अबतक इंडिया न्यूज 6 सितंबर देशनोक। नगर पालिका चुनाव को लेकर देशनोक में सियासी सरगर्मियां लगातार तेज होती जा रही हैं। प्रत्याशियों को चुनाव चिन्ह आवंटित होने के साथ ही अब चुनाव प्रचार ने औपचारिक रूप से जोर पकड़ लिया है। भाजपा, कांग्रेस और निर्दलीय प्रत्याशियों ने मतदाताओं तक पहुंच बनाने के लिए पूरी ताकत झोंकनी शुरू कर दी है।
चुनाव को लेकर भाजपा ने संगठनात्मक स्तर पर अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। भाजपा के कद्दावर नेता एवं पूर्व मंत्री देवी सिंह भाटी देशनोक पहुंचे और पार्टी पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं के साथ चुनावी रणनीति को लेकर मंथन किया। बैठक में प्रत्येक वार्ड में पार्टी की स्थिति, प्रत्याशियों की चुनावी संभावनाओं और जीत की रणनीति पर चर्चा होने की जानकारी सामने आई है।
वहीं कांग्रेस के पूर्व मंत्री भंवरसिंह भाटी भी देशनोक में लगातार सक्रिय नजर आ रहे हैं। उनके सघन जनसंपर्क दौरों से कांग्रेस ने भी चुनावी अभियान को गति दी है। दोनों प्रमुख दलों की सक्रियता के चलते मुकाबला अब लगातार रोचक होता जा रहा है।
अब अगले कुछ दिनों में प्रत्याशियों का जनसंपर्क अभियान और तेज होने की संभावना है। भाजपा और कांग्रेस के बड़े नेताओं की सक्रियता, ACB प्रकरण से जुड़े राजनीतिक विमर्श, विकास कार्यों और बदलते सामाजिक समीकरणों के बीच देशनोक नगर पालिका चुनाव का मुकाबला किस करवट बैठता है, यह आने वाले दिनों में और स्पष्ट होगा।
ACB प्रकरण के बाद बदला चुनावी माहौल
देशनोक पालिका से जुड़े ACB प्रकरण के बाद चुनावी चर्चा का एक प्रमुख मुद्दा राजनीतिक पारदर्शिता और स्थानीय निकाय में भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर भी बनता दिखाई दे रहा है। इसके साथ ही विकास कार्यों और शहर में हुए ढांचागत बदलाव को लेकर भी राजनीतिक दल अपनी-अपनी उपलब्धियां और दावे जनता के सामने रख रहे हैं। ऐसे में चुनावी मैदान में ‘भ्रष्टाचार बनाम विकास’ का नैरेटिव जोर पकड़ता दिखाई दे रहा है।पूर्व देशनोक पालिकाध्यक्ष के खिलाफ एसीबी की कार्यवाही के बाद भाजपा पालिका चुनाव में भ्रष्टाचार को बड़ा मुद्दा बनाने की तैयारी में दिख रही हैं।युवा विधायक अंशुमान सिंह भाटी अपने ढाई साल के कार्यकाल के दौरान किए गए विकास कार्यों की उपलब्धि के साथ चुनाव समर में हैं। वहीं कांग्रेस भ्रष्टाचार के शिकंजे में फंसे पूर्व पालिकाध्यक्ष मुंधड़ा के बचाव में उतरी हैं।भ्रष्टाचार बनाम विकास का मुद्दा अब परवान चढने लगा हैं।
जातीय समीकरणों पर भी नजर
देशनोक के चुनावी मुकाबले में बदलते जातीय समीकरणों ने भी राजनीतिक दलों की चिंता बढ़ाई है। अलग-अलग वार्डों में मतदाताओं के रुझान और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए प्रत्याशी एवं पार्टी संगठन अपनी रणनीति को लगातार अंतिम रूप दे रहे हैं। यही वजह है कि चुनावी माहौल में दिन-प्रतिदिन नए समीकरण बनते-बिगड़ते नजर आ रहे हैं।
चुनाव चिन्ह मिलते ही प्रचार अभियान तेज
सभी प्रत्याशियों को चुनाव चिन्ह आवंटित किए जाने के बाद चुनाव प्रचार का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। भाजपा और कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशियों के साथ निर्दलीय उम्मीदवार भी अब घर-घर संपर्क, बैठकों और जनसभाओं के जरिए मतदाताओं तक पहुंच बनाने में जुट गए हैं।
देशनोक में विभिन्न प्रत्याशियों के चुनावी कार्यालयों के उद्घाटन का दौर भी शुरू हो गया है। इसी क्रम में भाजपा ने नगर पालिका चुनाव के लिए अपना मुख्य चुनाव कार्यालय शुरू किया है । कार्यालय उद्घाटन के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह नजर आया और चुनावी अभियान को बूथ स्तर तक मजबूत करने पर जोर दिया गया।
अब अगले कुछ दिनों में प्रत्याशियों का जनसंपर्क अभियान और तेज होने की संभावना है। भाजपा और कांग्रेस के बड़े नेताओं की सक्रियता, ACB प्रकरण से जुड़े राजनीतिक विमर्श, विकास कार्यों और बदलते सामाजिक समीकरणों के बीच देशनोक नगर पालिका चुनाव का मुकाबला किस करवट बैठता है, यह आने वाले दिनों में और स्पष्ट होगा।












