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राजस्थान पंचायत-निकाय चुनावी रण में मायावती की एंट्री

अबतक इंडिया न्यूज जयपुर 31 जुलाई । राजस्थान की  राजनीति  में पंचायत और निकाय चुनावों की आहट के साथ ही राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. सभी पार्टियां संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को चुनावी मोड में लाने में जुटे हैं. इसी कड़ी में अब बहुजन समाज पार्टी ने भी चुनावी तैयारियों का बिगुल फूंक दिया है. 23 अगस्त को जयपुर के बिड़ला ऑडिटोरियम में BSP का कार्यकर्ता महासम्मेलन और संगठन समीक्षा कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा. इस कार्यक्रम में पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद मुख्य अतिथि होंगे और प्रदेशभर से बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं के शामिल होने का दावा किया जा रहा है.

पार्टी संगठन को कर रहे हैं मजबूत

बीएसपी का कहना है कि यह सिर्फ कार्यकर्ता सम्मेलन नहीं बल्कि पंचायत निकाय चुनावों की रणनीति तय करने वाला होगा. प्रदेश प्रभारी भगवान सिंह बाबा के अनुसार संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है. पार्टी का दावा है कि पंचायत और नगर निकाय चुनावों में BSP अपने दम पर मैदान में उतरेगी और अधिकतम सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी. इसके साथ ही संगठन विस्तार और नए कार्यकर्ताओं को जोड़ने पर भी फोकस रहेगा.

 

बीजेपी और कांग्रेस पर लगाया आरोप

बीएसपी नेतृत्व का आरोप है कि बीजेपी और कांग्रेस की नीतियों से आम लोग निराश हैं और इसी वजह से सर्वसमाज के लोग बड़ी संख्या में पार्टी से जुड़ रहे हैं. पार्टी खुद को राजस्थान में एक मजबूत तीसरे राजनीतिक विकल्प के रूप में पेश करने की कोशिश कर रही है. राजनीतिक जानकार मानते हैं कि पंचायत और निकाय चुनाव भले स्थानीय मुद्दों पर लड़े जाते हों, लेकिन इनके नतीजे प्रदेश की आगामी राजनीतिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं. ऐसे में BSP भी इस मौके को अपने जनाधार बढ़ाने के अवसर के रूप में देख रही है.

 

बहुकोणीय हो सकते हैं राजस्थान पंचायत और निकाय चुनाव

राजस्थान में इस बार पंचायत और निकाय चुनावों को लेकर मुकाबला बहुकोणीय होने के संकेत मिल रहे हैं. एक तरफ सत्ता में बीजेपी अपना संगठन मजबूत कर रही है तो दूसरी ओर कांग्रेस भी चुनावी तैयारियों में जुटी है. वहीं आरएलपी, एआईएमआईएम और अब BSP भी अपने-अपने वोट बैंक को साधने की कवायद तेज कर चुके हैं. बीएसपी के लिए 23 अगस्त का यह महासम्मेलन संगठनात्मक ताकत दिखाने के साथ-साथ चुनावी संदेश देने का भी बड़ा मंच माना जा रहा है. अब देखना होगा कि इस तैयारी चुनावी नतीजों में कितना असर दिखता है.

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