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विश्व पर्यावरण दिवस :”लिटिल स्टार” सिद्धार्थ के पर्यावरण संरक्षण के इतिहास में छोटी उम्र में बड़े रिकॉर्ड

अबतक इंडिया न्यूज 5 जून जोधपुर। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जोधपुर जिले के सोढो की ढाणी, कालीबेरी निवासी मात्र 6 वर्षीय बाल प्रतिभा सिद्धार्थ सिंह पर्यावरण संरक्षण, भारतीय संस्कृति और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में अपनी अनूठी पहचान बना चुके हैं। 5 नवम्बर 2019 को जन्मे सिद्धार्थ वर्तमान में कक्षा द्वितीय के छात्र हैं, लेकिन उनकी उपलब्धियां उनकी उम्र से कहीं अधिक बड़ी हैं।

जोधपुर के ग्रामीण क्षेत्रों तथा पत्थर उत्खनन प्रभावित इलाकों में पौधारोपण और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने का कार्य सिद्धार्थ लगातार कर रहे हैं। बढ़ते ग्लोबल वार्मिंग और पर्यावरणीय चुनौतियों के बीच उनका संदेश है कि प्रकृति संरक्षण प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। इसके साथ ही वे भारतीय युवाओं में बढ़ते पाश्चात्य प्रभाव के बीच स्थानीय संस्कृति, परंपराओं और भारतीय मूल्यों को बढ़ावा देने का भी प्रयास कर रहे हैं।

सिद्धार्थ सिंह को पर्यावरण, संस्कृति और सामाजिक सरोकारों के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए देशभर की अनेक संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें ग्लोबल ग्रीन अवार्ड, ग्रीन आइडल अवार्ड, जोधाणा रत्न अवार्ड, राष्ट्र रत्न अवार्ड, इंडियाज़ क्यूट किड्स अवार्ड, एशिया प्राइड अवार्ड, राजस्थान रत्न फिल्म फेयर अवार्ड सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया है।

विशेष उपलब्धि के रूप में सिद्धार्थ ने 74वें गणतंत्र दिवस पर जोधपुर जिला प्रशासन द्वारा जिला स्तर पर सम्मानित होने वाले सबसे कम उम्र के प्रतिभागी के रूप में रिकॉर्ड स्थापित किया। इसके अतिरिक्त जोधपुर डिस्कॉम द्वारा संभाग स्तर पर भी उन्हें सम्मानित किया जा चुका है।

उनका नाम राजस्थान बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, एपेक्स इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, गोल्डन बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, इंटरनेशनल बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स, लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स, ओएमजी बुक ऑफ रिकॉर्ड्स तथा एक्सक्लूसिव वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स सहित अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड पुस्तकों में दर्ज है।

सिद्धार्थ की उपलब्धियों को विभिन्न राष्ट्रीय समाचार पत्रों, पत्रिकाओं और सामाजिक संस्थाओं ने भी प्रमुखता से स्थान दिया है। प्रसिद्ध बाल पत्रिका लोटपोट में उनकी कवर स्टोरी प्रकाशित हो चुकी है। इसके अलावा उन्हें अनेक धार्मिक, सामाजिक और शैक्षणिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया गया है।

देश के कई संत-महात्माओं, जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और गणमान्य व्यक्तियों ने भी सिद्धार्थ की प्रतिभा और सामाजिक योगदान की सराहना की है। पर्यावरण संरक्षण और भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार के लिए उनका समर्पण अन्य बच्चों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन रहा है।

विश्व पर्यावरण दिवस पर सिद्धार्थ सिंह का संदेश है कि “यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल करे, तो आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण मिल सकता है।”

कम उम्र में असाधारण उपलब्धियां हासिल करने वाले सिद्धार्थ सिंह आज पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक जागरूकता और भारतीय संस्कृति के युवा प्रतीक के रूप में उभर रहे हैं।

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