अबतक इंडिया न्यूज 12 जून देशनोक । राष्ट्रीय राजमार्ग-62 के नागौर–बीकानेर फोरलेन परियोजना के तहत प्रस्तावित देशनोक बाईपास के एलाइनमेंट (मार्ग) को बदलने की मांग तेज हो गई है। कांग्रेस सीए प्रकोष्ठ (बीकानेर ग्रामीण) के जिला अध्यक्ष सीए श्यामसुंदर मूंधड़ा ने शुक्रवार को सक्षम प्राधिकारी भूमि अधिग्रहण (CALA) एवं उपखण्ड अधिकारी, बीकानेर के समक्ष एक विस्तृत आपत्ति पत्र प्रस्तुत किया है।
सौंपे गए ज्ञापन में स्पष्ट किया गया है कि क्षेत्रवासी राष्ट्रीय राजमार्ग के फोरलेन निर्माण या विकास कार्यों के विरोधी नहीं हैं। उनकी आपत्ति केवल उस प्रस्तावित बाईपास मार्ग से है, जो करणी माता ओरण भूमि, करणी माता पैनोरमा क्षेत्र और अन्य धार्मिक, सांस्कृतिक व पर्यावरणीय महत्व के स्थानों को प्रभावित कर रहा है।

जन आस्था और पर्यावरण से जुड़ा है ओरण क्षेत्र
सीए मूंधड़ा ने आपत्ति में बताया कि करणी माता ओरण भूमि केवल जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि स्थानीय जनआस्था, धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। प्रतिवर्ष कार्तिक चौदस सहित कई बड़े अवसरों पर देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालु इस क्षेत्र की पवित्र परिक्रमा में भाग लेते हैं। ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में किसी भी प्रकार के निर्माण से पहले धार्मिक व पर्यावरणीय प्रभावों का गंभीरता से आकलन किया जाना बेहद जरूरी है।
’बाईपास के बजाय वर्तमान हाईवे का हो चौड़ीकरण’
ज्ञापन में एक महत्वपूर्ण तकनीकी विकल्प सुझाते हुए कहा गया है कि देशनोक क्षेत्र में वर्तमान NH-62 कॉरिडोर पर पहले से ही पर्याप्त सड़क अवसंरचना और ‘राइट ऑफ वे’ (सड़क के दोनों ओर की खाली जमीन) उपलब्ध है। ऐसे में एक नया बाईपास निकालकर ओरण भूमि को नुकसान पहुंचाने के बजाय, वर्तमान राष्ट्रीय राजमार्ग के चौड़ीकरण, उन्नयन (अपग्रेडेशन) और बेहतर यातायात प्रबंधन के विकल्पों पर विचार किया जाना चाहिए।
जनसुनवाई और दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग
प्रभावितों और क्षेत्रवासियों की ओर से मांग की गई है कि इस परियोजना की विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR), भूमि योजना विवरण (LPS) और एलाइनमेंट मानचित्र को सार्वजनिक किया जाए। साथ ही, राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 की धारा 3C के तहत दर्ज की जा रही आपत्तियों पर निष्पक्षता से विचार हो।
सीए मूंधड़ा ने प्रशासन से निवेदन किया है कि विकास और जनभावनाओं के बीच संतुलन बनाने के लिए कोई भी अंतिम निर्णय लेने से पहले एक विस्तृत जनसुनवाई और तकनीकी समीक्षा अनिवार्य रूप से आयोजित की जाए।











