अबतक इंडिया न्यूज 17 अक्टूबर जोधपुर: राजस्थान के आबू रोड, पाली मारवाड़, जोधपुर, बीकानेर और हनुमानगढ़ समेत आसपास के क्षेत्रों से श्री माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी सामने आई है। अब पश्चिमी राजस्थान से सीधे श्री माता वैष्णो देवी कटरा तक की ट्रेन कनेक्टिविटी मिल गई है, जिससे श्रद्धालुओं का सफर बेहद आसान हो गया है।
रेलवे प्रशासन ने यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए साबरमती-जम्मू तवी एक्सप्रेस का विस्तार अब श्री माता वैष्णो देवी कटरा तक कर दिया है। इस कदम से उत्तर पश्चिम रेलवे के अंतर्गत आने वाले यात्रियों को अब जम्मू तवी स्टेशन पर ट्रेन बदलने की पुरानी परेशानी से पूरी तरह छुटकारा मिल जाएगा और वे बिना किसी रुकावट के सीधे कटरा तक का सफर तय कर सकेंगे।
इन तिथियों से शुरू होगी सेवा
उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी अमित सुदर्शन के अनुसार, इस विस्तारित रेल सेवा का संचालन निम्नलिखित तिथियों से शुरू हो रहा है:
- गाड़ी संख्या 19223 (साबरमती बीजी – श्री माता वैष्णो देवी कटरा): यह रेल सेवा 18 अक्टूबर 2026 से साबरमती बीजी से प्रस्थान कर अब जम्मूतवी के स्थान पर सीधे श्री माता वैष्णो देवी कटरा तक संचालित होगी।
- गाड़ी संख्या 19224 (श्री माता वैष्णो देवी कटरा – साबरमती बीजी): वापसी में यह रेल सेवा 20 अक्टूबर 2026 से जम्मूतवी के स्थान पर सीधे श्री माता वैष्णो देवी कटरा से साबरमती के लिए प्रस्थान करेगी।
तीन नए स्टेशनों पर ठहराव से बढ़ेगी सहूलियत
ट्रेन के विस्तार के साथ ही यात्रियों की सुविधा के लिए मार्ग में तीन नए स्टेशनों पर ठहराव भी प्रदान किया गया है। इनमें साम्बा, बाड़ी ब्राह्मण और शहीद कप्तान तुषार महाजन स्टेशन शामिल हैं। इन स्टेशनों पर ट्रेन के रुकने से आसपास के क्षेत्रों के स्थानीय यात्रियों को भी आवागमन में खासी सहूलियत होगी और वे जम्मू क्षेत्र के प्रमुख स्टेशनों तक आसानी से पहुंच सकेंगे।
बुजुर्गों और परिवारों को विशेष राहत
कटरा तक सीधी ट्रेन सेवा मिलने से वैष्णो देवी दर्शनार्थियों को भारी-भरकम सामान के साथ एक ट्रेन से उतरकर दूसरी ट्रेन में चढ़ने की जद्दोजहद से निजात मिल गई है। खासकर बुजुर्गों, महिलाओं और छोटे बच्चों के साथ यात्रा करने वाले परिवारों के लिए यह व्यवस्था किसी वरदान से कम नहीं है। इस सीधी रेल सेवा के शुरू होने से न केवल यात्रा का समय और थकान बचेगी, बल्कि पश्चिमी राजस्थान से जम्मू-कश्मीर के इस प्रमुख धार्मिक स्थल तक पर्यटन और यात्रा को भी बढ़ावा मिलेगा।












