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सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस में बॉम्बे HC का बड़ा फैसला,सभी 22 आरोपियों को किया बरी

अबतक इंडिया न्यूज मुंबई 7 मई । भारत के सबसे हाई-प्रोफाइल और रहस्यमयी मामलों में से एक 2005 के ‘सोहराबुद्दीन शेख कथित फेक एनकाउंटर’ (Sohrabuddin Sheikh Encounter) केस में आज बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने एक बड़ा फैसला सुनाया है. हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति गौतम ए. अंखड की पीठ ने निचली अदालत द्वारा 22 आरोपियों (जिनमें 21 पुलिसकर्मी शामिल हैं) को बरी किए जाने के फैसले को बरकरार रखा है. कोर्ट ने रिहाई के खिलाफ सोहराबुद्दीन के भाई रुबाबुद्दीन शेख द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया है.

‘सुप्रीम कोर्ट जाएंगे या नहीं, विस्तृत आदेश के बाद होगा तय’

रुबाबुद्दीन शेख के वकील गौतम तिवारी ने अदालत के फैसले के बाद मीडिया से बातचीत में कहा, “हाईकोर्ट ने आज हमारी अपील खारिज कर दी है. हालांकि, यह सिर्फ एक ऑपरेटिव ऑर्डर (Operative Order) है. अभी हमें आधार नहीं पता हैं. विस्तृत आदेश आने के बाद ही पता चलेगा कि याचिका किस वजह से खारिज की गई है.”

आगे सुप्रीम कोर्ट जाने के सवाल पर उन्होंने कहा, “रुबाबुद्दीन और उनके परिवार ने इतने सालों में बहुत कुछ झेला है. हम उनसे बात करके ही आगे का कदम तय करेंगे.”

इन पुलिस अधिकारियों की भूमिका पर उठे सवाल

इस केस में गुजरात और राजस्थान कैडर के कई वरिष्ठ IPS अधिकारियों के नाम सामने आए थे, जिनमें डी.जी. वंजारा, दिनेश एमएन, राजकुमार पांडियन शामिल थे. इन अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया और उन्होंने कई साल जेल में बिताए, लेकिन बाद में सबूतों के अभाव में सभी बरी हो गए.बरी हुए पुलिसकर्मियों में राजस्थान के तत्कालीन इंस्पेक्टर वर्तमान डीएसपी अब्दुल रहमान,तत्कालीन एसआई वर्तमान इंस्पेक्टर श्याम सिंह,हिमांशु राजावत सहित अधिनस्थ पुलिसकर्मी युद्धवीर सिंह,करतार सिंह व नारायण सिंह शामिल रहे ।

210 गवाह, 92 मुकरे और आज तक बनी हुई है मिस्ट्री

यह एक ऐसा खौफनाक मामला था जिसमें कई बड़े राजनेताओं और पुलिस अधिकारियों के नाम उछले थे. इस केस में 38 लोगों की लिस्ट थी और 210 गवाहों के बयान दर्ज किए गए थे. लेकिन सुनवाई के दौरान यह केस तब कमजोर पड़ गया जब 92 गवाह अपने बयानों से मुकर गए.

21 दिसंबर 2018 को सबूतों के भारी अभाव के चलते मुंबई की विशेष CBI अदालत ने सभी 22 आरोपियों को बरी कर दिया था. इसी फैसले को 2019 में बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी, जो आज खारिज हो गई.

क्या था पूरा मामला? (Sohrabuddin Encounter Timeline)

  • 22-23 नवंबर 2005: गुजरात ATS ने हैदराबाद से आ रही बस को रोका और सोहराबुद्दीन, उसकी पत्नी कौसर बी और साथी तुलसीराम प्रजापति को हिरासत में लिया.
  • 26 नवंबर 2005: अहमदाबाद के पास सोहराबुद्दीन को पुलिस ने एनकाउंटर में मार गिराया. पोस्टमॉर्टम में 11 गोलियां मिली थीं. पुलिस ने दावा किया था कि वह लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी था.
  • कौसर बी की खौफनाक हत्या: सोहराबुद्दीन की मौत के कुछ दिन बाद उसकी पत्नी कौसर बी भी कभी नहीं मिली. आरोप था कि फार्महाउस में रेप के बाद उसे मारकर उसका शव जला दिया गया.
  • 26-28 दिसंबर 2006: इस केस के सबसे अहम चश्मदीद गवाह तुलसीराम प्रजापति को भी गुजरात-राजस्थान बॉर्डर पर एक दूसरे कथित ‘फेक एनकाउंटर’ में मार दिया गया.

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर 2012 में यह केस CBI को सौंपकर मुंबई ट्रांसफर किया गया था. लेकिन गवाहों के पलटने और सबूतों की कमी के चलते 21 साल बाद भी यह साफ नहीं हो सका कि आखिर इस ट्रिपल मर्डर मिस्ट्री का असली सच क्या था.

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