अबतक इंडिया न्यूज बीकानेर, 18 मार्च। राजस्थानी में उत्कृष्ट साहित्य-सृजन हो रहा है, युवा रचनाकार भी समसामयिक विषयों पर कलम चला रहे हैं तथा राजस्थानी भाषा-साहित्य का भविष्य उज्ज्वल है। राजस्थानी को संवैधानिक मान्यता मिलने से राजस्थानी भाषा का चहुंमुखी विकास होगा। ये विचार साहित्यकारों ने राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी की ओर से राजस्थान दिवस के उपलक्ष्य में बुधवार को अकादमी सभागार में आयोजित राजस्थानी संगोष्ठी ‘आधुनिक राजस्थानी साहित्य-दसा अर दिसा’ में व्यक्त किये।
वरिष्ठ साहित्यकार डाॅ. शंकरलाल स्वामी ने कहा कि राजस्थानी के वरिष्ठ व युवा रचनाकार निरंतर राजस्थानी भाषा-साहित्य के भंडार को समृद्ध कर रहे हैं। डाॅ. अजय जोशी ने कहा कि नयी पीढ़ी को राजस्थानी में लिखने-बोलने के साथ-साथ साहित्य सृजन हेतु प्रेरित-प्रोत्साहित किया जाए। कमल रंगा ने आधुनिक राजस्थानी साहित्य की विविध विधाओं में हो रहे लेखन कार्य की जानकारी देते हुए कहा कि साहित्यिक आलोचना व अनुवाद कार्य पर विशेष ध्यान दिया जाये। पृथ्वीराज रतनू ने बताया कि राजस्थानी साहित्य का समृद्ध इतिहास रहा है व राजस्थानी में आज भी बेहतरीन साहित्य रचा जा रहा है। राजेन्द्र जोशी ने कहा कि वर्तमान में राजस्थानी में जो सृजन कार्य हो रहा है, वह अन्य भारतीय भाषाओं के समकक्ष है। उन्होंने अधिकाधिक राजकीय विद्यालयों-महाविद्यालयों में राजस्थानी विषय शुरू किये जाने की आवश्यकता जताई। राजाराम स्वर्णकार ने कहा कि करोड़ों लोगों की मातृभाषा राजस्थानी को मान्यता मिलने से युवाओं को रोजगार के नये अवसर मिलेंगे। गोविंद जोशी ने कहा कि आधुनिक राजस्थानी साहित्यकारों ने सामाजिक विसंगतियों पर कलम चलाई है। डाॅ. कृष्णलाल बिश्नोई ने राजस्थानी कविता प्रस्तुत की। जुगल पुरोहित, सुभाष बिश्नोई, हरीशचंद्र शर्मा ने भी विचार व्यक्त किये।
अकादमी सचिव शरद केवलिया ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन करते हुए डाॅ. नमामीशंकर आचार्य ने राजस्थानी साहित्य के इतिहास की विस्तृत जानकारी दी। वरिष्ठ कवि राजेन्द्र स्वर्णकार ने राजस्थानी में सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। इस अवसर पर विशन मतवाला, गोपाल कुमार व्यास, अंजली टाक, केशव जोशी, श्रीनिवास थानवी, कानसिंह, मनोज मोदी, रोहित कुमार स्वामी, रेणु प्रजापत, दिव्या राजपुरोहित आदि उपस्थित थे।









