अबतक इंडिया न्यूज देशनोक 6 सितंबर । देशनोक नगरपालिका चुनाव अब सियासी रंग से सरोबर हो चुका हैं ।देशनोक की सियासत इस बार अलग रंगत में हैं।चुनावी समर में उतरा हर प्रत्याशी भले ही अपनी जीत का दंभ भर रहा हो लेकिन रिश्तों की बागडोर को संभालना इसबार बेहद चुनौतीपूर्ण होगा। सियासी समीकरणों में भले ही बाजी कोई मारे लेकिन रिश्तों की डोर चटक सकती हैं।कई वार्डो में इसबार भाई से भाई का मुकाबला हैं,तो कहीं सास -बहू आमने-सामने ताल ठोक रही हैं। कहीं शिष्य अपने ही गुरु को चुनौती दे रहा हैं ,तो कहीं ननद अपनी ही भाभी को शिकस्त देने पर आमदा हैं। मां करणी की इस पावन धरा पर इस बार हार-जीत से मां करणी में अगाध आस्था रखने वाले करणी भक्तों की सच्ची श्रद्धा व पाखंडता भी न्याय व अन्याय की कसौटी पर होगा।
सियासत में रिश्तें या रिश्तों में सियासत ..?..मुकाबला रोचक
हार-जीत से परे इसबार का देशनोक पालिका चुनाव रिश्तों का नाजुक समीकरण बिगाड़ सकता है।क्योंकि चुनावी हार-जीत की कड़वाहट से बिगड़े नाजुक रिश्तों को फिर से संजोना बड़ी चुनौती होगी।
गुरु-शिष्य: वार्ड नं दो में कांग्रेस से बागी होकर भाजपा से ताल ठोकने वाले वरिष्ठ प्रत्याशी मेघ दान का मुकाबला इसबार अपने ही लाडले राजनीतिक शिष्य कैलाश बोर्ड हैं।इस गुरु-शिष्य के सियासी मुकाबले पर सभी की नजरें टिकी हैं।
सास-बहू: वार्ड नं सात में इसबार चारण समाज की दो महिलाओं में सियासी मुकाबला हैं।दोनों ही रिश्ते में सास-बहू हैं।भले ही सियासी दल अलग-अलग हो लेकिन रिश्तों की बागडोर एक हैं।पूरे वार्ड में सास-बहू का सियासी मुकाबला खूब सुर्खियां बटोर रहा हैं।सियासी व सामाजिक रिश्तों में कौन बाजी मारता हैं,यह तो परिणाम ही बतायेगा।
ननद-भाभी : वार्ड नं 14 में भी कुछ ऐसा ही नजारा हैं।यहां तो मामला और भी रोमांचक हैं।दोनों प्रत्याशी महिलाएं जहाँ रिश्तों में ननद-भौजाई हैं वहीं दोनों के प्रतिनिधि स्थानीय भाजपा-कांग्रेस के मुखिया हैं।दोनों ही ब्राह्मण समाज से हैं।वार्ड में ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या भी अच्छी -खासी हैं।यहां निर्णायक कौनसा जातीय समीकरण होगा ,यह भी बेहद अहम होगा । वार्ड में विश्वकर्मा समाज के मतदाता भी निर्णायक संख्या में हैं।इसी वार्ड में देशनोक नगरपालिका की प्रथम महिला चेयरमैन का आवास हैं,जो स्वयं विश्वकर्मा समाज से हैं।प्रथम महिला चेयरमैन श्री मती सुशीला सुथार सक्रिय राजनीति में संगठन स्तर पर भाजपा में कई महत्वपूर्ण पदों पर रह चुकी हैं।भाजपा में जिला स्तर पर मजबूत महिला सशक्तिकरण का चेहरा हैं।
भाई -भाई: वार्ड नं 23 में दोनों ही प्रत्याशी चारण समाज से हैं।पारिवारिक दृष्टिकोण से भाई-भाई हैं।कांग्रेस प्रत्याशी जगदीश दान जहाँ एक ओर मंझे हुए राजनेता हैं ,वहीं दूसरी ओर श्याम सिंह लोकप्रिय युवा चेहरा हैं। नए विजन व बेदाग व्यक्तित्व के साथ सियासी समर में हैं।उनकी युवा मंडली सटीक रणनीति व आज की तकनीक से लैस हैं। वार्ड में वैश्य,खत्री,भार्गव व चारण समाज के साथ-साथ यहां तेली समाज के मतदाता भी निर्णायक भूमिका में हैं।इस युवा नेता को इसी वार्ड के कई पूर्व पार्षदों का भी आशीर्वाद प्राप्त हैं। मुकाबला भले ही नए राजनेता बनाम मंझा हुआ राजनेता हो लेकिन यहां युवा इतिहास रचने को आतुर हैं।
देशनोक में इस बार पालिका चुनाव की रंगत और रौनक बेहद रोचक रहने वाली हैं।कौन इतिहास रचेगा और कौन इतिहास के पन्नों में सीमित होगा ,यह तो आनेवाला वक्त ही बतायेगा।












