं रखा जाता है तो सावन सोमवार व्रत कर लें.
सावन के सभी व्रत
यदि आपको सावन में भगवान शिव के सभी व्रत करने से हैं तो आप सावन सोमवार के साथ दोनों प्रदोष और सावन शिवरात्रि को भी शामिल कर लें.
पहली बार व्रत रखते समय किन बातों का ध्यान रखें?
- पहली बार व्रत रखना है तो आप आज से ही प्रण कर लें कि पूरे सावन माह में आप तामसिक वस्तुओं का सेवन नहीं करेंगे. इस पूरे श्रावण आप मांस, मदिरा, धुम्रपान आदि से दूर रहेंगे.
- सावन के प्रारंभ होते ही पूरे मास आपको ब्रह्मचर्य के नियमों का पालन करना होगा. यदि आप वैवाहिक जीवन में हैं, तो गृहस्थ जीवन के नियमों का पालन करें.
- पहले सावन सोमवार को आप सुबह में उठकर दैनिक क्रियाओं से निवृत होकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें. फिर अपने हाथ में जल लेकर व्रत और शिव पूजा संकल्प करें.
- कोई भी व्रत संकल्प के साथ प्रारंभ करते हैं, संकल्प का कोई विकल्प नहीं है. इसके बिना व्रत प्रारंभ नहीं करते हैं. यह आपको अपने लक्ष्य और निश्चय के प्रति सचेत करता है.
- व्रत कर रहे हैं तो आपको मन, वचन और कर्म से स्वयं को शुद्ध रखना होगा. शिव की भक्ति कर रहे हैं और मन में छल कपट भरा है. दूसरों के प्रति हिंसा और घृणा का भाव है, तो ऐसे व्रत और पूजा व्यर्थ हैं.
- भगवान शिव ने सृष्टि को बचाने के लिए विष का पान किया था, लेकिन कुछ लोग इस भाव को गलत अर्थ में लेकर स्वयं नशीले पदार्थों का सेवन करने लगते हैं. अपनी उन तामसिक इच्छाओं की पूर्ति भगवान शिव के नाम पर करने लगते हैं. यह सर्वथा अनुचित है.
- हर व्रत के दिन आप पवित्र जल से शिव जी का जलाभिषेक करें. बेलपत्र, अक्षत्, गाय का कच्चा दूध, शहद, चंदन, फूल, भांग, धतूरा, शमी के पत्ते आदि से उनका पूजन करें.
- पूजा समय पुरुष ओम नम: शिवाय और महिलाएं नम: शिवाय मंत्र का उच्चारण करें. यदि गुरु मंत्र लिया है तो उसे भी जप सकते हैं. शिव चालीसा पढ़ें और पूजा का समापन आरती से करें. शाम के समय शिवलिंग के पास दीप जलाएं.
- जिन दिन व्रत नहीं है, उस दिन पूरे सावन माह शिव जी का जलाभिषेक करें. शिव कृपा से आपका कल्याण होगा.
- यदि संभव हो तो अपने किसी भी व्रत वाले दिन रुद्राभिषेक करा सकते हैं.
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. abtakindianews.com इसकी पुष्टि नहीं करता है.












