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एक ठेकेदार की जी-हुजूरी में बिगड़ी देशनोक की पेयजल व्यवस्था ,बूंद-बूंद को तरसे कस्बेवासी,निर्जला एकादशी पर देशनोक हुआ “निर्जल”

अबतक इंडिया न्यूज 25 जून देशनोक । एक ठेकेदार की लापरवाही के कारण दस दिनों से धर्मनगरी देशनोक के निवासी पानी की  बूंद-बूंद के लिए तरसने के लिए मजबूर हो गए हैं।स्थानीय प्रशासन ठेकेदार के तथाकथित रसूख के आगे इस कदर नतमस्तक हो गया हैं कि उन्हें आमजन की पेयजल किल्लत जैसी अति आवश्यक सेवा भी गौण नजर आने लगी हैं।जनधन से सरकारी तनख्वाह लेनेवालों की ठेकेदार के प्रति “सहानुभूति” पर आमजन में विशेष चर्चा का विषय बन गया हैं।
   निर्माण के नाम ठेकेदार फर्म ने कईबार पेयजल सप्लाई की लाइन तोड़कर पेयजल किल्लत की गंभीर समस्या पैदा की हैं।हरबार दस से पंद्रह दिनों तक कस्बे की पेयजल व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हुई हैं।वर्तमान में कस्बे के हृदय स्थल की पेयजल व्यवस्था दस दिनों से एक ठेकेदार फर्म की मनमर्जी व स्थानीय प्रशासन की घोर लापरवाही के कारण  ठप हैं।स्थानीय प्रशासन का कोई भी विभाग ठेकेदार के खिलाफ उचित कार्यवाही करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा हैं।आखिर यह रिश्ता क्या हैं…? निजहित…रसूख का खौफ…या कुछ और…?
सरकार की छवि हो रही धूमिल
स्थानीय विभागों की कार्यशैली में ठेकेदारों के प्रति “नरम रवैया” से सरकार की छवि धूमिल हो रही हैं। देशनोक में कहने को सेवा शिविर चल रहा हैं।लेकिन निदान पेयजल व बिजली जैसी अति आवश्यक आम समस्या तक का नहीं हो पा रहा हैं।सरकार ने जिस मंशा के साथ आमजन के हितार्थ यह शिविर शुरू किया गया  स्थानीय सरकारी नुमाइंदों ने तो सरकार की उसी मंशा को ताक पर रख दिया हैं।इनके इसी रवैये व कार्यशैली के कारण आमजन में अबतक जो संदेश गया हैं,वो कतई भी सकारात्मक नहीं हैं।आखिर किसके इशारे पर देशनोक वासियों की बिजली-पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं को समस्याओं में झोंका गया हैं..?

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