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देशनोक सेवा शिविर राम भरोसे: जनसेवा के नाम पर सिर्फ ‘खानापूर्ति’, खाली कुर्सियाँ चिढ़ा रहीं आमजन का स्वाभिमान ,प्रभारी सहित अधिकांश विभागों के अधिकारी नदारद

अबतक इंडिया न्यूज 2 जुलाई देशनोक । राज्य सरकार की मंशा हैं  कि आमजन को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें और एक ही छत के नीचे उनके सारे काम हो जाएं।इसी उद्देश्य से पूरे प्रदेश में सेवा शिविर  लगाए जा रहे हैं ।   लेकिन देशनोक नगरपालिका परिसर में चल रहा ‘सेवा शिविर’ इस मंशा के ठीक विपरीत जनता के लिए आफत का सबब बन चुका है। शिविर में समाधान तो दूर, आमजन स्थानीय प्रशासन की घोर लापरवाही के कारण ‘चक्कर घिन्नी’ बनने को मजबूर हैं।

हालात यह हैं कि शिविर में दैनिक और रोजमर्रा की समस्याओं से जुड़े काम भी ठप पड़े हैं, जिससे स्थानीय जनमानस में अब एक ही चर्चा जोरों पर है— “यह सेवा शिविर है या सिर्फ कागजी खानापूर्ति?”

 

​अधिकारी गायब, सूनी पड़ी हैं टेबलें

​सरकार ने बड़ी उम्मीदों के साथ इस शिविर का आगाज़ किया था, लेकिन यहाँ का धरातल कुछ और ही कहानी बयाँ कर रहा है। शिविर में कई महत्वपूर्ण विभागों के अधिकारी और कर्मचारी सिरे से गायब हैं। विभागों के नाम की तख्तियाँ और टेबलें तो सजी हैं, लेकिन उन पर बैठने वाली कुर्सियाँ खाली पड़ी हैं।

शिविर प्रभारी तक की सीट खाली होने से प्रशासनिक गंभीरता का अंदाज़ा आसानी से लगाया जा सकता है।

​सुबह 10:40 तक सिर्फ दो राशन डिपो होल्डर मिले!

पूर्व पार्षद लक्ष्मण दान ने प्रशासन की पोल खोलते हुए बताया कि वे सुबह 10:00 बजे शिविर स्थल पर पहुंचे थे। लेकिन हैरान करने वाली बात यह रही कि सुबह 10:40 बजे तक शिविर में मात्र दो राशन डिपो होल्डर्स के अलावा कोई भी जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी मौजूद नहीं था। राशन कार्ड, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, बिजली और पानी जैसी बुनियादी और रोजमर्रा की शिकायतों से जुड़ी फाइलें यहाँ सिर्फ धूल फांक रही हैं।

सभागार में शिविर, फिर पार्क में लाखों का टेंट क्यों?
​पालिका प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए लोगों ने कहा कि जब पूरा सेवा शिविर पालिका के मुख्य सभागार (हॉल) के अंदर सुचारू रूप से चलाया जा रहा है, तो फिर बाहर पार्क में अलग से टेंट लगाने का क्या औचित्य है?

 

न पानी, न कुर्सी: इस भीषण गर्मी में पार्क में लगाए गए टेंट के नीचे न तो आमजन के बैठने के लिए कुर्सियाँ हैं और न ही पीने के ठंडे पानी की कोई व्यवस्था है।​प्रचारप्रसार शून्य: शिविर का प्रचार-प्रसार इतना कमजोर है कि आम जनता को इसकी सही जानकारी तक नहीं है।बड़ा सवाल: आखिर शिविर स्थल से अलग टेंट लगाकर पालिका प्रशासन किसे और क्यों आर्थिक लाभ पहुंचाना चाहता है? यह जाँच का विषय है।

​सरकार की छवि पर लग रहा बट्टा, कार्रवाई की मांग

 

​एक ही छत के नीचे जनता को राहत देने का सरकारी दावा देशनोक में पूरी तरह दम तोड़ चुका है। स्थानीय प्रशासन और लापरवाह अधिकारियों के इस ढुलमुल रवैए के कारण न केवल आमजन परेशान हो रहा है, बल्कि राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और उसकी छवि पर भी गहरा बट्टा लग रहा है। क्षेत्र के जागरूक नागरिकों ने मांग की है कि सरकार की साख को धूल में मिलाने वाले और जनता के समय के साथ खिलवाड़ करने वाले ऐसे लापरवाह अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ तुरंत सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।

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