अबतक इंडिया न्यूज देशनोक 18 अक्टूबर । विश्व प्रसिद्ध जगत जननी माँ करणी के पावन जन्मोत्सव और शारदीय नवरात्रा के अवसर पर रविवार को देशनोक में एक अत्यंत भव्य और ऐतिहासिक जन्मोत्सव शोभायात्रा निकाली गई। पारंपरिक आस्था और आधुनिक उल्लास के अनूठे संगम वाली इस शोभायात्रा ने पूरे कस्बे को भक्तिमय रंग में रंग दिया। शोभायात्रा में उमड़े लाखों के विशाल जनसमूह को देखते हुए मंदिर प्रशासन व स्थानीय प्रशासन ने निर्धारित समय से पूर्व ही जन्मोत्सव शोभायात्रा शुरू कर दी।

गाजे-बाजे और गगनचुम्बी जयकारों से गूँजा आसमान
जन्मोत्सव के पावन मौके पर सुबह से ही माँ करणी के दरबार में श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया था। गाजे-बाजे और पारंपरिक ढोल-नगाड़ों के साथ जब शोभायात्रा रवाना हुई, तो पूरा कस्बा माँ करणी के गगनचुम्बी जयकारों से गूँज उठा। शोभायात्रा में उमड़े अपार जनसमूह ने यह साबित कर दिया कि माँ के प्रति भक्तों की अटूट श्रद्धा और आस्था का सैलाब किस कदर उमड़ा हुआ है।

आधुनिकता का रंग: छाई रही ‘Gen-Z’ थीम और बैलून सजावट

इस बार की शोभायात्रा का मुख्य आकर्षण युवाओं की भागीदारी और आधुनिक अंदाज रहा। यात्रा मार्ग पर पूरी तरह ‘Gen-Z’ थीम का प्रभाव देखने को मिला। स्वागत के लिए पूरे मार्ग को आधुनिक और आकर्षक “Happy Birthday” बैलून व फूल-मालाओं से सजाया गया था। जगह-जगह पर पुष्प वर्षा, इत्र छिड़काव और गुलाल उड़ाकर इस जन्मोत्सव का भव्य स्वागत किया गया, जिससे पूरा मार्ग सतरंगी नजर आया।

स्वागत मे पहली बार रेड कारपेट
इस बार स्थानीय युवा टीम ने शोभायात्रा का रेड कारपेट बिछाकर भव्य स्वागत किया। शोभायात्रा मार्ग पर कई स्थानों पर स्टेज लगाकर देवी के रूप में सजी कन्याओं द्वारा नए अंदाज में स्वागत की थीम अपनाइ गई।Gen -Z की यह थीम केवल आकर्षण का केंद्र ही नहीं खूब चर्चित भी रही।

आकाश में ‘चील रूपा सांवली’ के दर्शन से भाव-विभोर हुए भक्त
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस भव्य जन्मोत्सव के दौरान आसमान में माँ करणी के प्रतीक रूप ‘चील रूपा सांवली’ के दर्शन हुए। सांवली के दर्शन पाते ही पूरा जनसमूह गदगद हो गया और भक्तों ने हाथ जोड़कर जयकारे लगाने शुरू कर दिए। इसे बेहद शुभ और अलौकिक संकेत मानते हुए श्रद्धालुओं ने धन्य महसूस किया।

चांदी की पालकी की परंपरा
मान्यता हैं कि मां करणी अपने जन्मदिवस पर आराध्य देवी तेमड़ा राय (आवड़ माता ) के दर्शन -पूजन कर आशीर्वाद लेने जाती हैं। मां करणी के वंशज व करणी भक्त मातेश्वरी के इस जन्मदिवस को भव्य जन्मोत्सव के रूप में बड़े हर्षाल्लास से मनाते हैं।शारदीय नवरात्रा की सप्तमी को मां करणी के जन्मदिवस पर चांदी की पालकी में प्रतीकात्मक रूप मे मां करणी की तस्वीर स्थापित कर पूर्ण आस्था, भक्ति, श्रद्धा व परंपरा के रूप में जन्मोत्सव शोभायात्रा बड़े ही धूमधाम व हर्षाल्लास के साथ निकाली जाती हैं।श्रद्धा व भक्ति के आनंद की पराकाष्ठा मे डूबकर नाचते -गाते अपनी प्रातः स्मरणीय आराध्य माँ करणी के जयकारों के साथ इस ऐतिहासिक क्षणों के साक्षी बनते हैं ।
इस आयोजन से पूरा देशनोक क्षेत्र माँ करणी की श्रद्धा व भक्ति में सराबोर नजर आया और हर कोई इस ऐतिहासिक जन्मोत्सव का गवाह बनकर खुद को सौभाग्यशाली मान रहा था।








