अबतक इंडिया न्यूज जयपुर 7 मई । जेजेएम घोटाले से जुड़े मामले में एसीबी ने बड़ी कार्रवाई की है. एसीबी ने पूर्व मंत्री महेश जोशी को गिरफ्तार कर लिया. 960 करोड़ रुपए से जुड़े मामले में एसीबी ने कार्रवाई की है. इससे पहले एसीबी रिटायर्ड IAS सुबोध अग्रवाल को गिरफ्तार कर चुकी है. अब मामले में ये बड़ी कार्रवाई की गई है.
ACB की बड़ी कार्रवाई
ACB अधिकारियों ने महेश जोशी को उनके जयपुर निवास से गिरफ्तार किया. सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई जल जीवन मिशन से जुड़े करीब 900 करोड़ रुपये के कथित घोटाले की जांच के क्रम में की गई है. आरोप है कि महेश जोशी के मंत्री काल के दौरान टेंडर प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं की गईं और रिश्वत लेकर ठेके आवंटित किए गए. ACB की टीम लंबे समय से इस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही थी.
घोटाले की जड़ें
जल जीवन मिशन घोटाले में टेंडरों में अनियमितताएं, फर्जी कंपनियों को काम आवंटित करना और भारी भरकम रिश्वतखोरी के आरोप लगे हैं. हाल ही में पूर्व IAS अधिकारी सुबोध अग्रवाल से ACB द्वारा की गई पूछताछ के बाद जांच एजेंसी ने कार्रवाई को तेज कर दिया था, जिसके बाद महेश जोशी की गिरफ्तारी हुई.
ED ने पहले भी किया था गिरफ्तार
इससे पहले अप्रैल 2025 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी महेश जोशी को इसी मामले में गिरफ्तार किया था. ED ने उन पर मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए थे. हालांकि, महेश जोशी ने सभी आरोपों से इनकार किया था. बाद में उन्हें सुप्रीम कोर्ट से 3 दिसंबर 2025 को जमानत मिल गई थी. अब ACB की नई गिरफ्तारी ने पूरे मामले को फिर से सुर्खियों में ला दिया है.
राजनीतिक हलचल तेज
महेश जोशी की गिरफ्तारी के बाद राजस्थान कांग्रेस में हड़कंप मच गया है. पार्टी के कई नेताओं ने इसे ‘‘राजनीतिक साजिश’’ बताया है, जबकि विपक्षी दल इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई बता रहे हैं. इस घटना से राजस्थान की सियासी गलियारों में तीखी बहस शुरू हो गई है. राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि यह मामला आगे और बड़े खुलासे कर सकता है.
किरोड़ी लाल मीणा ने दिया था धरना
दरअसल पूरा मामला 20 जून 2023 से शुरू हुआ. जब डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने राजधानी जयपुर के अशोक नगर थाने के बाहर इस मामले में FIR दर्ज कराने की मांग को लेकर दो दिन तक धरना दिया. मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ा. कई अन्य नेता भी अशोक नगर थाने पहुंचे. जमकर राजनीतिक बयानबाजी हुई. 2023 के विधानसभा चुनाव के वक्त भी यह मामला सियासी गलियारों में खूब चर्चा का विषय बना.










