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12 जून से 15 जुलाई तक राजस्थान में शहरी सेवा शिविर,लाखों परिवारों को मिलेगा मालिकाना हक,नामांतरण, भू-उपयोग परिवर्तन समेत कई शुल्कों में 25% से 100% तक छूट

अबतक इंडिया न्यूज 11 जून जयपुर । प्रदेश में पट्टों और अवैध कॉलोनियों के नियमन को लेकर सरकार ने बड़ा फैसला किया है. पंचायत और निकाय चुनावों से पहले राज्य सरकार ने लाखों लोगों को राहत देते हुए 12 जून से 15 जुलाई तक शहरी सेवा शिविर आयोजित करने का ऐलान किया है. शिविरों में सरकारी जमीन पर बसी कॉलोनियों, कच्ची बस्तियों, कृषि भूमि पर विकसित कॉलोनियों और लंबित पट्टा प्रकरणों का नियमन किया जाएगा. नामांतरण, भू-उपयोग परिवर्तन, उप-विभाजन, पुनर्गठन और लीज मामलों में 25 से 100 प्रतिशत तक की छूट भी दी जाएगी. खास बात यह है कि 2013 तक बसी सरकारी भूमि की कॉलोनियों को सिर्फ 25 प्रतिशत दर पर पट्टा मिलेगा और कई प्रक्रियाओं को भी सरल बनाया गया है.

 

पंचायत और निकाय चुनावों की आहट के बीच राज्य सरकार ने अवैध कॉलोनियों, सरकारी भूमि पर बसे आवासों और लंबे समय से लंबित पट्टा प्रकरणों के नियमन की राह फिर खोल दी है. 12 जून से 15 जुलाई तक आयोजित होने वाले शहरी सेवा शिविरों में सरकार भू-रूपांतरण, भू-उपयोग परिवर्तन, नामांतरण, फ्रीहोल्ड, भवन स्वीकृति और विभिन्न प्रकार के नियमन मामलों में 25 से 100 प्रतिशत तक की छूट देगी. साथ ही सरकारी भूमि पर 2013 तक बसी कॉलोनियों और डिनोटिफाइड कच्ची बस्तियों के निवासियों को भी रियायती दर पर पट्टा देने का फैसला किया गया है. इसमें गरीब वर्ग को सर्वाधिक लाभ, मध्यम वर्ग को कम राहत और उच्च आय वर्ग को आंशिक छूट देने का प्रावधान रखा है. नामांतरण शुल्क में 50 प्रतिशत तक, भू-उपयोग परिवर्तन, उप-विभाजन और पुनर्गठन शुल्क में 25 से 75 प्रतिशत तक राहत दी गई है. कृषि भूमि पर विकसित कॉलोनियों पर एक्शन की बजाय नियमन की राह और आसान कर दी गई. सरकारी भूमि पर बसी कॉलोनियों का 25 प्रतिशत दर पर नियमन किया जाएगा. नगरीय विकास, आवासन एवं स्वायत्त शासन विभाग ने बुधवार को इस संबंध में आदेश जारी कर दिए. पहली बार होगा जब किसी भी नगरीय निकाय में महापौर, सभापति नहीं है, उनके बिना शिविर लगाए जा रहे हैं.

सरकारी जमीन पर 2013 तक बसी कॉलोनियों का होगा नियमन

सरकारी जमीन पर 1 जनवरी, 2013 तक बसी कॉलोनियों का नियमन होगा. नियमन शुल्क आवासीय आरक्षित दर अथवा आवासीय डीएलसी दर में जो अधिक होगी, उसके 25 प्रतिशत के आधार पर निर्धारित किया जाएगा हालांकि, सड़क चौडाई 60 फीट से ज्यादा है तो वहां नियमन की अनुमति नहीं होगी. वहीं इन कॉलोनियों में मौजूद खाली भूखंडों को संबंधित नगरीय निकाय अपने कब्जे में लेकर उनकी नीलामी कर सकेंगे.

 

100 रुपए प्रति वर्गमीटर में मिलेगा 200 वर्ग मीटर भूखंड का पट्टा
पुराने शहरी हिस्से में लंबे समय से कब्जे पर बसे (धारा 69-क) लोगों को पट्टा देने के लिए इस बार वैकल्पिक दस्तावेजों का विकल्प दिया गया है. 200 वर्गमीटर तक का पट्टा 100 रुपए प्रति वर्गमीटर, 200 से 500 वर्गमीटर तक 120 रुपए प्रति वर्गमीटर और इससे ज्यादा क्षेत्रफल के भूखंड के लिए 200 रुपए प्रति वर्गमीटर दर ली जाएगी.

 

ऑनलाइन आवेदन पर ऑफलाइन की गली भी छोड़ी
सरकार ने एक तरफ ऑनलाइन आवेदन ही स्वीकार के आदेश दिए, लेकिन यदि किसी का आवेदन ऑफलाइन मिलता है तो संबंधित नगरीय निकाय उसे ऑनलाइन दर्ज करेंगे.

 

वन निर्माण स्वीकृति शुल्क में राहत
250 वर्गमीटर तक- 2500 रुपए
251 से 500 वर्गमीटर तक- शुल्क में 50 प्रतिशत छूट

लीज राशि में राहत
पुरानी बकाया लीज राशि एकमुश्त जमा करने पर ब्याज में 100 प्रतिशत छूट
कुछ मामलों में बकाया लीज राशि पर 60 प्रतिशत तक की छूट

 

अपंजीकृत दस्तावेजों पर भी राहत
बिना रजिस्ट्री वाले पुराने इकरारनामों के आधार पर पट्टा लेने वालों को सरकार ने राहत दी है. ऐसे मामलों में नियमानुसार स्टाम्प शुल्क में छूट मिलेगी. साथ ही 17 जून 1999 से पहले कृषि भूमि पर बसी स्वीकृत कॉलोनियों में अपंजीकृत इकरारनामों पर लगने वाला अतिरिक्त 15 प्रतिशत प्रीमियम शुल्क पूरी तरह माफ कर दिया गया है. वहीं 17 जून 1999 के बाद की स्वीकृत कॉलोनियों में अतिरिक्त प्रीमियम पर देय 50 प्रतिशत शुल्क पर भी 100 प्रतिशत छूट मिलेगी. इससे वर्षों से बिना रजिस्ट्री वाले इकरारनामों के आधार पर कब्जा रखने वाले हजारों भूखंडधारकों के लिए पट्टा प्राप्त करना आसान हो जाएगा.

बहरहाल, राजस्थान में वर्षों से फंसे पट्टों, अवैध कॉलोनियों और कब्जाधारियों के लिए यह शिविर सिर्फ कागजी कार्रवाई नहीं, बल्कि कानूनी पहचान और मालिकाना हक पाने का मौका बनकर आए हैं. सरकार राहत का दावा कर रही है, लेकिन अब नजर इस बात पर रहेगी कि शिविरों में दावों और वादों के बीच आम लोगों को वास्तव में कितनी राहत जमीन पर मिलती है.

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