अबतक इंडिया न्यूज 4 नवंबर । पीएम आवास योजना में वित्तीय गड़बड़ी के आरोपी देशनोक नगरपालिका के निलंबित कर्मचारी के प्रकरण में राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश पारित करते हुए निलंबन आदेश के प्रभाव एवं क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है। न्यायालय ने संबंधित अधिकारियों को याचिकाकर्ता सुरेंद्र सिंह टींडल को तत्काल लीडिंग फायरमैन के पद पर बहाल करने के निर्देश दिए हैं।
राजस्थान हाईकोर्ट, जोधपुर में एसबी सिविल रिट याचिका संख्या 24931/2026 (CNR: RJHC011039622026) पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति कुलदीप माथुर ने 3 नवंबर 2026 को यह आदेश पारित किया।
क्या है पूरा मामला?
याचिकाकर्ता सुरेंद्र सिंह पुत्र हरफूल सिंह, निवासी बीकानेर ने अधिवक्ता प्रमेंद्र बोहरा के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में बताया गया कि देशनोक नगरपालिका मंडल की 26 जून 2019 को आयोजित साधारण सभा की बैठक में राजस्थान नगरपालिका (अधीनस्थ एवं मंत्रालयिक सेवा) नियम, 1963 के नियम 23 के तहत उन्हें लीडिंग फायरमैन के पद पर पदोन्नत करने का प्रस्ताव पारित किया गया था। इसके बाद से वे इस पद पर अपनी सेवाएं दे रहे थे।
याचिका के अनुसार, देशनोक नगरपालिका के अधिशासी अधिकारी ने 23 सितंबर 2026 को राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1958 के नियम 13 के तहत सुरेंद्र सिंह को निलंबित कर दिया था। सुरेंद्र सिंह पर पीएम आवास योजना में करीब तीन करोड़ रूपए की वित्तीय अनियमितता के आरोप में निलंबन किया गया था एवं बर्खास्तगी की अनुसंशा की गई थी।
- गलत खातों में राशि ट्रांसफर:दिनांक 25.06.2026 को कुल 84.00 लाख रुपये के बिल भिजवाए गए थे। इन बिलों को निरस्त करने संबंधी पत्र ईमेल के जरिए आगे नहीं भिजवाया गया, जिसके कारण अवैध लाभार्थियों के खातों में 84.00 लाख रुपये हस्तांतरित हो गए।
- जांच में बड़ा खुलासा: ऑनलाइन भुगतान पोर्टल के निरीक्षण और जांच कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर 2025 से जून 2026 तक के कुल 49 बिलों की जांच की गई। इस जांच में सामने आया कि अवैध लाभार्थियों को कुल 2,83,80,000/- (दो करोड़ तिरासी लाख अस्सी हजार रुपये) की राजकीय राशि का भुगतान किया गया है।
- 84 लाख जमा कराने के बाद भी शेष रिकवरी: कार्मिक द्वारा पूर्व में 84.00 लाख रुपये जमा कराने के बाद भी 1,99,80,000/- (एक करोड़ निन्यानवे लाख अस्सी हजार रुपये) की राशि असूल योग्य बनती है। इस राशि का अवैध तरीके से अन्य लोगों के खातों में स्थानांतरण कर सरकारी कोष को भारी नुकसान पहुँचाया गया है।
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याचिकाकर्ता ने निलंबन को बताया अधिकार क्षेत्र से बाहर
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में तर्क दिया गया कि निलंबन आदेश जारी करने से पहले सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति प्राप्त होने का उल्लेख तो आदेश में किया गया है, लेकिन नगरपालिका मंडल का ऐसा कोई प्रस्ताव रिकॉर्ड पर उपलब्ध नहीं है।
याचिकाकर्ता पक्ष ने यह भी दलील दी कि अधिशासी अधिकारी न तो उनकी नियुक्ति करने वाला प्राधिकारी है और न ही नियुक्ति प्राधिकारी से उच्च अधिकारी है। ऐसे में उनके द्वारा पारित निलंबन आदेश अधिकार क्षेत्र से बाहर है और इसे निरस्त किया जाना चाहिए।
इस संबंध में याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने हाईकोर्ट के पूर्व निर्णयों का भी हवाला दिया।
नगरपालिका प्रशासन की ओर से क्या दिया गया तर्क?
वहीं, राज्य एवं नगरपालिका प्रशासन की ओर से अधिवक्ता रितेश भटनागर ने याचिकाकर्ता के तर्कों का विरोध किया।
प्रतिवादी पक्ष की ओर से बताया गया कि राजस्थान नगरपालिका (अधीनस्थ एवं मंत्रालयिक सेवा) नियम, 1963 के नियम 22 तथा राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 की धारा 335 के तहत अधिशासी अधिकारी को अधीनस्थ एवं मंत्रालयिक कर्मचारियों के विरुद्ध निर्धारित नियमों के अनुसार दंडात्मक कार्रवाई करने का अधिकार प्राप्त है। हालांकि सेवा से बर्खास्तगी अथवा हटाने जैसे दंड इसके अपवाद हैं।
हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायमूर्ति कुलदीप माथुर ने मामले को विचारणीय मानते हुए नोटिस जारी करने के आदेश दिए।
अदालत के आदेश के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं—
1\. प्रतिवादी संख्या 3 यानी देशनोक नगरपालिका के अधिशासी अधिकारी की ओर से अधिवक्ता ने नोटिस स्वीकार कर लिया, इसलिए उनकी तामील पूर्ण मानी गई।
2\. प्रतिवादी संख्या 1 एवं 2 यानी राजस्थान सरकार के संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए।
3\. मामले में जवाब के लिए छह सप्ताह का समय निर्धारित करते हुए सुनवाई को आगे के लिए रखा गया।
4\. सबसे महत्वपूर्ण आदेश में हाईकोर्ट ने 23 सितंबर 2026 को अधिशासी अधिकारी, नगरपालिका देशनोक द्वारा पारित निलंबन आदेश के प्रभाव एवं क्रियान्वयन पर आगामी आदेशों तक रोक लगा दी।
5\. न्यायालय ने प्रतिवादियों को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को तत्काल टिंडल/लीडिंग फायरमैन के पद पर पुनः बहाल किया जाए।
6\. हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित प्रशासन याचिकाकर्ता को किसी अन्य पद अथवा स्थान पर पदस्थापित कर सकता है, जहां वे उनके विरुद्ध चल रही अथवा प्रस्तावित अनुशासनात्मक कार्यवाही को प्रभावित न कर सकें और न ही साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की स्थिति पैदा हो।
देशनोक नगरपालिका में आदेश को लेकर चर्चा
हाईकोर्ट के इस अंतरिम आदेश से देशनोक नगरपालिका के निलंबित कर्मचारी सुरेंद्र सिंह को फिलहाल बड़ी राहत मिली है। अदालत ने निलंबन आदेश पर रोक लगाते हुए उन्हें मूल पद पर बहाल करने के निर्देश दिए हैं।
हालांकि यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि हाईकोर्ट ने अभी याचिका का अंतिम निस्तारण नहीं किया है। मामले में प्रतिवादी पक्ष से जवाब मांगा गया है और अंतिम निर्णय आगे की सुनवाई के बाद होगा।












