अबतक इंडिया न्यूज 21 अक्टूबर कोलायत: कोलायत पंचायत समिति चुनाव के टिकट वितरण को लेकर उपजे सियासी घटनाक्रम ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि क्षेत्र की राजनीति में देवी सिंह भाटी और विधायक अंशुमान सिंह भाटी के रसूख को चुनौती देना दूसरों के लिए कोरी कल्पना साबित हुआ है। जो लोग पर्दे के पीछे रहकर पार्टी के भीतर समानांतर सत्ता चलाने और खुद को टिकटों का असली सर्वेसर्वा होने का दावा कर रहे थे, उन्हें भाटी परिवार ने सटीक राजनीतिक दांव से आईना दिखा दिया है।
दिखावे के दावे और भीतरघातियों की हकीकत बेनकाब
पिछले कई दिनों से यह अफवाहें फैलाई जा रही थी कि स्थानीय स्तर पर समानांतर केंद्र चला रहे कुछ नेता ही तय करेंगे कि किसे टिकट मिलेगा और किसे नहीं। कई दावेदारों को सिंबल के नाम पर झूठी उम्मीदें देकर बुलाया गया, जिससे दिनभर असमंजस का माहौल बना रहा। लेकिन जब टिकट वितरण की तस्वीर पूरी तरह साफ हुई, तो उन तथाकथित ‘ठेकेदारों’ के अरमानों पर पानी फेर दिया गया।
- टिकट के दावेदारों को निराशा: जिन लोगों ने अपने स्तर पर टिकट बांटने और शक्ति प्रदर्शन का भ्रम फैलाया था, वे अपने चहेतों को सिंबल तक नहीं दिला पाए। दोपहर ढलते ही उनके समर्थकों को बैरंग लौटना पड़ा।
- रद्द हुए पर्चे: बिना पुख्ता संगठन समर्थन के अतिउत्साह में आकर जिन लोगों ने पर्चे भरे थे, वे सिंबल न मिलने के कारण दौड़ से बाहर हो गए और उनके फॉर्म रद्द हो गए।
- पूर्व प्रधान की दावेदारी का हस्र: वार्ड नंबर 12 से खुद चुनाव लड़ने की चर्चाओं के बीच पूर्व प्रधान की जगह छैलू सिंह को टिकट मिलना, इस बात का स्पष्ट संकेत है कि कोलायत में अब केवल संगठन और विधायक के तयशुदा फैसलों की ही मान्यता है।
भाटी परिवार का संदेश: कोलायत में सर्वोपरि नेतृत्व
इस पूरी उठापटक ने विरोधी खेमे और भीतरघात करने वाले ‘जयचंदों’ को करारा संदेश दे दिया है कि कोलायत भाजपा में देवी सिंह भाटी के मार्गदर्शक व मजबूत राजनीतिक प्रभाव और विधायक अंशुमान सिंह भाटी के नेतृत्व के बिना पत्ता भी नहीं हिल सकता।
विधायक अंशुमान सिंह भाटी ने यह साबित कर दिया कि संगठन के भीतर कार्यकर्ताओं के हितों की रक्षा कैसे की जाती है। जय सिंह भाटी द्वारा सभी अधिकृत उम्मीदवारों के नामांकन दाखिल करवाने और खुद चुनाव लड़ने से पहले ही स्पष्ट मना कर देने ने यह दिखा दिया कि भाटी परिवार पद की लालसा से ऊपर उठकर पार्टी की मजबूती और कार्यकर्ताओं के सम्मान के लिए काम कर रहा है।
इस घटनाक्रम के बाद उन सभी राजनीतिक चेहरों के मुंह पर ताला लग गया है जो अंदरखाने पार्टी को कमजोर करने या अपना अलग पॉवर सेंटर बनाने की फिराक में थे।












