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वैदिक शिक्षा के लिए गुरुकुलों की महती आवश्यकता: दण्डी स्वामी ​’पं. बाबू लाल शास्त्री ज्योतिष बोध संस्थान’ का एक दिवसीय सामूहिक रुद्राभिषेक के साथ समापन

अबतक इंडिया न्यूज 13 जून बीकानेर। वर्तमान समय में युवा पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ने और उन्हें अपनी संस्कृति से परिचित कराने के लिए वैदिक शिक्षा और गुरुकुलों की महती आवश्यकता है। यह उद्गार ऋषिकेश से पधारे दण्डी स्वामी शिवेन्द्राश्रम महाराज ने व्यक्त किए। वे रघुनाथसर मंदिर में ‘पं. बाबू लाल शास्त्री ज्योतिष बोध संस्थान’ द्वारा आयोजित एक माह के नि:शुल्क रुद्राष्टाध्यायी (रुद्री) पाठ व शिव पूजा विधि प्रशिक्षण शिविर के समापन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने युवाओं को अनुशासित जीवन जीने और ऐसे समर कैंपों का हिस्सा बनने की प्रेरणा दी।
​कार्यक्रम में उपस्थित नगर विधायक जेठानन्द व्यास ने संस्थान के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे शिविरों के माध्यम से हमारी युवा पीढ़ी में वैदिक संस्कारों का सिंचन हो रहा है, जो सराहनीय है। विशिष्ट अतिथि समाजसेवी देवकिशन चाँडक ने ब्राह्मण समाज को समाज का मार्गदर्शक बताते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से समाज में नए संस्कार ओत-प्रोत होंगे। उन्होंने भविष्य में भी ऐसे शिविरों में तन-मन-धन से सहयोग देने की घोषणा की। वहीं, विशिष्ट वक्ता पं. जुगलकिशोर ओझा ने ब्राह्मणों के लिए नित्य त्रिकाल सन्ध्या और गायत्री उपासना की अनिवार्यता पर बल दिया।

​135 प्रशिक्षुओं ने लिया भाग, ‘शिव पूजा विधि’ पुस्तक का विमोचन

​शिविर संयोजक ज्योतिर्विद पं. राजेन्द्र किराड़ ने बताया कि 11 मई से 12 जून तक चले इस एक माह के प्रशिक्षण शिविर में 135 प्रशिक्षुओं ने हिस्सा लिया। शिविर के दौरान उन्हें रुद्राष्टाध्यायी के साथ-साथ शिव-महिम्न स्तोत्र, शिव ताण्डव, पंचाक्षर और रुद्राष्टक आदि स्तोत्रों का सस्वर अध्ययन करवाया गया। समापन के अवसर पर सामूहिक रुद्राभिषेक का आयोजन किया गया, जिसे पं. मुरलीधर पुरोहित, पं. संतोष व्यास व मदनगोपाल व्यास ने विधि-विधान से सम्पन्न करवाया।
​इस पावन अवसर पर स्व. पुष्पा देवी की स्मृति में प्रकाशित तथा पं. राजेन्द्र किराड़ द्वारा लिखित पुस्तक ‘शिव पूजा विधि’ का विमोचन भी गणमान्य अतिथियों द्वारा किया गया।

​प्रशिक्षक का हुआ अभिनंदन

​समारोह के दौरान शिविर में अपनी नि:स्वार्थ सेवाएं देने वाले मुख्य प्रशिक्षक प्रह्लाद व्यास का संस्थान की ओर से शॉल व स्मृति चिह्न भेंट कर भावभीना अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में देवकीनन्दन, सेठी किराडू, भानू व्यास, शिवम् पुरोहित, हिमांशु किराड़ और जुगल किशोर पुरोहित ने विशेष भूमिका निभाई। समापन सत्र में शहर के अनेक गणमान्य नागरिक और श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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