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देशनोक नगरपालिका में ₹2.84 करोड़ का बड़ा घोटाला: ईओ रविन्द्र सिंह की रिपोर्ट पर एसपी के निर्देश से एफआईआर दर्ज, एएसपी करेंगे मामले की जांच

देशनोक नगरपालिका

अबतक इंडिया न्यूज देशनोक 8 अक्टूबर । देशनोक नगर पालिका में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत करीब ₹2,83,80,000 (दो करोड़ तिरासी लाख अस्सी हजार रुपये) के गबन के बड़े मामले में पुलिस ने सख्त रुख अपनाया है। नगर पालिका के अधिशाषी  अधिकारी (ईओ) रविन्द्र सिंह ने बीकानेर पुलिस अधीक्षक (एसपी) मृदुल कच्छावा से मुलाकात कर पूरे फर्जीवाड़े की विस्तृत जानकारी दी। एसपी मृदुल कच्छावा के कड़े निर्देशों के बाद देशनोक थाने में आरोपी निलंबित कार्मिक सुरेंद्र सिंह टिण्डल के खिलाफ नामजद आपराधिक मामला दर्ज कर लिया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) बनवारी लाल मीणा को सौंपी गई है।

शारदीय नवरात्रा
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रिश्तेदारों, सफाई कर्मी के परिजनों व दोस्तों के खातों में जमा कराएं लाखों रुपये

जांच के दौरान यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि आरोपी कार्मिक सुरेंद्र सिंह टिण्डल ने केवल अपनी पत्नी और परिवार के सदस्यों के खातों में ही पैसे ट्रांसफर नहीं किए, बल्कि अपने रिश्तेदारों, एक सफाई कर्मी के परिवार के सदस्यों तथा कई दोस्तों व परिचितों के खातों में भी फर्जी तरीके से लाखों रुपये का भुगतान ट्रांसफर किया। फर्जीवाड़े के लिए उसने स्कैन/जाली हस्ताक्षरों (जाली साइन) का सहारा लेकर करीब 3 करोड़ रुपये के कुल 49 फर्जी बिल तैयार किए थे।

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84 लाख जमा कराए, ₹2 करोड़ (1.99 करोड़) की वसूली अभी बाकी

नगरपालिका प्रशासन द्वारा फर्जी बिलों का मामला सामने आने के बाद जब दबाव बनाया गया, तो आरोपी सुरेंद्र सिंह टिण्डल ने 22 जुलाई 2026 को ₹84 लाख की राशि बैंक में जमा करवा दी थी। लेकिन विस्तृत जांच रिपोर्ट में कुल गबन की राशि ₹2,83,80,000 पाई गई, जिसके बाद अब भी ₹1,99,80,000 (एक करोड़ निन्यानवे लाख अस्सी हजार रुपये) की भारी राशि राजकीय कोष में जमा कराई जानी बाकी है।

लगातार लीपापोती और व्यवस्था पर खड़े होते गंभीर सवाल

यह फर्जीवाड़ा किसी एक दिन का नहीं, बल्कि लंबे समय से लगातार अंजाम दिया जा रहा था। इससे पहले भी इस संबंध में कई बार शिकायतें सामने आईं, लेकिन हर बार मामले को दबाने और लीपापोती करने का प्रयास किया गया। इतनी लंबी अवधि तक मामला उजागर न होना प्रशासनिक तंत्र और निगरानी व्यवस्था पर कई बड़े सवाल खड़े करता है।

अकेले कर्मचारी का काम नहीं, कई स्थानीय लोग और अधिकारी शक के घेरे में

इतने बड़े पैमाने पर करोड़ों रुपये का घोटाला कोई एक अकेला कर्मचारी बिना किसी शह या मिलीभगत के नहीं कर सकता। इस बात की पूरी संभावना जताई जा रही है कि इस फर्जीवाड़े के तार कई अन्य जिम्मेदार लोगों से भी जुड़े हुए हैं। वर्तमान में कई स्थानीय लोग और विभाग के अन्य लोग भी पुलिस जांच के शक के दायरे में हैं। एएसपी बनवारी लाल मीणा की जांच के बाद इस घोटाले में शामिल कई अन्य बड़े चेहरे भी बेनकाब हो सकते हैं।

आवेदन स्वीकृति के नाम पर भी चला अवैध वसूली का खेल 

पीएम आवास योजना में लाभार्थियों के आवेदन स्वीकृत करवाने के नाम पर भी अवैध वसूली का खेल जमकर चला था। पिछले पालिका बोर्ड में तो बकायदा इसके तथाकथित “एजेंट ” आवेदन स्वीकृति ठेका लेते थे. लाभार्थी को बिल्डिंग मटेरियल तक “विशेष ” से लेने के लिए मजबूर किया जाता था। चार वर्षों से अधिक समय तक चले इस तथाकथित अवैध वसूली की भी गहन जांच होनी चाहिए। इस “खेल ” में गरीबों से करोड़ों की अवैध वसूली की शिकायतें व खबरें भी मीडिया में खूब चर्चित रही थी। राजनीतिक स्वार्थपूर्ति हेतु अपने चहेतों को खुलकर लाभ पहुंचाया गया। योजना के  पात्र लाभार्थी आज भी पालिका के चक्कर काट रहे हैं। भ्रष्टाचार के आरोपी कर्मियों के शान में लिखित पत्र जारी कर तारीफों के पुल बांधे गए थे।

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