अबतक इंडिया न्यूज देशनोक 27 अगस्त । लक्ष्मीनारायण शर्मा । देशनोक नगरपालिका चुनाव की तारीखें करीब आते ही स्थानीय राजनीति का पारा चरम पर पहुँच गया है। बीकानेर जिला निर्वाचन विभाग जहाँ प्रशासनिक तैयारियों को अंतिम रूप दे रहा है, वहीं भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों ही प्रमुख दल शह-मात के खेल में जुट गए हैं। हाल ही में संपन्न हुई बैठकों के बाद एक तरफ कांग्रेस रणनीति तैयार कर रही है, वहीं दूसरी तरफ कोलायत के युवा विधायक अंशुमान सिंह भाटी की सीधी सक्रियता ने भाजपा खेमे में नया जोश भर दिया है।
विधायक अंशुमान सिंह भाटी की एंट्री: ध्वस्त हुए self-proclaimed समीकरण
देशनोक भाजपा में लंबे समय से चली आ रही तथाकथित गुटबाजी के कारण पार्टी के मूल कार्यकर्ताओं और निष्ठावान मतदाताओं में निराशा देखी जा रही थी। लेकिन निकाय चुनाव की घोषणा के साथ ही विधायक अंशुमान सिंह भाटी ने मोर्चा संभाल लिया है।
- गिले-शिकवे दूर: विधायक ने स्थानीय कार्यकर्ताओं और संभावित दावेदारों के साथ ‘मन की बात’ कर उनके असंतोष को शांत किया है।
- जमीनी फीडबैक: कुशल प्रबंधन के लिए जाने जाने वाले विधायक भाटी सीधे धरातल पर उतरकर वार्डों की नब्ज टटोल रहे हैं। उनकी सक्रियता से स्वयंभू राजनीतिक विश्लेषकों के गणित गड़बड़ा गए हैं।
- बदले सुर: जो पूर्व पार्षद हफ्ते भर पहले संगठन से खफा होकर दूसरी राह तलाश रहे थे, वे अब फिर से भाजपा का टिकट पाने के लिए दिल्ली-जयपुर के राजनीतिक आकाओं के चक्कर काट रहे हैं।
‘सुरक्षित’ वार्डों में दावेदारों की बाढ़, बगावत का खतरा
दोनों ही प्रमुख दलों में जनाधार वाले और सुरक्षित माने जाने वाले वार्डों में दावेदारों की कतार लग गई है। एक-एक सीट पर आधा-आधा दर्जन प्रत्याशी जोर आजमाइश कर रहे हैं।
- रणनीतिकारों की परीक्षा: किसी एक प्रत्याशी का चयन करना दोनों पार्टियों के लिए सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा साबित हो रहा है।
- बागी फैक्टर: असंतुष्ट दावेदारों की चुनावी बगावत सीधे तौर पर अंतिम परिणाम के आंकड़ों को प्रभावित कर सकती है।
- सख्ती से जांच: पिछली बार भाजपा प्रत्याशी का पर्चा खारिज होने की घटना को देखते हुए इस बार दागी, बागी और आपराधिक पृष्ठभूमि वाले आवेदकों पर विशेष सतर्कता बरती जा रही है।
भाजपा मंडल अध्यक्ष पंचारिया पर विवाद: ‘आवास योजना’ और ‘कांग्रेस-प्रेम’ की छाया

भाजपा के भीतर मंडल अध्यक्ष पवन पंचारिया की भूमिका को लेकर असंतोष सतह पर आ गया है:
- स्वीकार्यता का संकट: पूर्ववर्ती कांग्रेस बोर्ड में पार्षद रहे पंचारिया की कार्यशैली को लेकर मूल भाजपाई कार्यकर्ता असहज महसूस कर रहे हैं।
- भ्रष्टाचार के आरोप: प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) का भुगतान लाभार्थी के स्थान पर अपने निजी बैंक खाते में करवाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है।
- प्रशासनिक शिकंजा: पालिका प्रशासन द्वारा जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद जारी 7 दिवसीय नोटिस को विरोधी खेमा और मतदाता भुनाने के फिराक में हैं।
पूर्व अध्यक्ष ओमप्रकाश मुंधड़ा की राह में कांटे: एसीबी जांच और आस्था का मुद्दा
पिछली बार बागी निर्दलीय पार्षदों की बैसाखी के सहारे सत्ता में आए कांग्रेस के पूर्व पालिका अध्यक्ष ओमप्रकाश मुंधड़ा की डगर भी इस बार आसान नहीं दिख रही है।
- एसीबी और फर्जी पट्टा प्रकरण: मुंधड़ा पर लगे भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, एसीबी (ACB) में लंबित जांचें और फर्जी पट्टा जारी करने के मुकदमे चुनाव में उनके लिए बड़ी रुकावट बन रहे हैं।
- जलभराव और बदहाली: स्थानीय निवासियों में आज भी कीचड़ भरे मार्गों से गुजरी अंतिम शवयात्राओं का दर्द ताज़ा है, जिसे भाजपा भुनाने में जुटी है।
- तेमड़ा राय मार्ग विवाद: लाखों करणी भक्तों की आस्था से जुड़े तेमड़ा राय मंदिर मार्ग के नाम परिवर्तन के फैसले ने जनआक्रोश पैदा किया था। भले ही तत्कालीन मंत्री को सार्वजनिक माफी मांगनी पड़ी हो, लेकिन चुनावी माहौल में यह मुद्दा फिर गरमा रहा है।
देशनोक नगरपालिका की 25 सीटों पर इस बार मुकाबला बेहद दिलचस्प और कांटे का होने वाला है। जहां कांग्रेस अपनी पुरानी उपलब्धियों और सोशल मीडिया कैंपेन के सहारे वापसी का दावा कर रही है, वहीं भाजपा एकजुटता और सशक्त नेतृत्व के दम पर बोर्ड बनाने का दावा कर रही है। टिकटों की आधिकारिक घोषणा के बाद ही देशनोक का असली सियासी नक्शा साफ हो पाएगा।












