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मोदी सरकार Vs गांधी विचार… मनरेगा पर कल सड़कों पर उतरेगी कांग्रेस

अबतक इंडिया न्यूज 16 दिसंबर दिल्ली । केंद्र सरकार मनरेगा की जगह विकसित भारत-जी राम जी विधेयक-2025 लेकर आई है. कांग्रेस इसका विरोध कर रही है. इसे महात्मा गांधी के आदर्शों का अपमान बता रही है. साथ ही आरोप लगा रही है कि प्रधानमंत्री मोदी को राष्ट्रपिता के विचारों और गरीबों के अधिकारों से नफरत है. इस मामले पर जारी जुबानी जंग अब सड़क पर भी आने वाली है. कांग्रेस ने ऐलान किया है कि 17 दिसंबर को देशभर में जिला मुख्यालयों में विरोध प्रदर्शन करेगी. इसके अलावा 28 दिसंबर को कांग्रेस के स्थापना दिवस पर सभी मंडलों और गांवों में महात्मा गांधी की तस्वीरों के साथ कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिसमें कांग्रेस की श्रम की गरिमा, सामाजिक न्याय और काम के अधिकार के प्रति प्रतिबद्धता को दोहराया जाएगा.

कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने इस मुद्दे को लेकर एक पोस्ट में कहा, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को खत्म करने की सरकार की योजना के खिलाफ लड़ने के लिए कांग्रेस पार्टी 17 दिसंबर को सभी जिला मुख्यालयों पर देशव्यापी विरोध प्रदर्शन करेगी. इसके अलावा कांग्रेस के स्थापना दिवस 28 दिसंबर को हमारे पार्टी कार्यकर्ता हर मंडल और गांव में महात्मा गांधी जी की तस्वीरें लेकर कार्यक्रम आयोजित करेंगे. ताकि इस जनविरोधी कानून और बापू जी की विरासत पर सीधे हमले का विरोध किया जा सके.

मनरेगा ने लोगों को काम का अधिकार दिया है

उन्होंने कहा कि मनरेगा एक ऐतिहासिक कानून है, जिसने लोगों को काम का अधिकार दिया है. श्रम की गरिमा को बनाए रखा है और पूरे भारत में करोड़ों ग्रामीण परिवारों को आजीविका सुरक्षा प्रदान की है. हमारा संघर्ष किसी सामान्य बिल का विरोध करने के बारे में नहीं है, यह एक मुश्किल से मिले अधिकार की रक्षा करने और उन लाखों लोगों के साथ खड़े होने के बारे में है जिनकी जिंदगी, गरिमा और उम्मीद मनरेगा पर निर्भर करती है. कांग्रेस पार्टी महात्मा गांधी की भावना से और भारत के सबसे गरीब लोगों की रक्षा में इस लड़ाई का नेतृत्व करती रहेगी.

मोदी जी को दो चीजों से पक्की नफरत है

राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे को लेकर एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, मोदी जी को दो चीजों से पक्की नफरत है- महात्मा गांधी के विचारों से और गरीबों के अधिकारों से. मनरेगा महात्मा गांधी के ग्राम-स्वराज के सपने का जीवंत रूप है. करोड़ों ग्रामीणों की जिंदगी का सहारा है, जो कोविड काल में उनका आर्थिक सुरक्षा कवच भी साबित हुआ. मगर, प्रधानमंत्री मोदी को यह योजना हमेशा खटकती रही और पिछले दस सालों से इसे कमजोर करने की कोशिश करते रहे हैं.

मनरेगा का नामो-निशान मिटाने पर आमादा हैं प्रधानमंत्री

उन्होंने आरोप लगाया, आज प्रधानमंत्री मनरेगा का नामो-निशान मिटाने पर आमादा हैं. मनरेगा की बुनियाद तीन मूल विचारों पर थी. पहला यह कि रोजगार का अधिकार – जो भी काम मांगेगा, उसे काम मिलेग. दूसरा यह कि गांव को प्रगति कार्य खुद तय करने की स्वतंत्रता. तीसरा विचार था कि केंद्र सरकार मज़दूरी का पूरा खर्च और समान की लागत का 75 प्रतिशत देगी.

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