अबतक इंडिया न्यूज 13 सितंबर । देशनोक पालिका चूनाव के मतदान समाप्ति के बाद सियासी हार -जीत की चर्चाएं जोरों पर हैं.चौपलों से लेकर गली -नुक्कड़ तक वार्ड से लेकर चेयरमैन तक की चर्चाओं का दौर चरम पर हैं। स्वयंभु घोषित राजनीतिक पंडितों में खूब हॉट टॉक डिसकशन जारी हैं। कहीं कांग्रेस तो कहीं भाजपा के हार -जीत के समीकरण खंगाले जा रहे हैं। इन तमाम चर्चाओं में ” भगवा सत्ता “ की आहट सुनाई दे रही हैं।इसके भी कई बड़े व मजबूत कारण हैं। स्थानीय “पंजे ” वाले न तो समझ पाए , न ही आंकलन कर पाए। एक बड़ी मशहूर कहावत हैं ” अब पछताए क्या होत, जब चिड़िया चुग गई खेत “।
आमजन में आमतौर पर ” घमंडी “ को रावण व कंस के घमंड के दुष्परिणामों से चेताया जाता हैं। लेकिन कलयुगी घमंडी को कहां अपनी आलोचनाएं पसंद आती हैं। उसे तो केवल तथाकथित तारीफें पसंद आती हैं। यहीं से पतन की पटकथा का आगाज होता हैं, जो उसे जमीनी हकीकत से रूबरू करवाता हैं। इतनी सी प्रचलित व स्थापित बुनियादी बात स्थानीय कांग्रेसी बंधु नहीं समझ पाए। घमंड में चूर होकर अपने ही हाथों से अपनी हार की पटकथा लिख डाली।
जन आस्था से खिलवाड़ के कारण ऐतिहासिक दुष्परिणाम की आहट
देशनोक करणी माता मंदिर व तेमड़ा राय मंदिर को जोड़ने वाले प्रमुख आस्था मार्ग पर कीचड़ का दरिया बना दिया। करणी भक्तों को कीचड़ से होकर गुजरने पर मजबूर कर दिया। घमंडी यहीं नहीं रुका, एक कदम और आगे बढ़ते हुए अंतिम शवयात्रा तक को कीचड़ से होकर गुजरने पर मजबूर कर दिया। अपने चहेते एक “विशेष ” परिवार के परिजन की अंतिम शवयात्रा के लिए चंद घंटो में कीचड़ का दरिया हटाने के लिए तमाम सरकारी तामझाम का दुरूपयोग कर शुद्ध रेत बिछाकर मार्ग सुगम कर दिया। जबकि बाकी सभी अंतिम शवयात्राओं के लिए इनके कानो पर जूँ तक नहीं रेंगी। जनविश्वास व जन आस्था से ऐसे खिलवाड़ का उदाहरण तो किसी ने आज तक नहीं देखा। सत्ता के घमंड की इंतहा तो तब हुई जब एक धन्ना सेठ को ” खुश ” करने के लिए मां करणी की आराध्य देवी तेमड़ा राय के मंदिर मार्ग का स्थापित ऐतिहासिक नाम तक बदलने का षड्यंत्र रच डाला। इन सबको देशनोक की जनता आक्रोश व खामोशी के साथ देख रही थी ।
कांग्रेस के जीत के दावों के बीच आमजन में भाजपा की जीत की चर्चा जोरो पर हैं।चुनाव प्रचार के दौरान मतदाताओं की ख़ामोशी मतदान के बाद अब खुलकर सामने आने लगी हैं। पूर्व पालिकाध्यक्ष मुंधड़ा के भ्रष्टाचार की चर्चा अब स्थानीय चुनावी चर्चा में सुर्खियां बटोर रही हैं।
पीएम आवास योजना में भ्रष्टाचार व राजनीतिक भेदभाव
पीएम आवास योजना में खुलकर भ्रष्टाचार किया गया । एक बिल्डिंग मेटेरियल विक्रेता को इसका बाकायदा जिम्मा सौपने का आरोप लगा । सेवा शुल्क वसूली के साथ -साथ बिल्डिंग मेटेरियल भी उसी से खरीदने पर लोगों को मजबूर किया गया ।












