अबतक इंडिया न्यूज 3 जुलाई देशनोक । देशनोक कस्बे में पिछले लंबे समय से जारी पानी की भारी किल्लत और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर जनता में भारी आक्रोश व्याप्त है। भीषण गर्मी के इस मौसम में भी कस्बे में लगातार 4 से 5 दिनों तक पानी की सप्लाई पूरी तरह बाधित रहने से आम जनता त्रस्त है और चारों तरफ त्राहि-त्राहि मची हुई है। इस गंभीर जन-समस्या को लेकर पूर्व पार्षद, पूर्व भाजपा अध्यक्ष लक्ष्मण दान ने जिला कलेक्टर बीकानेर को एक लिखित शिकायत प्रेषित कर जलदाय विभाग के स्थानीय अधिकारियों और जल माफियाओं के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
मिलीभगत से खड़ा किया जा रहा ‘कृत्रिम जल संकट’
लक्ष्मण दान द्वारा जिला कलेक्टर को भेजे गए शिकायत पत्र (क्रमांक 450) में जलदाय विभाग (PHED) के स्थानीय कनिष्ठ अभियंता (JEN), एफआरटी (फील्ड रिपेयर टीम) और विभाग के ठेकेदारों पर जल माफियाओं के साथ गहरी मिलीभगत (सांठगांठ) का सीधा आरोप लगाया गया है। सरकारी तंत्र की इस लापरवाही और भ्रष्टाचार का विवरण देते हुए मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदु उठाए गए हैं:
कृत्रिम जल संकट: आरोप है कि आम जनता के नलों में जानबूझकर 5-5 दिनों तक पानी नहीं छोड़ा जाता, ताकि क्षेत्र में पानी की भारी किल्लत दिखाकर कृत्रिम संकट खड़ा रखा जा सके।
जल माफियाओं को संरक्षण: जिस समय सरकारी सप्लाई बंद रहती है, ठीक उसी समय जल माफियाओं के निजी वाटर टैंकर क्षेत्र में धड़ल्ले से सक्रिय हो जाते हैं और मजबूर जनता को महंगे दामों पर पानी बेचकर चांदी कूटते हैं।
जनप्रतिनिधि ने बताया कि स्थानीय स्तर पर बार-बार शिकायत करने के बावजूद इन भ्रष्ट अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ अब तक प्रशासन द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है, जिससे इनके हौसले बुलंद हैं।
प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से प्रमुख मांगें:
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला कलेक्टर से पुरजोर मांग की गई है कि:
इस पूरे प्रकरण की किसी निष्पक्ष बाहरी एजेंसी या वरिष्ठ अधिकारी से उच्च स्तरीय (High-Level) जांच तत्काल करवाई जाए।
दोषी कनिष्ठ अभियंता (JEN), संबंधित FRT टीम और भ्रष्टाचार में लिप्त ठेकेदारों को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर ब्लैकलिस्ट किया जाए।
देशनोक कस्बे में ध्वस्त हो चुकी पेयजल व्यवस्था को तुरंत दुरुस्त कर प्रतिदिन सुचारू रूप से जलापूर्ति सुनिश्चित की जाए।
उग्र आंदोलन और कलेक्ट्रेट घेराव की चेतावनी
लक्ष्मण दान ने प्रशासन को कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि इस गंभीर जन-समस्या पर तुरंत सख्त कदम नहीं उठाया गया, तो कस्बे के आक्रोशित नागरिक कलेक्ट्रेट का घेराव करने और उग्र आंदोलन के लिए विवश होंगे, जिसकी समस्त जिम्मेदारी प्रशासन एवं जलदाय विभाग की होगी।












