अबतक इंडिया न्यूज 28 अगस्त देशनोक। ( लक्ष्मीनारायण शर्मा )देशनोक नगर पालिका चुनाव 2026 को लेकर कस्बे की राजनीति का पारा भले ही सातवें आसमान पर पहुंच गया हो, लेकिन जमीनी हकीकत दावों से कोसों दूर नजर आ रही है। फेसबुक, व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जहां जीत के खोखले दावों और नारों का शोर जोरों पर है, वहीं धरातल पर मुख्य राजनीतिक दल—भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस—अभी तक प्रत्याशियों का टोटा झेल रहे हैं।
नामांकन प्रक्रिया की घड़ी तेजी से टिक-टिक कर रही है और पर्चा दाखिल करने में अब महज दो दिन का समय शेष बचा है। बावजूद इसके, दोनों ही प्रमुख दलों ने पूरे 25 वार्डों के लिए अपने अधिकृत उम्मीदवारों की एक भी सूची जारी नहीं की है। 25 के 25 वार्डों में जिताऊ चेहरा ढूंढकर उतारना दोनों पार्टियों के लिए सबसे बड़ी परीक्षा साबित हो रहा है।
जातीय गणित और ‘भीतरघात’ का खौफ
प्रत्याशियों की घोषणा में हो रही देरी की मुख्य वजह पेचीदा जातीय समीकरण और एक-दूसरे की रणनीति को मात देने की होड़ है। दोनों दल इस आशंका से डरे हुए हैं कि समय से पहले सूची जारी करने पर बगावत का झंडा बुलंद हो सकता है और असंतुष्ट दावेदार निर्दलीय मैदान में कूदकर समीकरण बिगाड़ सकते हैं। इसी डर के चलते दोनों पार्टियां “पहले तुम, फिर हम” की नीति पर चलते हुए एक-दूसरे के पत्ते खुलने का इंतजार कर रही हैं।
दावेदारों की कानूनी और भ्रष्टाचार की ‘कुंडली’ की जांच
महिला आरक्षित वार्डों में जहां दोनों दल सशक्त महिला प्रत्याशियों की तलाश में एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं, वहीं पिछले कार्यकाल के विवादित चेहरों की स्क्रीनिंग को लेकर भी मंथन दौर जारी है। पूर्व पार्षदों और भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे दावेदारों पर कानूनी सलाहकारों के जरिए शिकंजा कसा जा रहा है। विधि विशेषज्ञ चुनाव आयोग के कड़े नियमों की कसौटी पर दावेदारों की योग्यता जांच रहे हैं ताकि नामांकन के बाद किसी कानूनी अड़चन या पर्चा खारिज होने की नौबत न आए।
अधर में संभावित प्रत्याशी, निर्दलियों की नजरें टिकीं
फिलहाल संभावित उम्मीदवार टिकट पाने की उम्मीद में जयपुर और जिला मुख्यालय के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन टिकट की अनिश्चितता के चलते वे धरातल पर खुलकर जनसंपर्क शुरू करने से कतरा रहे हैं। वहीं, स्थिति को भांपते हुए निर्दलीय खेमे ने भी अभी अपने पत्ते पूरी तरह नहीं खोले हैं और रणनीतिक चुप्पी साध रखी है।
अब देखना दिलचस्प होगा कि नामांकन के अंतिम दिनों में दोनों दल किस तरह बगावत की आग को शांत करते हुए 25 वार्डों में अपने योद्धा उतारते हैं या फिर निर्दलीय बाजी मार ले जाते हैं।












