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संभाग स्तरीय किशोर न्याय आयोग गठित, संभागीय आयुक्त विश्राम मीणा बने अध्यक्ष

बीकानेर संभाग स्तरीय किशोर न्याय आयोग गठित

अबतक इंडिया न्यूज बीकानेर 5 नवंबर । बाल संरक्षण संस्थानों में निवासरत बच्चों की समुचित देखभाल, शिक्षा, कौशल विकास और सुरक्षित पुनर्वास सुनिश्चित करने की दिशा में राजस्थान उच्च न्यायालय के निर्देशों की अनुपालना में संभाग स्तरीय किशोर न्याय आयोग का गठन किया गया है। आयोग की पहली बैठक गुरुवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कार्यालय के सभागार में संभागीय आयुक्त एवं आयोग के अध्यक्ष विश्राम मीणा की अध्यक्षता में संपन्न हुई।

बीकानेर संभाग स्तरीय किशोर न्याय आयोग गठित
बीकानेर संभाग स्तरीय किशोर न्याय आयोग गठित

बैठक में बच्चों के सर्वांगीण विकास, बाल संरक्षण गृहों की नियमित निगरानी, करियर काउंसलिंग, सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने तथा संबंधित विभागों के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित करने को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।

समाज की मुख्यधारा से जोड़ना आयोग की प्राथमिकता: विश्राम मीणा

संभागीय आयुक्त विश्राम मीणा ने आयोग की प्राथमिकताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बालिका गृह, शिशु गृह, संप्रेषण गृह और किशोर सुधार गृह में रह रहे बच्चों का मानसिक व सामाजिक विकास हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। बच्चों को विभिन्न सरकारी योजनाओं से जोड़ने के साथ-साथ कौशल विकास, रोजगार सहायता और सुरक्षित पुनर्वास की व्यवस्था की जाएगी, ताकि वे आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन जी सकें।

उन्होंने बताया कि आयोग में बाल अधिकारिता विभाग, आरएसएलडीसी (RSLDC), आईटीआई कॉलेज और माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों को शामिल किया जाएगा। आयोग के सदस्य बीकानेर, हनुमानगढ़, चूरू एवं श्रीगंगानगर जिलों के बाल गृहों का समय-समय पर निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की निगरानी करेंगे।

बेहतर विभागीय समन्वय और करियर काउंसलिंग पर बल

  • अधिकारों व जिम्मेदारियों का स्पष्ट निर्धारण: आयोग के सह-अध्यक्ष एवं जिला व सत्र न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम न्यायालय) डॉ. अमित कुमार कड़वासरा ने कहा कि सभी स्टेकहोल्डर्स के बीच बेहतर समन्वय होना आवश्यक है, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ हर पात्र बच्चे तक बिना किसी बाधा के पहुंचे।
  • वैज्ञानिक करियर काउंसलिंग: सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुरेंद्र वर्मा ने सुझाव दिया कि बच्चों की मानसिक क्षमता व रुचि के अनुसार उनकी करियर काउंसलिंग कराई जाए।
  • सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में पालना गृह: बाल कल्याण समिति के सदस्यों (श्रीमती हाजरा बानो व श्री जन्मेजय व्यास) ने ब्लॉक स्तर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) पर भी पालना गृह स्थापित करने का लिखित सुझाव दिया, जिससे लावारिस नवजात शिशुओं की तुरंत जीवन रक्षा की जा सके।

 निरीक्षण रिपोर्ट और सूचना प्रेषण के निर्देश

आयोग अध्यक्ष ने निर्देश दिए कि आयोग के गठन की जानकारी किशोर न्याय बोर्ड, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बाल कल्याण समितियों, जिला कलेक्टर एवं पुलिस प्रशासन को प्रेषित की जाए। साथ ही बीकानेर संभाग के चारों जिलों से निर्धारित प्रारूप में प्राप्त निरीक्षण रिपोर्टों का अधिकतम दो पृष्ठों का संक्षिप्त सार आयोग के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।

बैठक में उपस्थिति:

इस दौरान जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की कार्यवाहक सचिव श्रीमती इंदु चौधरी, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के संयुक्त निदेशक मनोज गहलोत, मनोचिकित्सा विभाग के सह आचार्य डॉ. राकेश गढ़वाल सहित कई अधिकारी व समिति सदस्य उपस्थित रहे।

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