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युद्ध खत्म करने के लिए ईरान की नई मांग,पढ़ें पूरी खबर

अबतक इंडिया न्यूज 29 मार्च । ईरान ने युद्ध खत्म करने के लिए अपनी मांगों की लिस्ट में एक नई शर्त जोड़ी है। यह शर्त होर्मुज जलडमरूमध्य( strait ) पर ईरानी संप्रभुता को मान्यता देने की है। ईरान ने अमेरिका के 15 प्वाइंट के जवाब में जो शर्ते रखीं थी, उनमें यह बात नहीं थी। ईरान की ओर से बाद में यह नई शर्त जोड़ी गई है, जिससे उसे करोड़ों-अरबों डॉलर की कमाई हो सकती है। ईरान की ओर ये शर्त ऐसे समय आई है, जब उसने कुवैत और यूएई में नए सिरे से हमले किए हैं। वहीं यमन के हूती विद्रोहियों ने भी जंग में कूदते हुए इजरायल पर मिसाइल दागी है।

सीएनएन के मुताबिक, ईरानी अधिकारी ने अमेरिका के साथ युद्ध को खत्म करने के लिए मांगों की सूची पेश की तो इसमें होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की संप्रभुता को मान्यता देने की मांग जोड़ दी। इस संकरे जलमार्ग से दुनिया के गैस और तेल का बड़ा हिस्सा गुजरता है। यह समुद्री गलियारा युद्ध शुरू होने के बाद ईरान का सबसे शक्तिशाली हथियार बनकर उभरा है। ईरान अब इसे सालाना अरबों डॉलर की कमाई का जरिया और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव डालने का माध्यम बनाने की कोशिश कर रहा है।

ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स में मिडिल ईस्ट की प्रमुख दीना एस्फडियारी का कहना है कि ईरान भी इससे हैरान है कि उसकी होर्मुज रणनीति इतनी ज्यादा कामयाब रही है। इस युद्ध से उसे एक नया लीवरेज (ताकत) मिल गया है। संभावना है कि वह भविष्य में इसका फिर से इस्तेमाल करेगा। इस लीवरेज को ‘कैश’ करना इस बात को समझने का ही एक हिस्सा है कि उसके पास यह ताकत मौजूद है।

युद्ध के बाद आने वाली चुनौतियों में से एक होर्मुज में टोल सिस्टम लागू करने की तेहरान की कोशिश को रोकना है। यह गैर-कानूनी और दुनिया के लिए खतरनाक है। सुरक्षित और टोल-मुक्त नौवहन की स्वतंत्रता को बहाल करने की पूर्ण आवश्यकता पर जोर देना होगा।
मार्को रूबियो

अमेरिका की दिखी है बेचैनी

होर्मुज को लेकर अमेरिकी की चिंता दुनिया से छुपी नहीं है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने माना है कि युद्ध के बाद आने वाली तत्काल चुनौतियों में से एक होर्मुज में टोल सिस्टम लागू करने की तेहरान की कोशिशें होंगी। रूबियो ने कहा कि यह ना केवल गैर-कानूनी है बल्कि अस्वीकार्य भी है। दुनिया को इसका सामना करने के लिए एक योजना तैयार करनी होगी।

होर्मुज जलडमरूमध्य ( strait ) पर ईरान संकेत दे रहा है कि इस ताकत को औपचारिक रूप दिया जा सकता है। ईरानी सांसद ऐसे विधेयक पर विचार कर रहे हैं, जिसके तहत ईंधन और सामान की शिपिंग के लिए जलडमरूमध्य का इस्तेमाल करने वाले देशों को टोल देना अनिवार्य हो जाएगा। नई व्यवस्था तेहरान को अपने विरोधी देशों पर  समुद्री प्रतिबंध लगाने का अधिकार देगी।

कमाई में स्वेज नहर से मुकाबला

विशेषज्ञों को इस बात पर संदेह है कि ईरान कोई ऐसी टोल व्यवस्था लागू कर पाएगा, जिसे इंटरनेशनल स्तर पर स्वीकार किया जाए। हालांकि सीएनएन का मानना है कि ईरान अगर वह इसमें सफल हो जाता है तो इससे होने वाली कमाई मिस्र की ‘स्वेज नहर’ से होने वाली कमाई के बराबर हो सकती है।

ट्रांजिट फीस लगाना ट्रांजिट पैसेज के नियमों का उल्लंघन है। इंटरनेशनल कानून के तहत किसी तटीय देश के पास होर्मुज जैसी इंटरनेशनल जलसंधि में फीस वसूलने का कानूनी आधार नहीं है। होर्मुज जलसंधि का इस्तेमाल इंटरनेशनल नेविगेशन के लिए किया जाता है।
प्रोफेसर जेम्स क्रास्का

होर्मुज से हर दिन 2 करोड़ बैरल कच्चा तेल और तेल उत्पाद गुजरते हैं। यह 10 बहुत बड़े कच्चे तेल के टैंकरों (VLCCs) के बराबर होता है। हर टैंकर पर 20 लाख डॉलर की फीस लगाई जाती है तो सिर्फ तेल से ही हर दिन 2 करोड़ डॉलर यानी हर महीने लगभग 60 करोड़ डॉलर की कमाई हो सकती है।

ईरान टेल के साथ अगर LNG शिपमेंट से भी टोल लेगा तो उसकी कमाई का आंकड़ा बढ़कर हर महीने 800 मिलियन डॉलर से ज्यादा हो जाएगा। यह साल 2024 में ईरान के हर महीने होने वाली तेल निर्यात कमाई का 15 से 20 फीसदी तक है। मिस्र को देखा जाए तो वह एक साल में स्वेज नहर से हर महीने 700 से 800 मिलियन डॉलर के बीच कमाता है।

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