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जोधपुर रेल मंडल ने कबाड़ के ढेर से जुटाए 51.88 करोड़ रुपए

जोधपुर रेल मंडल

अबतक इंडिया न्यूज 30 अक्टूबर जोधपुर। रेलवे के लिए अनुपयोगी हो चुकी सामग्री अब कमाई का जरिया बन रही है। रेलवे परिसरों में जगह घेरने वाला पुराना कबाड़ ई-नीलामी के जरिए करोड़ों रुपए का राजस्व दे रहा है। पुरानी रेल पटरियों सहित अनुपयोगी सामग्री की बिक्री से रेलवे को अतिरिक्त आय हो रही है। साथ ही परिसरों में जगह खाली होने और सामग्री के पुनर्चक्रण को भी बढ़ावा मिल रहा है।

मंडल रेल प्रबंधक अनुराग त्रिपाठी ने बताया कि उत्तर पश्चिम रेलवे के जोधपुर मंडल ने चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से अक्टूबर तक सात माह के दौरान 13 हजार 976 मीट्रिक टन कबाड़ का निस्तारण कर 51.88 करोड़ रुपए अर्जित किए हैं। वहीं शुक्रवार को हुई ई-नीलामी में भी 21 लॉट की सफल बिक्री से 6.30 करोड़ रुपए का राजस्व मिला। इस दौरान 1778.791 मीट्रिक टन सामग्री का निस्तारण किया गया।

जोधपुर रेल मंडल
जोधपुर रेल मंडल

त्रिपाठी ने बताया कि रेलवे बोर्ड ने अक्टूबर माह में उत्तर पश्चिम रेलवे को कबाड़ निस्तारण से 33 करोड़ रुपए राजस्व अर्जित करने का लक्ष्य दिया था। इसके मुकाबले अकेले जोधपुर मंडल ने अक्टूबर में 20.26 करोड़ रुपए का राजस्व जुटाया। यह पूरे जोन के निर्धारित लक्ष्य का करीब 60 प्रतिशत है। इस उपलब्धि के साथ जोधपुर मंडल अक्टूबर में कबाड़ निस्तारण से राजस्व अर्जित करने में जोन में पहले स्थान पर रहा।

उन्होंने बताया कि अनुपयोगी सामग्री को चिह्नित कर नियमित रूप से ई-नीलामी की जा रही है। इससे सामग्री का बेहतर मूल्य मिलने के साथ रेलवे परिसरों को व्यवस्थित रखने में भी मदद मिल रही है।

पुरानी पटरियों सहित अनुपयोगी सामग्री की नीलामी

रेलवे के कबाड़ में मुख्यतः पुरानी रेल पटरियों सहित कई तरह की अनुपयोगी सामग्री शामिल होती है। उपयोग के योग्य नहीं रहने पर इन्हें चिह्नित कर नीलामी में रखा जाता है। खरीदार इनका पुनर्चक्रण कर दोबारा उपयोग में लेते हैं। इस तरह अनुपयोगी सामग्री से राजस्व मिलने के साथ रेलवे परिसरों में जगह भी खाली होती है।

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