अबतक इंडिया न्यूज 15 सितंबर । देशनोक नगर पालिका में अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही सियासी और कानूनी हलचल तेज हो गई है। पूर्व पालिका अध्यक्ष और कांग्रेस के संभावित उम्मीदवार ओमप्रकाश मूंधड़ा को हाईकोर्ट से गिरफ्तारी पर स्टे मिलने के बाद कांग्रेस खेमे ने राहत की सांस ली है, लेकिन अध्यक्ष पद के लिए उनके नामांकन को लेकर सस्पेंस अब भी बना हुआ है।
नामांकन के पहले दिन कांग्रेस या भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में से किसी भी प्रत्याशी ने अध्यक्ष पद के लिए पर्चा दाखिल नहीं किया। चुनाव परिणामों में कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत हासिल हुआ है, जबकि भाजपा 7 सीटों और एक समर्थित निर्दलीय के साथ केवल 8 के आंकड़े तक ही सिमट गई है।
क्या है पूरा मामला?
एसीबी थाना सी.पी.एस. जयपुर में गत 2 सितंबर 2026 को ओमप्रकाश मुंधड़ा के खिलाफ एफआईआर संख्या 248/2026 दर्ज की गई थी। इसमें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत आरोप लगाया गया था कि 31 दिसंबर 2021 को उन्होंने अपने नाम से तीन पट्टे जारी किए थे।
अदालत का निर्देश

मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई तक ओमप्रकाश मुंधड़ा की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही अदालत ने याचिकाकर्ता को 28 सितंबर 2026 को सुबह 11:30 बजे जांच अधिकारी के समक्ष उपस्थित होकर जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 9 अक्टूबर 2026 तय की गई है, जिसमें एसीबी को पूछताछ और जांच की नवीनतम प्रगति रिपोर्ट पेश करनी होगी।
कानूनी पहलुओं की समीक्षा में जुटी कांग्रेस
बुधवार को नामांकन दाखिल करने का अंतिम दिन है। पर्चा भरने से पहले कांग्रेस मूंधड़ा को प्रत्याशी बनाने के हर संभावित कानूनी पहलू और विधिक पक्ष पर गहराई से विचार कर रही है। पार्षद पद का नामांकन दाखिल करने के बाद दर्ज हुए एसीबी पट्टा प्रकरण के कारण मूंधड़ा के अध्यक्ष पद के नामांकन पर कोई विधिक अड़चन आएगी या नहीं, यह वर्तमान में कस्बे में सबसे बड़ा चर्चा का विषय बना हुआ है।
अयोग्यता की लटकती तलवार
हाईकोर्ट के स्टे आर्डर से मूंधड़ा को फिलहाल फौरी राहत जरूर मिल गई है, लेकिन प्रकरण का अनुसंधान अभी जारी है। विधि विशेषज्ञों के अनुसार, यदि भविष्य में अदालत में मामले का चालान पेश होकर चार्ज फ्रेम होते हैं, तो मूंधड़ा की पार्षदी की योग्यता पर खतरा मंडरा सकता है। ऐसे में अयोग्यता की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, जिसे देखते हुए राजनीतिक दल फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं।












