अबतक इंडिया न्यूज देशनोक 21 अक्टूबर । राजस्थान मरुधरा ग्रामीण बैंक (RMGB) की देशनोक शाखा को नए भवन में स्थानांतरित (शिफ्ट) करने की प्रक्रिया गंभीर विवादों और आरोपों के घेरे में आ गई है। बैंक प्रबंधन द्वारा विज्ञप्ति में तय की गई शर्तों को दरकिनार कर अवैध निर्माण वाले परिसर में बैंक शिफ्ट करने की मनमानी का मामला सामने आया है। इस प्रकरण में बैंक के उच्च अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है और क्षेत्रीय स्तर पर रसूखदार तथा जातिवादी दबाव के तहत नियमों की अनदेखी करने के आरोप लग रहे हैं।
बिना स्वीकृति और भू-उपयोग परिवर्तन के बन रहा भवन: नगर पालिका

नगर पालिका मण्डल देशनोक (बीकानेर) ने दिनांक 16.10.2026 को भवन मालिक जगदीश दान (पुत्र लुणदान) को नोटिस (क्रमांक 3224) जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। नगर पालिका के अनुसार, गोपाल मोहता की शिकायत (दिनांक 14.10.2026) पर यह कार्रवाई की गई है।
आरोप है कि आर.सी.सी. रोड स्थित आवासीय भूखंड पर बिना किसी आवश्यक निर्माण स्वीकृति और बिना भू-उपयोग परिवर्तन (Commercial Land Use Conversion) की अनुमति के ग्रामीण बैंक हेतु अवैध रूप से भवन निर्माण कराया गया है। नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी ने भवन स्वामी को 7 दिवस के भीतर पट्टा, स्वीकृत मानचित्र, निर्माण अनुमति और भू-उपयोग परिवर्तन से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने का अल्टीमेटम दिया है। इसकी एक प्रति शाखा प्रबंधक, राजस्थान मरुधरा ग्रामीण बैंक देशनोक को भी कार्रवाई हेतु भेजी गई है।
बैंक की अपनी ही निविदा शर्तों की उड़ रही धज्जियां

बैंक द्वारा समाचार पत्र में जारी आधिकारिक निविदा विज्ञप्ति के अनुसार:
- परिसर पूर्ण निर्मित या निर्माणाधीन वाणिज्यिक स्वीकृत (Commercial Approved) होना अनिवार्य था।
- परिसर में पर्याप्त पार्किंग स्थल और देशनोक शाखा हेतु लगभग 2150 (±10%) वर्ग फीट कार्पेट एरिया (प्राथमिकता ग्राउंड फ्लोर) की मांग की गई थी।
हालाँकि, ज़मीनी हकीकत इसके उलट है। जिस नए भवन में बैंक को शिफ्ट करने की प्रक्रिया तेज़ी से चलाई जा रही है, वह आवासीय भूखंड पर बिना कमर्शियल अनुमति के निर्मित है। इसके बावजूद बैंक अधिकारियों द्वारा सभी नियमों और अपनी ही निविदा शर्तों को ताक पर रखकर शिफ्टिंग को हरी झंडी दी जा रही है।
अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध, उठ रहे सवाल
स्थानीय लोगों और शिकायतकर्ताओं का कहना है कि बैंक के कुछ बड़े अधिकारियों की शह पर यह पूरा खेल चल रहा है। नियमों को ताक पर रखकर एक अवैध और गैर-व्यावसायिक भवन को किराए पर लेने के पीछे जातिवादी रसूख और सांठगांठ की बात खुलकर सामने आ रही है।
सवाल यह उठता है कि:
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जब बैंक की अपनी विज्ञप्ति में ‘वाणिज्यिक स्वीकृत’ परिसर की स्पष्ट शर्त थी, तो बिना लैंड-यूज़ चेंज वाले आवासीय भवन का चयन कैसे कर लिया गया?
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नगर पालिका से नोटिस मिलने के बाद भी बैंक के जिम्मेदार अधिकारी इस गलत प्रक्रिया को रोकने के बजाय शिफ्टिंग पर क्यों अड़े हुए हैं?
फिलहाल, नगर पालिका की नोटिस अवधि खत्म होने के बाद नियमानुसार आगामी कार्रवाई की जानी तय है, जिससे बैंक प्रबंधन और संबंधित भवन मालिक की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।












