देशनोक: संघर्ष, समर्पण और अटूट हौसले की बदौलत देशनोक की बेटी गरिमा चारण ने एक नई मिसाल कायम की है। बीकानेर के महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय से कंप्यूटर साइंस विषय में अपना पीएचडी शोध कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण कर गरिमा ने देशनोक कस्बे की पहली महिला शोधार्थी बनने का गौरव प्राप्त किया है, जिसने इस कठिन विषय में यह उपलब्धि हासिल की है। हाल ही में उनका अंतिम मौखिक परीक्षण (वाइवा-वोसे) सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
डीप लर्निंग से स्तन कैंसर की सटीक पहचान पर किया शोध
गरिमा ने अपना शोध कार्य डॉ. ज्योति लखानी के निर्देशन में “Design and Development of a Predictive Model Based on Deep Learning for Breast Cancer Detection” विषय पर पूरा किया है। उनके इस शोध का मुख्य उद्देश्य डीप लर्निंग (AI) तकनीकों के जरिए मैमोग्राफी चित्रों का विश्लेषण कर स्तन कैंसर की प्रारंभिक और बेहद सटीक पहचान के लिए एक प्रभावी मॉडल विकसित करना है, जो चिकित्सा क्षेत्र में मील का पत्थर साबित हो सकता है।
मां के संघर्षों से मिली सफलता की उड़ान
गरिमा की यह सफलता सिर्फ एक शैक्षणिक उपलब्धि नहीं, बल्कि एक परिवार के संघर्षों की जीत है। सिर से पिता का साया उठ जाने के बाद उनकी माता श्रीमती गुलाब कँवर ने परिवार की कमान संभाली और दोनों बच्चों को उच्च संस्कारों व शिक्षा से सींचा। उनकी इसी मजबूती का परिणाम है कि गरिमा का भाई आज भारतीय वायु सेना में ‘फ्लाइट लेफ्टिनेंट’ के पद पर देश की सेवा कर रहा है, वहीं गरिमा ने शिक्षा के क्षेत्र में नया इतिहास रच दिया है।
गाइड और परिवार का जताया आभार
अपनी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर गरिमा ने अपनी शोध निर्देशिका डॉ. ज्योति लखानी के प्रति गहरा आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके निरंतर मार्गदर्शन और प्रेरणा से ही यह संभव हो पाया। साथ ही उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपनी माता, परिवारजनों और शुभचिंतकों को दिया। गरिमा की इस स्वर्णिम सफलता पर क्षेत्रवासियों, शिक्षकों और परिजनों ने हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।











