अबतक इंडिया न्यूज देशनोक 6 अक्टूबर । देशनोक नगरपालिका में प्रधानमंत्री आवास योजना में बड़ा घोटाला सामने आया हैं । घोटाले को लेकर कार्यालय नगर पालिका मण्डल, देशनोक ने प्रधानमंत्री आवास योजना में लगभग 3.00 करोड़ रुपये की सरकारी राशि का गबन करने के गंभीर मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए निलंबित कार्मिक सुरेंद्र सिंह टिण्डल के खिलाफ सख्त कदम उठाया है। अधिशाषी अधिकारी रविन्द्र सिंह नगर पालिका द्वारा निदेशक एवं संयुक्त सचिव, स्वायत्त शासन विभाग, जयपुर को पत्र भेजकर संबंधित कार्मिक को सेवा से बर्खास्त करने तथा पुलिस प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराकर अग्रिम विधिक कार्रवाई करने की अनुशंसा की गई है।
यह है पूरा मामला:
प्राप्त जानकारी और कार्यालयी पत्र के अनुसार, देशनोक नगरपालिका में कार्यरत कार्मिक सुरेंद्र सिंह टिण्डल द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना शाखा में पदस्थापित रहते हुए भारी वित्तीय अनियमितता की गई:
- गलत खातों में राशि ट्रांसफर:दिनांक 25.06.2026 को कुल 84.00 लाख रुपये के बिल भिजवाए गए थे। इन बिलों को निरस्त करने संबंधी पत्र ईमेल के जरिए आगे नहीं भिजवाया गया, जिसके कारण अवैध लाभार्थियों के खातों में 84.00 लाख रुपये हस्तांतरित हो गए।
- जांच में बड़ा खुलासा: ऑनलाइन भुगतान पोर्टल के निरीक्षण और जांच कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर 2025 से जून 2026 तक के कुल 49 बिलों की जांच की गई। इस जांच में सामने आया कि अवैध लाभार्थियों को कुल 2,83,80,000/- (दो करोड़ तिरासी लाख अस्सी हजार रुपये) की राजकीय राशि का भुगतान किया गया है।
- 84 लाख जमा कराने के बाद भी शेष रिकवरी: कार्मिक द्वारा पूर्व में 84.00 लाख रुपये जमा कराने के बाद भी 1,99,80,000/- (एक करोड़ निन्यानवे लाख अस्सी हजार रुपये) की राशि असूल योग्य बनती है। इस राशि का अवैध तरीके से अन्य लोगों के खातों में स्थानांतरण कर सरकारी कोष को भारी नुकसान पहुँचाया गया है।
आदेशों की अवहेलना और लापरवाही:
जांच समिति और उच्चाधिकारियों द्वारा बार-बार मौका दिए जाने के बावजूद कार्मिक सुरेंद्र सिंह टिण्डल ने न तो संपूर्ण रिकॉर्ड/चार्ज सुपुर्द किया, न ही जांच कमेटी के समक्ष उपस्थित होकर कोई स्पष्टीकरण दिया। लगातार आदेशों की अवहेलना (Insubordination) और गंभीर लापरवाही के कारण पूर्व में 23.09.2026 को उन्हें निलंबन का आदेश जारी किया गया था।
सेवा से बर्खास्तगी व FIR की तैयारी:
राजस्थान सिविल सेवा आचरण नियमों के घोर उल्लंघन, स्वेच्छाचारिता और भ्रष्टाचार के इस मामले में अब नगरपालिका प्रशासन ने कठोर रुख अपनाया है। स्वायत्त शासन विभाग को प्रेषित पत्र के माध्यम से आरोपी कार्मिक को सेवा से बर्खास्त करने के साथ-साथ भारतीय न्याय संहिता (BNS) एवं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत पुलिस में मामला दर्ज कराने की कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।









